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सिर्फ फेफड़े ही नहीं, दिल और दिमाग पर भी प्रदूषण का असर; दिल्ली AIIMS के डॉक्टरों ने दी चेतावनी

Published: Sat, 07 Nov 2026 11:59 PM (IST)

दिल्ली में बढ़ता वायु प्रदूषण फेफड़ों के साथ-साथ दिल, दिमाग और अन्य अंगों को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड

HighLights

  1. प्रदूषण फेफड़ों के साथ दिल, दिमाग को भी प्रभावित कर रहा।

  2. पीएम 2.5 कण रक्त प्रवाह में सूजन और तनाव बढ़ा रहे।

  3. अस्पतालों में सांस और हृदय रोगियों की संख्या लगातार बढ़ी।

अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। दिल्ली में बढ़ता वायु प्रदूषण केवल फेफड़ों को ही नुकसान नहीं पहुंचा रहा, बल्कि दिल, दिमाग और शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित कर रहा है। हवा में मौजूद पीएम 2.5 के सूक्ष्म कण सांस के साथ फेफड़ों की गहराई तक पहुंचते हैं।

अति सूक्ष्म कण रक्त प्रवाह में प्रवेश कर शरीर में सूजन और आक्सीकरण संबंधी तनाव बढ़ा सकते हैं। इससे रक्त वाहिकाओं की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है और हृदय रोग, हार्ट अटैक तथा स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है।

एम्स पल्मोनरी विभाग के पूर्व प्रमुख प्रो. डा. जीसी खिलनानी और वर्तमान प्रमुख प्रो. डा. अनंत मोहन ने भी प्रदूषण के व्यापक स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर चेतावनी दी है।

दिल, दिमाग व दूसरे अंगों तक पहुंच रहा प्रदूष

प्रो. डा. जीसी खिलनानी के अनुसार अति सूक्ष्म प्रदूषक कण फेफड़ों में पहुंचने के बाद रक्त प्रवाह के माध्यम से शरीर के दूसरे अंगों तक भी पहुंच रहे हैं, जिसका सीधा प्रभाव हृदय, रक्त वाहिकाओं, गुर्दे और पाचन तंत्र पर पड़ रहा है। इसके साथ अस्थमा, सीओपीडी और हार्ट अटैक के लिए अस्पतालों के आपातकालीन विभाग में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बढ़ता प्रदूषण आपात स्थिति

एम्स के पल्मोनरी विभाग के प्रमुख प्रो. डा. अनंत मोहन का कहना है कि प्रदूषण से हृदय, मस्तिष्क के साथ शरीर की दूसरी कार्यप्रणालियां भी प्रभावित हो रही हैं। पिछले वर्ष दीपावली के बाद सांस की दिक्कतों के मरीजों की संख्या में करीब 15 प्रतिशत तक वृद्धि देखी गई थी।

संसद में प्रस्तुत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली के एम्स, सफदरजंग, डा. राम मनोहर लोहिया अस्पताल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कालेज समूह, राष्ट्रीय क्षय रोग एवं श्वसन रोग संस्थान और वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट में वर्ष 2022 से 2024 के बीच सांस की गंभीर बीमारियों के 2,04,758 से अधिक मरीज इमरजेंसी में पहुंचे थे।

इन बातों का रखें ध्यान

-एक्यूआइ खराब होने पर बाहर जाना आवश्यक हो तो अच्छी फिटिंग वाला एन-95 मास्क पहनें।
-बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और हृदय व सांस के मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
-घर के अंदर उपयुक्त क्षमता वाला एयरप्यूरी फायर का इस्तेमाल करें।
-अस्थमा और सीओपीडी के मरीज निर्धारित दवाएं नियमित लें और इन्हेलर साथ रखें।
-लगातार खांसी, सांस फूलने या सीने में जकड़न होने पर चिकित्सकीय परामर्श लें

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