दिल्ली के प्रदूषण पूर्वानुमान में खामी, 8 साल पुराने उत्सर्जन आंकड़ों से घट रही सटीकता
दिल्ली में वायु प्रदूषण पूर्वानुमान प्रणाली पड़ोसी जिलों से आने वाले प्रदूषण की अधूरी जानकारी और पुराने उत्सर्जन आंकड़ों के कारण प्रभावित हो रही है।

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
पड़ोसी जिलों के प्रदूषण की अधूरी जानकारी सटीकता घटाती है।
पुराने उत्सर्जन आंकड़ों का उपयोग पूर्वानुमान को प्रभावित करता है।
गंभीर प्रदूषण की घटनाओं का 80% से अधिक सफल पूर्वानुमान।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली में प्रदूषण की गंभीर स्थिति का पूर्वानुमान लगाने वाली व्यवस्था गंभीर प्रदूषण की घटनाओं को काफी हद तक सही पकड़ रही है, लेकिन पुराने उत्सर्जन आंकड़े और पड़ोसी जिलों से आने वाले प्रदूषण की सीमित जानकारी इसकी सटीकता पर असर डाल रही है।
काउंसिल आन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) के अध्ययन ‘हाउ वेल कैन दिल्ली प्रेडिक्ट एयर क्वालिटी?’ में यह बात सामने आई है।
दिल्ली का एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम (एक्यूईडब्ल्यूएस) तीन दिन का वायु गुणवत्ता और मौसम पूर्वानुमान देता है, जबकि डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) पीएम 2.5 में अलग-अलग स्रोतों के योगदान का आकलन करता है।
अध्ययन के मुताबिक डीएसएस 19 पड़ोसी जिलों से दिल्ली में आने वाले पीएम 2.5 के कुल योगदान की जानकारी देता है। इनमें गाजियाबाद, गुरुग्राम, अलवर और करनाल जैसे जिले शामिल हैं।
लेकिन इन जिलों से आने वाले प्रदूषण का उद्योग, परिवहन या अन्य क्षेत्रों के हिसाब से अलग-अलग ब्योरा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यह तय करना मुश्किल होता है कि दिल्ली की हवा बिगाड़ने में किस जिले का कौन सा क्षेत्र कितना जिम्मेदार है।
2016-18 के उत्सर्जन आंकड़ों पर निर्भरता
अध्ययन के अनुसार दिल्ली सहित एनसीआर के लिए सिस्टम में दिल्ली का 2018 और एनसीआर जिलों का 2016 का उत्सर्जन इन्वेंट्री इस्तेमाल हो रहा है, जबकि एनसीआर के बाहर वैश्विक उत्सर्जन डाटाबेस का सहारा लिया जाता है। सीईईडब्ल्यू ने पुराने उत्सर्जन आंकड़ों को मौजूदा सीमाओं का प्रमुख कारण बताते हुए इन्हें नियमित रूप से अपडेट करने की सिफारिश की है।
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पूर्वानुमान में मौसम संबंधी अनिश्चितताएं भी चुनौती हैं। हवा की गति और दिशा, तापमान तथा वातावरण की ऊपरी परत की ऊंचाई में बदलाव के साथ पराली जलाने जैसी मौसमी घटनाओं के उत्सर्जन का अनुमान भी सटीकता को प्रभावित करता है।
पहले-दूसरे दिन बेहतर, तीसरे दिन मध्यम सटीकता
आइआइटीएम के अध्ययन के हवाले से सीईईडब्ल्यू ने बताया कि पूर्वानुमान पहले और दूसरे दिन अपेक्षाकृत बेहतर रहता है, जबकि तीसरे दिन इसकी सटीकता मध्यम हो जाती है। हालांकि 2023-24 और 2024-25 की सर्दियों में ‘बहुत खराब’ या उससे अधिक खराब वायु गुणवत्ता की घटनाओं को पकड़ने में इसकी सफलता 80 प्रतिशत से अधिक रही।
इसके बावजूद वास्तविक और अनुमानित प्रदूषण स्तर में अंतर बना हुआ है। 2024-25 की सर्दियों में माडल ने दिल्ली में औसत पीएम 2.5 करीब 149 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहने का अनुमान लगाया, जबकि वास्तविक औसत लगभग 175 माइक्रोग्राम रहा। इसी तरह पीएम 10 का अनुमान 231 के मुकाबले वास्तविक स्तर करीब 292 माइक्रोग्राम रहा।
सीईईडब्ल्यू ने डीएसएस में पड़ोसी जिलों के क्षेत्रवार प्रदूषण योगदान, विभिन्न नियंत्रण उपायों के प्रभाव का आकलन और मशीन लर्निंग आधारित पूर्वानुमान सुधार को शामिल करने की सिफारिश की है। साथ ही इसे केवल सर्दियों तक सीमित रखने के बजाय पूरे साल संचालित करने की जरूरत बताई है।
