दिल्ली-NCR में मानसून की उमस बन सकती है जानलेवा, अब 28 दिन पहले मिल जाएगी हीटवेव जैसी चेतावनी
मानसून की उमस भरी गर्मी शुष्क लू से कहीं अधिक घातक है, और अब वैज्ञानिक 28 दिन पहले इसकी जानलेवा ...और पढ़ें

मानसून के दौरान बढ़ने वाली उमस वाली गर्मी इस समय की शुष्क गर्मी से कहीं अधिक घातक। (AI Generated Image)
HighLights
मानसून की उमस भरी गर्मी शुष्क लू से अधिक घातक।
वैज्ञानिक अब 28 दिन पहले देंगे जानलेवा गर्मी की चेतावनी।
दिल्ली-एनसीआर में श्रमिकों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। एनसीआर सहित देशभर में मानसून का आना अब तक केवल राहत की खबर माना जाता रहा है, लेकिन विज्ञानियों ने इसके साथ आने वाले बड़े खतरे से पर्दा उठाया है। ताजा अंतरराष्ट्रीय शोध में सामने आया है कि मानसून के दौरान बढ़ने वाली उमस वाली गर्मी इस समय की शुष्क गर्मी से कहीं अधिक घातक है।
विज्ञानियों ने अब उस मौसम पैटर्न को डिकोड कर लिया है, जिससे इस जानलेवा गर्मी की चेतावनी करीब एक महीना (28 दिन) पहले ही मौसम विभाग जारी कर सकेगा। यूनिवर्सिटी आफ रीडिंग, लीड्स और आइआइटीएम पुणे के इस साझा अध्ययन में 1940 से 2023 तक के लगभग 84 वर्षों के मौसम डाटा का विश्लेषण किया गया।
इसमें पाया गया कि उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में मानसून के प्रभाव से गर्मी का खतरा अचानक 125 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं ने उन विशिष्ट मौसम पैटर्न की भी पहचान की है, जो हवा में नमी और तापमान के घातक मिश्रण को जन्म देते हैं। इसे विज्ञानी भाषा में वेट-बल्ब तापमान कहा जाता है।
शुष्क लू के मुकाबले कहीं अधिक खतरनाक
यह शुष्क लू के मुकाबले कहीं अधिक खतरनाक है, क्योंकि जब हवा में नमी बहुत ज्यादा होती है, तो शरीर से पसीना नहीं सूखता। पसीना न सूखने के कारण शरीर का आंतरिक तापमान कम नहीं हो पाता, जिससे कुछ ही घंटों में हीटस्ट्रोक या कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम फेल होने जैसी जानलेवा स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

इस शोध के मुख्य लेखक डा अक्षय देवरास के अनुसार, अक्सर लोग गर्मियों की शुष्क लू से तो सावधान रहते हैं, लेकिन मानसून वाली उमस भरी गर्मी को गंभीरता से नहीं लेते। जब मानसून सक्रिय होता है, तो गंगा के मैदानी इलाकों (विशेषकर उत्तर प्रदेश और बिहार) में नमी का स्तर जानलेवा हो जाता है वहीं मानसून में ब्रेक आने पर यह खतरा प्रायद्वीपीय भारत और तटीय क्षेत्रों की ओर बढ़ जाता है।
दिल्ली और एनसीआर के लिए खास है रिपोर्ट
दिल्ली की घनी आबादी और कंक्रीट की ऊंची इमारतें हीट आइलैंड बनाती हैं। मानसून के दौरान जब नमी बढ़ती है तो सफदरजंग और पालम जैसे इलाकों में वेट-बल्ब तापमान खतरनाक स्तर को पार कर जाता है। भले ही तापमान 35 से 38 डिग्री हो, लेकिन उमस के कारण वह 45 डिग्री से ज्यादा महसूस होता है।

दिल्ली में यमुना के आसपास के इलाकों (जैसे आइटीओ, कश्मीरी गेट और पूर्वी दिल्ली) में नमी का स्तर ज्यादा रहता है। ऐसे में 28 दिन पहले की चेतावनी यहां के घनी बस्तियों में रहने वाले लोगों के लिए काफी मददगार होगी। यह चेतावनी ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) की तर्ज पर काम कर सकती है।
इससे दिल्ली सरकार को श्रमिकों के लिए आरेंज या रेड अलर्ट जारी करने एवं निर्माण कार्यों पर रोक लगाने का अग्रिम समय मिल जाएगा।
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