दिल्ली EV पॉलिसी को लेकर क्यों बढ़ी CNG ऑटो ड्राइवरों की टेंशन? CM को चिट्ठी लिखकर बताई डिमांड
Delhi EV Policy: दिल्ली के सीएनजी ऑटो ड्राइवर सरकार की ईवी नीति का विरोध कर रहे हैं, जिससे 2027 से नए सीएनजी ऑटो पंजीकरण बंद हो सकते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य- AI Generated
HighLights
दिल्ली के सीएनजी ऑटो चालक ईवी नीति का विरोध कर रहे हैं।
2027 से नए सीएनजी ऑटो पंजीकरण बंद होने की संभावना।
50 हजार नए ई-ऑटो परमिट जारी करने की मांग की।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली सरकार की प्रस्तावित इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति को लेकर राजधानी के सीएनजी ऑटो चालकों ने अपनी चिंता जताई है। सरकार जहां विभिन्न श्रेणियों के वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की तैयारी कर रही है और इसके लिए समय-सीमा भी तय कर रही है।
नए सीएनजी तिपहिया (ऑटो) के लिए जनवरी 2027 से नया पंजीकरण बंद कर दिए जाने की संभावना है। इसे देखते हुए ऑटो चालक तनाव में हैं। चालकों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में सीएनजी ऑटो को बंद करना व्यावहारिक नहीं होगा।
सीएम को पत्र लिखकर रखी डिमांड
आपका अपना ऑटो टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष संतोष कुमार पांडेय ने इस संबंध में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर अपनी समस्याओं और मांगों से अवगत कराया है। संगठन ने सरकार से आग्रह किया है कि मौजूदा सीएनजी ऑटो को बंद करने के बजाय यदि इलेक्ट्रिक ऑटो को बढ़ावा देना है तो 50 हजार नए ई-ऑटो परमिट जारी किए जाएं। इससे प्रदूषण नियंत्रण के लक्ष्य को भी आगे बढ़ाया जा सकेगा और वर्तमान ऑटो चालकों की आजीविका पर भी संकट नहीं आएगा।
संगठन का कहना है कि दिल्ली में अभी इलेक्ट्रिक ऑटो के लिए आवश्यक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर्याप्त नहीं है। सामान्य चार्जर से ऑटो की बैटरी चार्ज होने में काफी समय लगता है, जिससे चालकों की रोजाना की कमाई प्रभावित होती है।
वहीं बैटरी स्वैपिंग (बैटरी बदलने) की सुविधा भी पूरे शहर में उपलब्ध नहीं है। जिन स्थानों पर यह सुविधा मौजूद है, वहां इसकी लागत इतनी अधिक है कि चालक की आय का बड़ा हिस्सा इसी पर खर्च हो जाता है।
किराये पर चलते हैं 90% ऑटो ड्राइवर
ऐसे में वर्तमान परिस्थितियों में पूरी तरह इलेक्ट्रिक व्यवस्था अपनाना व्यावहारिक नहीं है। ऑटो परिवार का कहना है कि सरकार को पहले व्यापक स्तर पर चार्जिंग स्टेशन और बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क विकसित करना चाहिए। उनका कहना है कि 90% ऑटो चालक किराये पर चलते हैं। सीएनजी ऑटो से ज्यादा ईवी ऑटो महंगा है।
दिल्ली में वर्तमान में करीब एक लाख सीएनजी ऑटो संचालित हैं। वर्ष 2000 में राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए पेट्रोल चालित ऑटो को सीएनजी में परिवर्तित करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। उस समय इसे प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में बड़ा कदम माना गया था।
