पराली 4% घटी, AQI 15% सुधरा; फिर भी सामान्य दिनों में ज्यादा प्रदूषित रही दिल्ली की हवा
दिल्ली की हवा में 2026 में औसत एक्यूआइ में सुधार हुआ, लेकिन सामान्य दिनों में प्रदूषण बढ़ा है। पराली जलाने ...और पढ़ें

पराली घटी पर सामान्य दिनों में बढ़ा प्रदूषण।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली की हवा में प्रदूषण बढ़ने पर हर साल पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने और मौसम को बड़ी वजह बताया जाता है। लेकिन 2024 से 2026 के आंकड़ों के अध्ययन में सामने आया है कि इन दोनों कारणों से दिल्ली की हवा में हुए बदलाव की पूरी व्याख्या नहीं की जा सकती।
दिल्ली स्थित जलवायु अनुसंधान संगठन क्लाइमेट ट्रेंड्स की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में पराली जलाने की घटनाओं में मामूली कमी आई, जबकि दिल्ली के औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में काफी सुधार दर्ज हुआ है। इससे दिल्ली के अपने प्रदूषण स्रोतों की भूमिका की जांच जरूरी हो जाती है।
क्या कहते हैं रिपोर्ट्स?
रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं 2025 में 201 थीं, जो 2026 में चार प्रतिशत घटकर 193 रह गईं। जबकि इसी दौरान दिल्ली का औसत एक्यूआइ 169.3 से कहीं ज्यादा घटकर 142.6 हो गया, यानी 15.8 प्रतिशत की गिरावट आई।
इसके विपरीत, 2024 से 2025 के बीच पराली जलाने की घटनाओं में 88 प्रतिशत की कमी आई थी, लेकिन दिल्ली के औसत एक्यूआइ में केवल 3.9 प्रतिशत सुधार हुआ। इससे स्पष्ट है कि पराली जलाने और दिल्ली के प्रदूषण के बीच संबंध हर साल एक जैसा नहीं रहा।
औसत AQI सुधरा, सामान्य दिनों में प्रदूषण बढ़ा
रिपोर्ट का एक अहम निष्कर्ष यह भी है कि औसत एक्यूआइ में सुधार का मतलब यह नहीं कि दिल्ली की हवा हर दिन साफ रही। वर्ष 2025 में सितंबर-अक्टूबर के दौरान मध्य एक्यूआइ 135 था, जो 2026 में बढ़कर 154 हो गया।
यानी इसमें 14.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मध्यम एक्यूआइ रोजाना के आंकड़ों को छोटे से बड़े क्रम में रखने पर बीच का मान होता है। इससे सामान्य दिन की हवा की स्थिति का बेहतर अंदाजा मिलता है।
2025 में कितना था आंकड़ा?
दूसरी ओर, एक्यूआइ 200 से ऊपर रहने वाले दिनों की संख्या 2025 के 10 से घटकर 2026 में तीन रह गई। वर्ष 2025 में एक्यूआइ अधिकतम 353 तक पहुंचा था, जबकि 2026 में यह 245 रहा।
यानी इस बार बेहद खराब प्रदूषण वाले दिन कम रहे और इसी से औसत एक्यूआइ में सुधार हुआ। लेकिन सामान्य दिनों में प्रदूषण बढ़ने का आंकड़ा बताता है कि हवा की समस्या पूरी तरह दूर नहीं हुई।
मौसम भी सुधार की पूरी वजह नहीं
अध्ययन में मौसम के आंकड़ों का भी विश्लेषण किया गया। सितंबर-अक्टूबर 2026 में दिल्ली में वर्षा पिछले साल की तुलना में 78.2 प्रतिशत कम रही।
हवा की औसत गति में केवल 2.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि प्रदूषकों को ऊपर फैलने के लिए उपलब्ध वायुमंडलीय परत की ऊंचाई में 4.3 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। कम वर्षा और वायुमंडलीय परत की कम ऊंचाई आम तौर पर प्रदूषण घटाने में मददगार नहीं होतीं।
ऐसे में वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल, उद्योगों और कचरा या जैविक पदार्थ जलाने से होने वाले उत्सर्जन जैसे स्थानीय स्रोतों की भूमिका की भी जांच जरूरी है। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि दिल्ली की हवा में बदलाव समझने के लिए पराली, मौसम और स्थानीय प्रदूषण स्रोतों का एक साथ आकलन करना होगा।
