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UPI पर नया चार्ज: ₹10000 के पेमेंट पर कितना लगेगा GST, किसकी जेब से कटेगा? दुकानदार, बैंक या ऐप में कौन देगा टैक्स

Published: Fri, 25 Sep 2026 01:04 PM (IST)

GST on UPI MDR: यूपीआई पेमेंट के एमडीआर का जीएसटी कौन देता है, दुकानदार-बैंक या ऐप? छोटे व्यापारियों के लिए ...और पढ़ें

UPI पेमेंट पर MDR और GST का पूरा गणित: जानें कौन चुकाता है यह चार्ज और छोटे व्यापारियों को क्या राहत

UPI पेमेंट पर MDR और GST का पूरा गणित: जानें कौन चुकाता है यह चार्ज और छोटे व्यापारियों को क्या राहत

HighLights

  1. GST पूरी UPI पेमेंट पर नहीं, केवल MDR पर लागू होता है।

  2. MDR का शुल्क दुकानदार चुकाता है, ग्राहक पर बोझ नहीं।

  3. छोटे व्यापारियों को ₹1 लाख तक की UPI प्राप्ति पर MDR छूट।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| क्या आप भी डिजिटल पेमेंट करते वक्त सोचते हैं कि आखिर इस पर लगने वाले टैक्स और चार्ज कौन चुकाता है? अगर हां, तो यह खबर आपके लिए है। क्योंकि, आजकल UPI ट्रांजैक्शन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में जब भी पेमेंट पर MDR या GST जैसी बातें सामने आती हैं, तो मन में कई सवाल उठने लाजिमी है।

जैसे- क्या यह टैक्स सीधे आपकी जेब से कट रहा है? क्या इसका बोझ दुकानदार पर है या बैंक उठाते हैं। या फिर पेमेंट ऐप्स (who pays UPI MDR) ही इस लागत को उठाते हैं? इस पेचीदे वित्तीय गणित को समझना न सिर्फ हमारे लिए दिलचस्प है, बल्कि यह जानना भी जरूरी है कि सरकारी नियमों के तहत डिजिटल ट्रांजैक्शन की यह पूरी प्रक्रिया कैसे काम करती है और आपकी जेब पर क्या असर पड़ता है।

तो ऐसे ही तमाम सवालों को बारीकी से समझने के लिए जागरण बिजनेस ने भूटा शाह एंड कंपनी एलएपी के पार्टनर (इनडायरेक्ट टैक्स) अमित सरकार के खास बातचीत की। जिसमें उन्होंने 6 पॉइंट्स में MDR और GST के इस पूरे समीकरण (UPI MDR explained) को आसान भाषा में समझाया। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश...

सवाल 1: UPI पेमेंट पर लगने वाले MDR का GST कौन देता है, दुकानदार, बैंक या पेमेंट ऐप? क्या GST पूरी पेमेंट पर लगता है?

जवाबः UPI पेमेंट में लगने वाला MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट, पेमेंट प्रोसेसिंग और सेटलमेंट की सेवा का शुल्क है। यह शुल्क दुकानदार यानी मर्चेंट से लिया जाता है। सबसे जरूरी बात यह है कि जीएसटी पूरी पेमेंट (GST on UPI MDR) की रकम पर नहीं लगता। GST सिर्फ MDR पर लगता है।

उदाहरण के लिए, अगर ग्राहक ने ₹10,000 का UPI पेमेंट किया और MDR 0.4% है, तो पहले MDR निकलेगा।

₹10,000 × 0.4% = ₹40

अब ₹40 के MDR पर 18% GST लगेगा:

₹40 × 18% = ₹7.20

यानी कुल कटौती होगी- ₹40 MDR + ₹7.20 GST = ₹47.20

इस तरह ₹10,000 के पूरे ट्रांजैक्शन पर 18% GST नहीं लगता। MDR और उस पर GST मिलाकर प्रभावी लागत 0.472% बैठती है। ग्राहक से यह MDR अलग से नहीं लिया जाना चाहिए। सरकार ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि नया मर्चेंट चार्ज ग्राहकों से वसूला न जाए।

सवाल 2: ग्राहक से दुकानदार तक UPI का पैसा कई जगह से गुजरता है, तो हर चरण पर GST लगता है क्या?

