कनॉट प्लेस के रेस्तरां को 20 साल बाद मिलेगी पीएनजी, देश में एलपीजी संकट ने खोला रास्ता
व्यावसायिक एलपीजी संकट के बीच, कनॉट प्लेस के रेस्तरां को 20 साल बाद पीएनजी आपूर्ति मिलेगी। आईजीएल और एनडीएमसी के ...और पढ़ें

कनॉट प्लेस के रेस्तरां को 20 साल बाद मिलेगी पीएनजी।

समय कम है?
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नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। कभी चुनौतियां रास्ता निकालती हैं और बड़ी बाधा पार करने का माध्यम बनती हैं। कनॉट प्लेस मामले में यहीं हुआ। व्यावसायिक एलपीजी के गहराए संकट के बीच जहां कई क्षेत्रों के रेस्तरां संचालक मुश्किल में है, वहीं दिल्ली के प्रमुख रेस्तरां हब में 20 वर्ष के अवरोध के बाद पीएनजी आपूर्ति का रास्ता निकल आया है।
आईजीएल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कनाट प्लेस में पीएनजी बिछाने को लेकर हाल ही में एनडीएमसी से करार हुआ है। वहां काम शुरू कर दिया गया है। उसमें और तेजी लाकर जल्द कनेक्शन देने की कोशिश की जाएगी। उससे करीब 200 रेस्तरां, पब व बार समेत अन्य को स्वच्छ ईंधन तक पहुंच संभव हो सकेगी।
कनॉट प्लेस, दिल्ली का दिल और हेरिटेज शहर है, साथ ही रेस्तरां, पब तथा बार का हब भी। जिसके मुरीद दिल्ली-एनसीआर के लोग ही नहीं विदेशी भी है। पीएनजी कनेक्शन दिल्ली की छोटी-छोटी कालोनियों तक पहुंच गया, लेकिन अभी तक कनाट प्लेस में नहीं पहुंचा है।
जबकि, यहां के रेस्तरां संचालक इसकी मांग वर्ष 2006 से ही कर रहे थे। उसी वर्ष इस परियोजना को मंजूरी भी मिल गई थी,
मामले के जानकारों के अनुसार, मंजूरी के बाद भी पीएनजी का पाइप लाइन बिछाने में कनाट प्लेस के हेरिटेज होने के साथ ही अन्य तकनीकी दिक्कतें भी थी। एनडीएमसी पीएनजी के लिए अलग से खोदाई के पक्ष में नहीं थी। वह चाहती थी कि जरूरी सेवाओं के लिए बनाए गए भूमिगत सेवा कारिडोर से ही पीएनजी पाइप लाइन को गुजारा जाए।
कनॉट प्लेस के इनर और आउटर सर्कल के बीच भूमिगत कारिडोर बनाया गया है। जिसमें बिजली, पानी और टेलीफोन की लाइनें हैं। सुरक्षा कारणों और तकनीकी जटिलताओं की वजह से इसमें गैस पाइपलाइन बिछाने को लेकर एनडीएमसी और आइजीएल में सहमति नहीं बन पा रही थी। आईजीएल सुरक्षा कारणों से बिजली के तारों के बीच गैस की पाइप गुजारने के पक्ष में नहीं थी।
इसी तरह, एक अड़चन कनाट प्लेस का एतिहासिक धरोहर होना है। इसकी दीवारों या संरचना में ड्रिलिंग करने या पाइपलाइन के लिए तोड़-फोड़ करने पर सख्त पाबंदियां हैं। इसी तरह, एनडीएमसी, अग्निशमन विभाग और अन्य नियामक संस्थाओं से एनओसी मिलने में होने वाली देरी भी बड़ी बाधा बनी थी।
वैसे, बाधाओं को दूर करने के लिए आइजीएल की टीम एनडीएमसी अधिकारियों के साथ नियमित संवाद में थी। मामले के एक जानकार के अनुसार, अब पाइप लाइन के लिए सड़क किनारे व गलियाराें के बाहर खोदाई की जाने लगी है।
पाइप लाइन बिछाते हुए आवश्यक इंतजाम किए जाने लगे हैं।
सुरक्षा, सहुलियत के साथ हरित की ओर बढ़ेंगे रेस्तरां
-व्यावसायिक एलपीजी की उपलब्धता में दिक्कत जैसी स्थिति में भी निर्बाध आपूर्ति संभव हो सकेगी।
-व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडर के मुकाबले पीएनजी काफी सस्ती पड़ती है।
-रसोई में भारी-भरकम सिलिंडरों को रखने और बदलने का जोखिम खत्म हो जाएगा।
- वर्तमान में कई जगह जनरेटर चलाने के लिए डीजल का उपयोग होता है, पीएनजी आने से स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा मिलेगा।
देर आयद दुरुस्त आयद। इस परियोजना को मंजूरी वर्ष 2006 में ही मिल गई थी, लेकिन पाइप लाइन बिछाने की प्रक्रिया आरंभ करने में 20 वर्ष की देरी हुई। एनडीएमसी यह कदम काफी पहले उठा सकती थी। - विक्रम बधवार, महासचिव, नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन
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