क्या था राहुल गांधी का ‘धप्पा’? EC के खिलाफ प्रदर्शन में पुलिस को दिया चकमा, आकाशवाणी भवन पहुंच गए
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन के दौरान अचानक रास्ता ...और पढ़ें

राहुल आंधी के आचानक रास्ता बदलने को कांग्रेस बता रही धप्पा। फोटो: आर्काइव
HighLights
राहुल-प्रियंका ने चुनाव आयोग मार्च में अचानक बदला रास्ता
पुलिस को चकमा देकर आकाशवाणी भवन पहुंचे, किया धरना
कांग्रेस ने इस रणनीति को 'धप्पा' नाम दिया, चर्चा में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDI गठबंधन के प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी के एक निर्णय को कांग्रेस ‘धप्पा’ बता रही है, यानी चकमा देना।
कांग्रेस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की ओर से अचानक रास्ता बदलने को सोशल मीडिया पर ‘धप्पा’ बताकर पेश किया। सवाल है कि आखिर कांग्रेस ने रास्ता बदलने को ‘धप्पा’ क्यों कहा?
दरअसल, 6 अक्टूबर को INDI गठबंधन के सांसद संसद भवन से चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर मार्च कर रहे थे। दिल्ली पुलिस ने पहले से ही पूरे रास्ते पर बैरिकेडिंग कर रखी थी और भारी सुरक्षा बल तैनात था।
चुनाव आयोग तक पहुंचने वाला रास्ता बंद कर दिया गया था। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बसों में बैठाना शुरू कर दिया। यहीं पर घटनाक्रम ने अचानक मोड़ लिया।
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— Congress (@INCIndia) October 6, 2026
बस में बैठने के बजाय बदल दिया रास्ता
जब पुलिस को लगा कि मार्च को रोक दिया गया है और प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए जा रहे हैं, तभी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने अचानक अपना रास्ता बदल लिया। दोनों पास के आकाशवाणी भवन परिसर की ओर चले गए।
राहुल और प्रियंका परिसर के भीतर पहुंच गए और वहां एक पेड़ के नीचे बैठ गए। इसके बाद केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा, इमरान प्रतापगढ़ी और श्रीनिवास बीवी समेत अन्य कांग्रेस नेता भी वहां पहुंच गए। कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता परिसर की बाउंड्री वॉल पर चढ़कर नारे लगाते नजर आए।
गौर करने वाली बात ये है कि आकाशवाणी का पिछला गेट चुनाव आयोग की ओर खुलता था। यानी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पुलिस को चकमा देकर यहां से चुनाव आयोग की जा सकते थे। इसे ही कांग्रेस सोशल मीडिया पर धप्पा बता रही है।
हालांकि पुलिस ने बाद में परिसर का पिछला रास्ता बंद कर दिया, लेकिन तब तक राहुल गांधी और उनके साथ आए नेता वहां धरने पर बैठ चुके थे। करीब आठ घंटे तक यह धरना चला, जिसके बाद पुलिस ने राहुल, प्रियंका और अन्य प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया।
पुलिस को क्यों चौंकाया?
इस अचानक हुए रूट-चेंज को कांग्रेस ने राजनीतिक और सोशल मीडिया नैरेटिव का हिस्सा बनाया। पार्टी ने राहुल और प्रियंका के रास्ता बदलकर आकाशवाणी भवन पहुंचने का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया और उस पर ‘धप्पा’ कैप्शन लगाया।
पुलिस ने चुनाव आयोग तक पहुंचने वाले मुख्य रूट पर पहले से तैयारी कर रखी थी। बैरिकेडिंग, पुलिस और पैरामिलिट्री की तैनाती तथा ट्रैफिक डायवर्जन के जरिए मार्च को नियंत्रित किया जा रहा था।
लेकिन राहुल-प्रियंका के अचानक आकाशवाणी भवन की ओर मुड़ने से पुलिस की बनाई गई शुरुआती रणनीति से अलग स्थिति पैदा हो गई।
इस घटनाक्रम को राहुल गांधी और कांग्रेस के हालिया ‘धप्पा’ स्टाइल प्रदर्शन का उदाहरण बताया है। अगले दिन भी कांग्रेस और INDI गठबंधन के नेताओं ने लंच के बाद अचानक जंतर-मंतर की ओर जाने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोककर हिरासत में लिया।
तीसरे दिन बदला फिर प्रदर्शन का तरीका
तीसरे दिन यानी 8 अक्टूबर को घटनाक्रम ने फिर नया मोड़ लिया। राहुल गांधी और INDI गठबंधन के सांसद राजघाट पहुंचे, जहां पुलिस ने उन्हें संक्षिप्त प्रदर्शन की अनुमति दी। यह उन दो दिनों के बाद हुआ, जब पुलिस ने विपक्षी नेताओं को उनके चुने हुए प्रदर्शन स्थलों तक पहुंचने से रोका था।
इस तरह तीन दिनों के घटनाक्रम में प्रदर्शन की रणनीति लगातार बदलती दिखाई दी। पहले चुनाव आयोग की ओर मार्च, फिर पुलिस को चकमा देकर आकाशवाणी भवन पहुंचना, उसके बाद जंतर-मंतर की ओर बढ़ना और तीसरे दिन राजघाट पहुंचकर प्रदर्शन करना।
