दिल्ली में CNG सिलेंडर हाइड्रो टेस्ट पर बढ़ी सख्ती, महज 10 टेस्टिंग सेंटर के कारण भटक रहे दिल्लीवासी
दिल्ली में सीएनजी सिलेंडरों का हाइड्रो टेस्ट अनिवार्य होने से वाहन चालकों को टेस्टिंग सेंटरों की कमी और फर्जीवाड़े के ...और पढ़ें

दिल्ली में सीएनजी वाहनों को हाइड्रो टेस्ट अनिवार्य, जागरण।
HighLights
दिल्ली में सीएनजी सिलिंडर हाइड्रो टेस्ट अनिवार्य किया गया।
टेस्टिंग सेंटरों की कमी से वाहन चालक हो रहे परेशान।
आईजीएल ने एआई-आधारित जांच प्रणाली का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया।
नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। दिल्ली में सीएनजी वाहनों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए सिलेंडर का हाइड्रो टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया है। पंपों को सख्त निर्देश हैं कि बिना वैध हाइड्रो-टेस्ट प्रमाण पत्र के वाहनों में गैस न भरी जाए।
कागजों पर यह नियम सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है, लेकिन जमीन पर तैयारी के अभाव में यह आदेश वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बन गया है।
हर तीन साल पर हाइड्रो-टेस्ट कराना अनिवार्य
सीमित टेस्टिंग सेंटर, फर्जीवाड़े की आशंका और प्रशासनिक लापरवाही के कारण दिल्ली के लाखों वाहन चालक सड़कों से लेकर पंपों तक मुश्किलों में है।
केंद्र सरकार के गैस सिलेंडर (संशोधित) नियम, 2025 के तहत सीएनजी वाहनों के सिलेंडरों का हर तीन साल में पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पेसो) से मान्यता प्राप्त केंद्र से हाइड्रो-टेस्ट कराना अनिवार्य किया गया है।
इसी वर्ष में 19 अगस्त टिकरी कलां इलाके में इसी वर्ष 19 अगस्त को सीएनजी पंप पर ट्रक में गैस भरते समय सिलेंडर में जोरदार धमाके में तीन लोगों की मौत के बाद इसपर सख्ती तेज हुई है।
सेंटरों की कमी के कारण बढ़ रही परेशानी
इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आइजीएल) की वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली में पेसो द्वारा अधिकृत कुल 10 ही टेस्टिंग सेंटर हैं, जबकि राजधानी में सीएनजी वाहनों की संख्या लाखों में है। इसके अलावा दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में वाहन रोजाना आते हैं।
मांग और आपूर्ति में भारी अंतर के कारण चालकों को टेस्ट के लिए दो से तीन महीने का इंतजार करना पड़ रहा है और एक टेस्ट में पूरा दिन लग रहा है। सूची में कई पते गलत दर्ज हैं। उदाहरण के लिए, छत्तरपुर के पते पर दर्ज सेंटर के कर्मचारियों ने दिए नंबर पर बताया कि उसका सेंटर असल में हरियाणा में है और वाहन वहीं लाना होगा। ऐसे में चालक भटक रहे हैं।
लंबी कतारों का फायदा उठा रहे दलाल
केंद्रों के बाहर लंबी कतारों का फायदा दलाल उठा रहे हैं। वाहन चालकों को मजबूरी में मुंहमांगे दाम चुकाने पड़ रहे हैं। पूर्वी दिल्ली के निवासी अमित गोयल ने बताया कि क्षेत्र में कोई सेंटर न मिलने पर उन्हें गाजियाबाद का रुख करना पड़ा और तीन हजार रुपये देकर जांच करानी पड़ी, चिंताजनक कि जांच की दरें भी स्पष्ट नहीं हैं।
बिना जांच के भरी जा रही सीएनजी
जबकि, कई पंपों पर बिना जांच के गैस भरने या फर्जी सर्टिफिकेट आने की बात सामने आई है। मथुरा रोड स्थित एक सीएनजी स्टेशन में किसी भी वाहन के सिलेंडर का प्रमाण पत्र नहीं देखा जा रहा था। इस बारे में पूछे जाने पर पंप के मैनेजर विपिन के अनुसार, कर्मियों को जागरूक किया गया है, लेकिन प्रमाण पत्रों की सत्यता जांचने की कोई व्यवस्था नहीं है।
एक पंप कर्मी ने बताया कि जब वे वैध प्रमाण पत्र मांगते हैं, तो चालकों के साथ बहस और मारपीट तक की नौबत आ जाती है। इस संबंध में दिल्ली पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बिबेक बनर्जी के अनुसार, कागजों की प्रमाणिकता जांचने की व्यवस्था नहीं है।
आइजीएल ने शुरू किया पायलट प्रोजक्ट
उधर, फर्जीवाड़े पर लगाम कसने के लिए आइजीएल ने दिल्ली के 10 सीएनजी स्टेशनों पर एआइ आधारित स्वत: संचालित वाहन जांच सिस्टम का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसमें स्टेशन पर लगे एआइ कैमरे गाड़ी की नंबर प्लेट को स्कैन करते हैं।
यह सिस्टम सीधे पेसो के पोर्टल से जुड़ा होता है, जो स्वतः जांच करता है कि सिलिंडर का हाइड्रो-टेस्ट वैध है या नहीं और सिस्टम अलर्ट जारी कर देता है। आइजीएल के एक अधिकारी ने बताया इसे दिल्ली में स्थित आइजीएल के 120 से अधिक सीएनजी स्टेशनों में लागू करने की योजना है।
