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'मैं ठीक हूं पापा...', सत्य निकेतन हादसे में घायल नीरज की 6 बार हो चुकी सर्जरी; एम्स में लड़ रहा जिंदगी की जंग

Published: Fri, 02 Oct 2026 12:09 PM (IST)

जम्मू के कठुआ से दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने आया नीरज बावा सत्य निकेतन में इमारत ढहने से गंभीर रूप से ...और पढ़ें

नीरज का फाइल फोटो। AI जनरेटेड

नीरज का फाइल फोटो। AI जनरेटेड

HighLights

  1. नीरज बावा सत्य निकेतन इमारत ढहने से गंभीर रूप से घायल हुआ।

  2. छह सर्जरी के बाद एम्स आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रहा।

  3. पिता दर्शन दास बेटे के ठीक होने की आस में इंतजार कर रहे।

अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। एक साल पहले जम्मू के कठुआ से 20 वर्षीय नीरज बावा पढ़ाई के लिए दिल्ली आया था। शर्मीले स्वभाव के नीरज का सपना दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी कर कुछ बड़ा करने का था।

वह डीयू के मोतीलाल नेहरू कॉलेज का छात्र है। पिता दर्शन दास ने बेटे को हंसी-खुशी दिल्ली भेजा था। आज वही पिता करीब एक महीने से एम्स के वार्ड नंबर 9 के आईसीयू के बाहर बैठकर ठीक होने की आस में बैठे हैं।

वहीं, अंदर नीरज छह सर्जरी और कई स्किन ग्राफ्ट के बाद जिंदगी की जंग लड़ रहा है। मलबे में दबे नीरज ने दोस्तों को लाइव लोकेशन भेजी थी।

नीरज ने भेजी थी लाइव लोकेशन

6 सितंबर को सत्य निकेतन में नीरज अपने दोस्त नितीश चिब के साथ पीजी में लंच करके उठा ही था कि पूरी इमारत भरभराकर ढह गई। मलबे में तीन छात्र दब गए। नीरज ने मलबे में दबे-दबे ही दोस्तों को फोन किया और अपनी लाइव लोकेशन भेजी।

इसके बाद कई घंटे चले बचाव अभियान के बाद उसे बाहर निकाला गया। पेट, पीठ और जांघ पर गहरे घाव थे और हिप की हड्डी टूट गई थी। हादसे में डीयू के पांच छात्र अर्पित जाज, अक्षत यादव, पवन यादव, युवराज सोनी और अभिषेक कुमार की मौत हो गई।

टीवी की क्लिप में दिखा चेहरा

67 वर्षीय दर्शन दास को बेटे के हादसे की जानकारी टीवी की खबर से मिली। वह बताते हैं, "खबरों में एक क्लिप चल रही थी। मलबे से एक लड़के को स्ट्रेचर पर ले जा रहे थे। मुझे लगा, यह चेहरा तो मेरे नीरज जैसा है।" तभी बेटी ने फोन पर कहा, "पापा, उसके हाथ में राखी देखो।" हादसे से ठीक एक सप्ताह पहले बहन ने नीरज की कलाई पर राखी बांधी थी। उसी राखी से बेटे की पहचान पक्की हुई।

अगले दिन परिवार को आईसीयू में नीरज से मिलने दिया गया। पिता कहते हैं, "मेरे बेटे ने मुझे देखते ही हाथ उठाकर इशारा किया। फिर धीरे से फटी हुई आवाज में बोला "मैं ठीक हूं पापा।" दर्शन दास की आंखें नम हो जाती हैं। वह कहते हैं, "जब तक मेरा बेटा आईसीयू में है, मैं यहीं रहूंगा।"

बेटे को देखने पहुंच रहे कॉलेज के दोस्त

नीरज से मिलने उसके कॉलेज के दोस्त लगातार पहुंच रहे हैं। दर्शन दास कहते हैं, "मुझे पता ही नहीं था कि मेरे शर्मीले से बेटे ने दिल्ली में इतने दोस्त बना लिए हैं।"

नीरज के दोस्त नितीश ने बताया कि "मलबे में दबा हुआ नीरज चिल्ला रहा था दोस्तों, मुझे बचाओ।" कहा कि "डीयू में आकर कुछ बड़ा करने का सपना था। अब दिल्ली में मन नहीं लगता। "नीरज को अपने जख्मों से ज्यादा इस बात की चिंता है कि उसका एक साल खराब हो जाएगा। दिल्ली आने से पहले उसने पिता से कहा था, "एक दिन आपको गर्व करवाऊंगा।"

आज पिता का कहना है कि अब बस एक ही इच्छा है "मुझे गर्व नहीं अपना बेटा अपने पैरों पर खड़ा हो जाए।"

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