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दिल्ली में इमारतें गिरती हैं, इंजीनियर सस्पेंड होते हैं और फिर लौट आते हैं; MCD की कार्रवाई पर उठे सवाल

Published: Fri, 06 Nov 2026 11:49 AM (IST)

राजधानी में इमारत गिरने के बाद एमसीडी ने दो इंजीनियरों को निलंबित किया है, लेकिन यह कार्रवाई अक्सर दिखावटी साबित ...और पढ़ें

दिल्ली के चावड़ी बाजार में गुरुवार को निर्माणाधीन इंमारत के ढहने के बाद उमड़े मीडियाकर्मी। फाइल फोटो

दिल्ली के चावड़ी बाजार में गुरुवार को निर्माणाधीन इंमारत के ढहने के बाद उमड़े मीडियाकर्मी। फाइल फोटो

HighLights

  1. एमसीडी ने इमारत गिरने पर दो इंजीनियर निलंबित किए।

  2. निलंबन के बाद इंजीनियरों की बहाली आम बात है।

  3. कठोर कार्रवाई के लिए नियमों में बदलाव जरूरी।

निहाल सिंह, नई दिल्ली। राजधानी में एक बार फिर से इमारत गिरने के बाद एमसीडी ने दिखावटी कार्रवाई करते हुए जूनियर इंजीनियर अमन दलाल और असिस्टेंट इंजीनिर मो. नईम को को निलंबित कर दिया है। ज्यादातर घटनाओं में ऐसा ही होता है।

फिर मामला एमसीडी के सतर्कता विभाग से लेकर संस्थापना विभाग की जांच तक सीमित रह जाता है। कभी एक साल तो कभी दो से तीन साल में इंजीनियरों की बहाली भी हो जाती है। साथ ही घटनाओं के बाद फिर यही इंजीनियर किसी न किसी जोन में भवन विभाग में ही तैनात हो जाते हैं।

अधिशासी अभियंता फोन तक नहीं उठाते

भवन विभाग में इन इंजीनियरों की तैनाती को लेकर अक्सर एक सीडिकेंट चलने तक के आरोप तक लगते हैं। हाल में स्थायी समिति की बैठक स्वयं भाजपा के सदस्य मनीष चड्ढा ने सिटी एसपी जोन में अवैध निर्माण और उस पर कार्रवाई न करने पर अवैध वसूली का मामला उठाया था।

इतना ही नहीं उन्होंने यहां तक कहा था कि इलाके के अधिशासी अभियंता ने न तो उनका फोन उठाया और न ही जिस इमारत पर अवैध निर्माण की उन्होंने शिकायत की थी उस पर कार्रवाई भी नहीं की।

निलंबन के बाद मामला कौन देखता है?

एमसीडी के नियमों के अनुसार कोई भी अधिकारी और कर्मचारी निलंबित होता है तो मामला एमसीडी के संस्थापना विभाग और सतर्कता विभाग के पास चला जाता है। इसके बाद यह विभाग संबंधित आरोपों पर चार्जशीट बनाता है। अगर, संबंधित कर्मचारी और अधिकारी दोषी पाया जाता है तो ज्यादा से ज्यादा कर्मचारी के खिलाफ प्रमोशन रोकने से लेकर इंक्रीमेंट को रोककर छोड़ दिया जाता है।

अधिकारी को लापरवाही या भ्रष्टाचार में नौकरी से निकाला

इस प्रक्रिया में सतर्कता विभाग के साथ ही अतिरिक्त आयुक्त और निगमायुक्त शामिल होते हैं।निगमायुक्त अश्वनी कुमार के रहते जरूर कुछ मामले ऐसे देखने को मिले थे जब उन्होंने इस तरह के मामलों में कठोर कार्रवाई करते हुए नौकरी से निकाल दिया था। हालांकि इसके बाद और पूर्व में कोई और मामला ऐसा नहीं देखा गया जब किसी स्थायी कर्मचारी और अधिकारी को लापरवाही या भ्रष्टाचार में नौकरी से निकाला गया हो।

इस घटना की निगरानी के लिए इन अधिकारियों पर थी सीधी जिम्मेदारी

  • अमन दलाल, कनिष्ठ अभियंता, सिटी एसपी जोन
  • मो. नईम, सहायक अभियंता, सिटी एसपी जोन
  • राकेश बृजवाल, अधिशासी अभियंता, सिटी एसपी जोन
  • सत्यदेव, अधीक्षण अभियंता, सिटी एसपी जोन
  • कनिका, उपायुक्त, सिटी एसपी जोन


"निलंबन इन तरह की घटनाओं का समाधान नहीं है। इसके लिए बड़े स्तर पर कठोर कार्रवाई के लिए नियुक्ति और निलंबन संबंधी नियमों को बदलने की जरुरत है। क्योंकि वर्तमान नियमों में इतना लचीला पन है कि मामला केवल हल्के जुर्माने तक ही सीमित होकर रह जाता है।"

-जगदीश ममगांई, पूर्व चेयरमैन, निर्माण समिति, एमसीडी।

"हमने घटना के तुरंत बाद कठोर कदम उठाते हुए दो इंजीनियरों को निलंबित किया है। मामले की जांच की जा रही है। जो भी दोषी होगा उसे बक्शा नहीं जाएगा। अगर, यह इंजीनियर और दोषी है तो यह सुनिश्चित किया जाएगा इनकी बहाली न हो। हम मेजर पेनाल्टी लगाएंगे।"

-प्रवेश वाही, महापौर, दिल्ली।

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