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बेटों से मुंह मोड़ रहे बेऔलाद, दिल्ली में गोद ली गईं 1000 से ज्यादा बेटियां; 10 साल के आंकड़ों ने चौंकाया

Published: Sat, 17 Oct 2026 09:36 PM (IST)

दिल्ली में बेटों के मुकाबले बेटियों को गोद लेने का आंकड़ा अधिक है, जो एक सकारात्मक बदलाव दर्शाता है। विशेष ...और पढ़ें

बेटो से ज्यादा बेटियां ली जा रही हैं गोद। फोटो: आर्काइव

बेटो से ज्यादा बेटियां ली जा रही हैं गोद। फोटो: आर्काइव

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। राजधानी का यह आंकड़ा सुकून देता है कि गोद लेने के मामले में बेटियों की संख्या बेटों से अधिक है। वर्ष 2015-16 से अब तक एक हजार से अधिक बच्चियों और करीब 760 लड़कों को नए परिवार मिले हैं।
 
वहीं, वर्ष 2025-26 में छह विशेष जरूरत वाले बच्चों को भी परिवार मिला। इनमें दो बच्चों को देश में और चार को विदेश में गोद लिया गया।
 
महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार, विशेष जरूरत वाले बच्चों को गोद लेने के लिए परिवारों को जागरूक करने और बच्चों के कौशल विकास पर भी काम किया गया है।

गोद लेने में बेटियों की संख्या अधिक

गोद लेने की प्रक्रिया किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम तथा गोद लेने संबंधी नियम, 2022 के तहत पूरी की जाती है।

पहले बाल कल्याण समिति जांच के बाद बच्चे को कानूनी रूप से गोद दिए जाने योग्य घोषित करती है। इसके बाद बच्चे का उपयुक्त परिवार से मिलान किया जाता है।

सभी जरूरी औपचारिकताएं और सुरक्षा संबंधी जांच पूरी होने के बाद जिला मजिस्ट्रेट गोद लेने का आदेश जारी करते हैं।

विशेष बच्चों को भी मिला परिवार

विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, पहले विशेष जरूरत वाले बच्चों को गोद लिए जाने के मामले नहीं के बराबर थे। ऐसे बच्चों को परिवार दिलाने के लिए उनकी क्षमताओं और कौशल पर काम करने के साथ ही संभावित माता-पिता को उनकी जरूरतों के प्रति जागरूक किया गया।

इससे ऐसे बच्चों को भी परिवार मिलने का रास्ता खुला है। गोद लेने के लिए आने वाले बच्चों में अधिकतर की उम्र शून्य से छह वर्ष के बीच होती है।

गोद लेने की प्रक्रिया किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम और दत्तक ग्रहण विनियम, 2022 के तहत पूरी की जाती है।

इसमें बच्चों को उनकी उम्र के आधार पर चार श्रेणियों में रखा गया है। इनमें दो वर्ष तक, दो से चार वर्ष, चार से आठ वर्ष और आठ से 18 वर्ष तक के बच्चे शामिल हैं।

109 बच्चों को मिले नए परिवार

वर्ष 2025-26 में देश के भीतर 57 बच्चियों और 45 लड़कों को गोद लिया गया, जबकि विदेश में तीन बच्चियों और चार लड़कों को नए परिवार मिले।

इससे पहले वर्ष 2024-25 में देश के भीतर 55 बच्चियों और 40 लड़कों को गोद लिया गया था। वहीं, 10 बच्चियों और पांच लड़कों को विदेश में परिवार मिले थे।

किस वर्ष कितने गोद लिए गए बच्चे

वर्ष गोद लिए गए बच्चे
2015-16 178
2016-17 168
2017-18 121
2018-19 153
2019-20 124
2020-21 102
2021-22 87
2022-23 94
2023-24 97
2024-25 110
2025-26 109

जनवरी से सितंबर तक 71 बच्चे गोद लिए गए

  • अप्रैल: 14 (सबसे अधिक)
  • जनवरी: 12
  • जून: 11
  • सितंबर: 9
  • मार्च: 8
  • फरवरी: 6
  • मई: 5
  • जुलाई: 4
  • अगस्त: 2 (सबसे कम)

वर्ष 2025-26 के प्रमुख आंकड़े

  • कुल गोद लिए गए बच्चे-109
  • भारतीय परिवारों में-102
  • विदेशी परिवारों में-7

विशेष जरूरत वाले छह बच्चों को मिला परिवार

विशेष जरूरत वाले छह बच्चों में दो को भारतीय और चार को विदेशी परिवारों ने गोद लिया।

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