जवाब: नहीं। UPI पेमेंट में ग्राहक का पैसा कई हिस्सेदारों के जरिए आगे बढ़ सकता है। इसमें ग्राहक का बैंक, UPI या पेमेंट ऐप, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर, दुकानदार का बैंक यानी एक्वायरिंग बैंक और दूसरे पेमेंट सिस्टम से जुड़े हिस्सेदार शामिल हो सकते हैं।

लेकिन पैसे के एक जगह से दूसरी जगह जाने और GST की देनदारी को एक ही चीज नहीं समझना चाहिए।

मान लीजिए ग्राहक ने किसी सामान या सेवा के लिए ₹10,000 का भुगतान किया। उसके लिए भुगतान की मूल रकम ₹10,000 ही रहती है। यह पैसा ग्राहक के बैंक से UPI ऐप, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और एक्वायरिंग बैंक के जरिए दुकानदार तक पहुंच सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ₹10,000 पर हर चरण में 18% GST लगाया जाएगा।GST उस कर योग्य पेमेंट सेवा और उस पर लगने वाली फीस पर लागू होता है। MDR का आर्थिक बोझ आखिरकार दुकानदार के सेटलमेंट में दिखाई देता है, क्योंकि MDR दुकानदार से लिया जाता है।"

हालांकि, अगर दुकानदार GST में पंजीकृत है और इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC लेने के लिए पात्र है, तो वह सामान्य GST नियमों और शर्तों के तहत MDR पर चुकाए गए GST का ITC ले सकता है।

सवाल 3: छोटे दुकानदार या बिना GST रजिस्ट्रेशन वाले व्यापारी क्या करेंगे? क्या उनके लिए GST अतिरिक्त खर्च बन जाएगा?

जवाबः यहां छोटे दुकानदारों और बिना GST रजिस्ट्रेशन वाले कारोबारियों के बीच फर्क समझना जरूरी है। आमतौर पर बिना GST रजिस्ट्रेशन वाला व्यापारी ITC का फायदा नहीं ले सकता, क्योंकि GST का इनपुट टैक्स क्रेडिट सिस्टम पात्र पंजीकृत कारोबारियों के लिए है। इसलिए अगर किसी ऐसे व्यापारी पर MDR और उस MDR पर GST लगता है, तो GST उसके लिए अतिरिक्त कारोबारी खर्च बन सकता है। हालांकि, नए UPI ढांचे में पात्र छोटे व्यापारियों को राहत दी गई है।

P2PM (पर्सन टू पर्सन मर्चेंट) श्रेणी में UPI QR के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों के लेनदेन पर MDR शून्य रखा गया है।

जब MDR ही नहीं लगेगा, तो उस MDR पर GST भी नहीं लगेगा।

यानी ₹1 लाख तक UPI प्राप्ति → MDR नहीं → MDR पर GST नहीं।

यह नियम उन छोटे कारोबारियों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है, जो सामान्य GST रजिस्ट्रेशन सीमा से नीचे हैं, लेकिन UPI के जरिए हर महीने ₹1 लाख से ज्यादा रकम प्राप्त करते हैं। ऐसी स्थिति को लेकर सवाल उठे हैं और इस पर GST परिषद की ओर से आगे और स्पष्टता की जरूरत पड़ सकती है।"

सवाल 4: अगर दुकानदार को महीने में ₹1 लाख से कम UPI पेमेंट मिलता है, तो क्या उसे MDR और GST दोनों से छूट है? ₹2,000 से ऊपर के पेमेंट का क्या होगा?

जवाबः घोषित UPI ढांचे के तहत, UPI QR के जरिए महीने में ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों को MDR से छूट है।

इसका सीधा मतलब है:

- महीने में ₹1 लाख तक UPI प्राप्ति → MDR नहीं
- MDR नहीं → MDR पर GST नहीं
- इस पेमेंट प्रोसेसिंग पर अतिरिक्त खर्च नहीं

इसके साथ एक दूसरा नियम भी है, जो हर ट्रांजैक्शन के स्तर पर लागू होता है। पात्र P2M यानी व्यक्ति से व्यापारी को होने वाले ₹2,000 तक के लेनदेन मुफ्त रहते हैं। वहीं, निर्धारित नियमों के तहत ₹2,000 से ज्यादा के P2M लेनदेन पर MDR लग सकता है, लेकिन यह दुकानदार की ₹1 लाख वाली छूट और संबंधित श्रेणी के नियमों पर निर्भर करेगा।"

