कनॉट प्लेस में प्रदर्शन-पाबंदियों से कारोबार बेहाल, ग्राहक 70% तक घटे; व्यापारियों की अपील- चलाने दो रोजी-रोटी
कनॉट प्लेस और पुरानी दिल्ली के बाजारों में राजनीतिक प्रदर्शनों और पाबंदियों के कारण त्योहारी सीजन में कारोबार बुरी तरह ...और पढ़ें

प्रदर्शनों के दौर में दिल्ली का दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस में सन्नाटा सा पसर गया है। फाइल फोटो
HighLights
कनॉट प्लेस में प्रदर्शनों से व्यापार 70% तक गिरा।
व्यापारियों ने PM, CJI, राहुल गांधी से हस्तक्षेप मांगा।
त्योहारी सीजन में 5000 से अधिक परिवार प्रभावित।
नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। ‘प्रिय प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक दलों, हाथ जोड़कर अनुरोध है कि इस त्योहारी सीजन में हमें अपनी आजीविका कमाने दें। कनाॅट प्लेस (सीपी) के रेस्त्रां और दुकानों पर 5,000 से अधिक परिवार निर्भर हैं। यह एक व्यावसायिक क्षेत्र है, कोई धरनास्थल नहीं। कृपया, सरकार द्वारा निर्धारित स्थानों पर ही प्रदर्शन करें।’
यह भावुक अपील किसी एक व्यापारी की नहीं, बल्कि दिल्ली के दिल कहे जाने वाले कनाॅट प्लेस के उन सैकड़ों दुकानदारों और रेस्त्रां संचालकों की है, जो लगातार हो रहे राजनीतिक व वैचारिक प्रदर्शनों से सहमे हुए हैं। यहां तक की पुरानी दिल्ली के थोक बाजार के व्यापार में भी 30 प्रतिशत की गिरावट आई है।
'किराया और कर्मचारियों की देनी है सैलरी'
काॅकरोच जनता पार्टी (सीजेपी), कांग्रेस और वामदलों द्वारा समय-समय पर किए जाने वाले आंदोलनों की भेंट चढ़ रहे इस अंतरराष्ट्रीय कारोबारी हब के व्यापारी भारी अनिश्चितता के साए में जीने को मजबूर हैं।
गहरे निराश नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (एनडीटीए) के अध्यक्ष अतुल भार्गव कहते हैं कि हमें इतना नुकसान हो रहा है कि दुकानों का किराया निकालना भी दूभर हो गया है। बिजली, पानी का बिल, संपत्तिकर और कर्मचारियों का वेतन अलग से चुकाना है।
उन्होंने कहा कि त्यौहारी मौसम में अच्छी बिक्री की जो उम्मीद थी, वह सब चकनाचूर हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शुक्रवार को विरोध प्रदर्शनों के बावजूद व्यापारी सतर्क रहेंगे और दुकानें बंद नहीं करेंगे।
थोक बाजारों का कारोबार भी 30 प्रतिशत तक प्रभावित
शारदीय नवरात्रि से दीपावली तक का समय व्यापारियों के लिए वर्ष का सबसे बड़ा कारोबारी सीजन होता है, लेकिन इस बार कनाट प्लेस, पालिका बाजार, जनपथ और खान मार्केट की दुकानों व रेस्त्रां में मायूसी पसरी है।
पुरानी दिल्ली के थोक बाजारों का कारोबार भी 30 प्रतिशत तक प्रभावित है। दिल्ली व्यापार महासंघ के उपाध्यक्ष राजेंद्र कपूर का कहना है कि पुरानी दिल्ली का थोक बाजार भी इससे अछूता नहीं है। यदि हालात यही रहे, तो त्योहारों के बाद कई दुकानें बंद करने की नौबत आ जाएगी।
क्यों हुआ कारोबार ठप, पांच दिनों से क्यों नहीं हुई बोहनी?
- जुलाई से शुरू हुआ प्रदर्शनों का दौर अक्टूबर में और अधिक तेज और नियमित हो चला है।
- लगातार नारेबाजी, सुरक्षा के नाम पर भारी बैरिकेडिंग, सड़कें बंद और यातायात डायवर्जन से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त है।
- कनाॅट प्लेस व आसपास के बाजारों में 1,000 से अधिक दुकानें और आउटलेट्स, 300 से अधिक रेस्त्रां तथा जनपथ पर 250 से अधिक कारोबारी प्रतिष्ठान प्रभावित हैं।
- जनपथ बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डीएल मदान के अनुसार, कई दुकानदारों की स्थिति इतनी खराब है कि पांच दिनों से बोहनी तक नहीं हुई है।

प्रतिदिन करोड़ों का नुकसान, पीएम और सीजेआई से गुहार
सामान्य दिनों में कनाट प्लेस के बाजारों में प्रतिदिन लगभग 250 करोड़ रुपये का कारोबार होता है, जो प्रदर्शनों और पाबंदियों के दौरान घटकर आधा भी नहीं रह जाता। बाहरी राज्यों से आने वाले खरीदारों की संख्या में 70 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। रोजाना आने वाले दो से तीन लाख लोगों की जगह अब बमुश्किल 40-50 हजार लोग ही पहुंच रहे हैं। संकट की इस घड़ी में कारोबारियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भारत के मुख्य न्यायाधीश और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।
दो दिनों के लिए बंद हुआ कनाॅट प्लेस का सेंट्रल पार्क
उधर, सीजेपी के लहरा दो तिरंगा यात्रा के मद्देनजर एनडीएमसी ने दो दिनों के लिए कनाट प्लेस के सेंट्रल पार्क को बंद रखने की घोषणा की है। एनडीएमसी ने जारी एक सार्वजनिक सूचना जारी करते हुए कहा है कि प्रशासनिक कारणों से 16 व 17 अक्टूबर को कनाॅट प्लेस बंद रखने का निर्णय किया गया है।
