गुरुग्राम-मानेसर में बिगड़ी हवा, अब मिली राहत
अक्टूबर में गुरुग्राम और मानेसर में वायु प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया था, कई बार AQI 200 के पार ...और पढ़ें

गुरुग्राम मानेसर में बिगड़ी हवा (एआई जेनरेटेड इमेज )
HighLights
अक्टूबर में गुरुग्राम-मानेसर में वायु प्रदूषण बढ़ा, AQI 200 पार।
23 अक्टूबर को गुरुग्राम में PM2.5 स्तर 289 दर्ज किया गया।
हवा चलने से मिली अस्थायी राहत, स्थायी समाधान की जरूरत।
जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। अक्टूबर में वायु प्रदूषण ने गुरुग्राम और मानेसर के लोगों की सांसों पर लगातार दबाव बनाए रखा। महीने के शुरुआती दिनों से ही हवा की गुणवत्ता में उतार-चढ़ाव देखने को मिला और कई बार वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 200 के पार पहुंच गया।
23 अक्टूबर को गुरुग्राम में पीएम2.5 का स्तर 289 तक दर्ज किया गया, जबकि मानेसर में भी इसी दिन एक्यूआई 215 रहा। हालांकि, पिछले कुछ दिनों में हवा चलने से प्रदूषक कणों के बिखराव में मदद मिली और प्रदूषण के स्तर में कुछ सुधार दर्ज किया गया। यह राहत फिलहाल स्थायी नहीं मानी जा सकती।
प्रदूषण ने पकड़ी तेजी
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निगरानी आंकड़ों के अनुसार, गुरुग्राम में अक्टूबर के दौरान अलग-अलग दिनों में पीएम2.5 और पीएम10 का स्तर बढ़ा रहा। दो अक्टूबर को पीएम2.5 का स्तर 186, पांच अक्टूबर को 201 और सात अक्टूबर को 212 दर्ज किया गया। इसके बाद 18 से 23 अक्टूबर के बीच प्रदूषण ने फिर तेजी पकड़ी।
18 अक्टूबर को पीएम2.5 का स्तर 212, 19 अक्टूबर को 214, 20 अक्टूबर को 215, 21 अक्टूबर को 244 और 22 अक्टूबर को 271 तक पहुंच गया। 23 अक्टूबर को यह 289 दर्ज किया गया। इसके बाद 24 अक्टूबर को घटकर 172 और 25 अक्टूबर को 155 रह गया। 26 अक्टूबर को यह 128 दर्ज किया गया।
मानेसर में भी कई दिन बिगड़ी हवा
मानेसर के सेक्टर-दो औद्योगिक क्षेत्र में लगे हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निगरानी केंद्र के आंकड़ों में भी प्रदूषण का उतार-चढ़ाव सामने आया। यहां एक अक्टूबर को पीएम10 का स्तर 182, दो अक्टूबर को 207 और नौ अक्टूबर को पीएम 2.5 का स्तर 201 दर्ज किया गया।
21 अक्टूबर को पीएम 2.5 का स्तर 244, 22 अक्टूबर को 271 और 23 अक्टूबर को 289 तक पहुंचने के बजाय उपलब्ध मानेसर आंकड़े में 23 अक्टूबर को 289 नहीं, बल्कि 289 गुरुग्राम का स्तर दर्ज है। मानेसर में इसी दिन एक्यूआई 215 रहा। 24 अक्टूबर को मानेसर में एक्यूआई 174, 25 अक्टूबर को 134 और 26 अक्टूबर को 156 दर्ज किया गया।
हवा की गति बढ़ने से राहत, पर चुनौती बरकरार
विशेषज्ञों के अनुसार, हवा चलने से प्रदूषक कणों का जमाव कम हो सकता है। लेकिन, टूटी सड़कों से उड़ती धूल, निर्माण कार्य, वाहनों का धुआं और औद्योगिक गतिविधियां प्रदूषण बढ़ाने वाले प्रमुख कारक बने हुए हैं। हवा की गति कम होते ही प्रदूषक दोबारा जमा हो सकते हैं।
ऐसे में सड़कों की नियमित सफाई, धूल नियंत्रण, निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर निगरानी जरूरी है।
यह भी पढ़ें- प्रयागराज में डॉक्टरों-वकीलों में तकरार: एसआरएन अस्पताल में स्थिति सामान्य, एहतियातन पुलिस फोर्स तैनात