वहीं P2P यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को होने वाले लेनदेन MDR के दायरे से बाहर बने रहते हैं।

अब सामान्य व्यापारी का उदाहरण समझिए।

अगर पेमेंट ₹10,000 है और MDR 0.4% है तो-

MDR = ₹10,000 × 0.4% = ₹40

अब ₹40 के MDR पर 18% GST:

GST = ₹40 × 18% = ₹7.20

कुल कटौती-

₹40 + ₹7.20 = ₹47.20

दुकानदार को मिलेगा-

₹10,000 - ₹47.20 = ₹9,952.80

यानी ₹10,000 के भुगतान में दुकानदार के सेटलमेंट से कुल ₹47.20 कटेंगे।

एक और अहम बात- ₹75,000 या उससे ज्यादा के लेनदेन पर MDR अधिकतम ₹300 तक सीमित है।

इसलिए ₹300 के अधिकतम MDR पर GST होगा:

₹300 × 18% = ₹54

यानी सामान्य MDR पर अधिकतम GST ₹54 होगा।

सवाल 5: क्या बैंक या पेमेंट कंपनी दुकानदार को GST का बिल देती है, ताकि वह ITC ले सके?

जवाबः सिर्फ सेटलमेंट रिपोर्ट में MDR की कटौती दिखाई देना अपने आप में ITC लेने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता। अगर कोई व्यापारी GST में रजिस्टर्ड है और ITC लेने के लिए पात्र है, तो आम तौर पर उसे संबंधित सर्विस प्रोवाइडर की ओर से निर्धारित GST दस्तावेज या इनवॉइस की जरूरत होगी।

इस दस्तावेज में आम तौर पर ये जानकारी होनी चाहिए:

- कर योग्य रकम (Taxable amount) यानी MDR
- लगाया गया GST
- सेवा देने वाले यानी सप्लायर की जानकारी

सेटलमेंट रिपोर्ट हिसाब-किताब मिलाने यानी रिकन्सिलिएशन में मदद कर सकती है। लेकिन ITC के लिए जरूरी दस्तावेज और इनवॉइस की व्यवस्था बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और व्यापारी के बीच हुए समझौते पर निर्भर कर सकती है। इसलिए सिर्फ बैंक खाते में कम रकम आने को GST का पर्याप्त दस्तावेज मान लेना सही नहीं होगा।"

सवाल 6: अगर भविष्य में UPI का MDR या चार्ज बदल जाता है, तो दुकानदार पर क्या असर पड़ेगा?

जवाबः अगर भविष्य में MDR में बदलाव होता है, तो दुकानदार की पेमेंट प्रोसेसिंग लागत भी बदल जाएगी। और अगर बदली हुई फीस पर GST लागू होता है, तो GST की रकम भी नई फीस के हिसाब से बदलेगी।

उदाहरण के लिए, अभी अगर किसी लेनदेन पर MDR ₹40 है, तो 18% GST-

₹40 × 18% = ₹7.20

अगर भविष्य में MDR बढ़कर ₹50 हो जाता है, तो उसी दर से GST होगा:

₹50 × 18% = ₹9

यानी MDR जितना बदलेगा, उस पर लागू GST की रकम भी उसी हिसाब से बदलेगी।

GST में पंजीकृत और ITC के लिए पात्र व्यापारी सामान्य नियमों और शर्तों के तहत इस GST का ITC ले सकता है। लेकिन MDR खुद कारोबारी खर्च बना रहेगा। बैंकों और फिनटेक कंपनियों के लिए भी MDR में बदलाव से पूरे पेमेंट सिस्टम की कमाई और लागत का गणित बदल सकता है। हालांकि, GST का वास्तविक उपचार इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित सेवा क्या है और उसकी बिलिंग किस तरह की जा रही है।"

इस पूरे गणित में सबसे अहम बात यही है कि ग्राहक के ₹10,000 के पेमेंट पर 18% GST नहीं लगता। GST MDR यानी पेमेंट प्रोसेसिंग शुल्क पर लगता है। वहीं, पात्र छोटे व्यापारियों के लिए ₹1 लाख तक की मासिक UPI प्राप्ति पर MDR शून्य होने की स्थिति में उस MDR पर GST भी नहीं बनता।

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