विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

दिल्ली में फिर दोहरा सकता है सत्य निकेतन जैसा हादसा, मंगोलपुरी पंजाबी कैंप की जर्जर इमारत दे रही न्योता

Published: Sun, 20 Sep 2026 07:09 PM (IST)

मंगोलपुरी पंजाबी कैंप में 250 से अधिक परिवार जर्जर इमारत में जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं, जहां कभी भी सत्य निकेतन जैसा हादसा हो सकता है।

मंगोलपुरी पंजाबी कैंप का जर्जर इमारत।

मंगोलपुरी पंजाबी कैंप का जर्जर इमारत।

HighLights

  1. मंगोलपुरी पंजाबी कैंप की इमारत 90% जर्जर, कभी भी गिर सकती है।

  2. 250 से अधिक परिवार जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर हैं।

  3. प्रशासन ने इमारत को खतरनाक घोषित किया, निवासी पुनर्निर्माण चाहते हैं।

संवाद सहयोगी, बाहरी दिल्ली। मंगोलपुरी पंजाबी कैंप जर्जर होने के होने के फिर सत्य निकेतन जैसा हादसा हो सकता है। जहां 250 से अधिक परिवार जान जोखिम में डालकर रह रहे है। दो मंजिला इस इमारत में जगह-जगह छतों का मलबा गिरने के कारण लौहे के सरिये बाहर दिखाई दे रहा है।

कई दीवारों के झुकने व जर्जर होने के कारण गिरने की स्थिति में है। जिसके कारण कैंप में रहने वाले लोगों के साथ दुर्घटना की आशंका भी बनी हुई है। कैंप के निर्माण के बाद वर्ष 1984 में पंजाब में सिख दंगों के शिकार हुए लोगों को इस कैंप में शरण दी गई।

प्रशासन की ओर से कैंप की इमारत के रखरखाव नहीं किया गया

लेकिन प्रशासन की ओर से कैंप की इमारत के रखरखाव नहीं किया गया। जिसके कारण कैंप की स्थिति जर्जर होती चली गई। अब इमारत के अधिकतर कमरे खंडहर हो चुके है। जहां किसी भी समय अचानक से छत का मलबा गिर जाता है। तो कभी इमारत का कोई हिस्सा। ऐसे में लोग डर के साये में जी रहे है।

कमरों के सामने बनी छज्जे की दीवार में दरार व झुकी हुई है। इमारत के ऊपरी तलों पर पैर रखते ही छत हिलने लगती है। दीवारों पर पकड़ने पर मन में डर रहता है कि दीवार गिर न जाएं। कैंप में इमारत 90 प्रतिशत खस्ता हो चुकी है। इतना ही नहीं यहां लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे है।

नियमित सफाई न होने के कारण जलनिकासी बाधित

नालियों की नियमित सफाई न होने के कारण जलनिकासी बाधित रहती है और ओवरफ्लो होकर गंदा पानी परिसर में भर जाता है। मानसून के दौरान स्थिति और भी गंभीर बन जाती है। जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है। आरडब्ल्यूए अध्यक्ष जगदीश राज ने बताया कि 2001 के बाद कैंप में किसी प्रकार की कोई मरम्मत नहीं की गई।

दो-तीन वर्ष पूर्व इमारत को प्रशासन द्वारा खतरनाक घोषित किया जा चुका है। मजबूरन लोग इमारत में रह रहे है। हमारी मांग है कि कैंप का दोबारा से निर्माण कर सरकार हमारे घर हमें दें। ताकि बिना डर डर के अपने घरों में रह सकें।

यह भी पढ़ें- दिल्ली में वायु प्रदूषण पर सख्ती: हॉटस्पॉट की मैपिंग शुरू, 31 अक्टूबर तक सड़क निर्माण कार्यों को पूरा करने का लक्ष्य