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2 अक्टूबर को केवल कैश चलेगा... MDR चार्ज के विरोध में देशभर के व्यापारी, गांधी जयंती पर ‘नो UPI डे’ की अपील

Published: Fri, 25 Sep 2026 04:56 PM (IST)

चैंबर आफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने 15 अक्टूबर से ₹2000 से अधिक के यूपीआई भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क लागू करने का कड़ा विरोध किया है।

एआई जेनेरेटेड इमेज।

एआई जेनेरेटेड इमेज।

HighLights

  1. सीटीआई ने ₹2000 से अधिक यूपीआई भुगतानों पर एमडीआर का कड़ा विरोध किया।

  2. गांधी जयंती पर 'नो यूपीआई डे' मनाने और नकद लेनदेन की अपील।

  3. वित्त मंत्री से एमडीआर शुल्क का फैसला तुरंत वापस लेने की मांग।

स्वदेश कुमार, नई दिल्ली। चैंबर आफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआइ) ने 15 अक्टूबर से 2000 से अधिक के यूपीआई भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क लागू करने के फैसले का कड़ा विरोध किया है।

सीटीआई ने दिल्ली समेत देशभर के दुकानदारों और व्यापारियों से दो अक्टूबर यानी गांधी जयंती को नो यूपीआई डे मनाने और अपनी यूपीआ मशीनों को काले कपड़े से ढककर केवल नकदी में लेनदेन करने की अपील की है।

छह करोड़ व्यापारियों पर पड़ेगा अतिरिक्त बोझ

सीटीआई के अध्यक्ष बृजेश गोयल और अन्य पदाधिकारियों का कहना है कि इस फैसले से देश के करीब छह करोड़ व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, जिससे यूपीआइ लेनदेन में 50 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है और देश में फिर से नकदी का प्रचलन बढ़ सकता है।

सीटीआई के महासचिव गुरमीत अरोड़ा और रमेश आहूजा ने बताया कि हम डिजिटल इंडिया के खिलाफ नहीं, लेकिन कम मार्जिन पर चलने वाले रिटेलर-डिस्ट्रीब्यूटर पर ये अतिरिक्त लागत व्यापार को महंगा कर देगी। सीटीआई उपाध्यक्ष राहुल अदलखा और सचिव कुंज नाकरा ने कहा कि एमडीआर को लेकर देशभर में व्यापारियों में आक्रोश है।

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बता दें कि 15 अक्टूबर से 3,000 रुपये के भुगतान पर 12 रुपये और 50,000 रुपये के भुगतान पर 200 रुपये तक का एमडीआर शुल्क दुकानदारों को देना पड़ेगा। इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है।

वित्त मंत्री से फैसला वापस लेने की अपील

सीटीआई के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, कुल 314 लाख करोड़ रुपये के यूपीआई लेनदेन में 2,000 से अधिक के लेनदेन की संख्या में भले ही केवल 4 प्रतिशत है, लेकिन वैल्यू के हिसाब से वे 66 प्रतिशत (131 लाख करोड़ रुपये) का हिस्सा बनाते हैं।

सीटीआई ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मांग की है कि डिजिटल इंडिया और पारदर्शी अर्थव्यवस्था के हित में इस फैसले को तुरंत वापस लिया जाए और यूपीआइ को पूर्ववत पूरी तरह निःशुल्क रखा जाए।

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