सिर पर हैं यूनिट टेस्ट और अर्धवार्षिक परीक्षाएं, लेकिन बिना किताबों के कैसे पढ़ें नौवीं के छात्र?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत नौवीं कक्षा का पाठ्यक्रम बदलने के तीन माह बाद भी दिल्ली में विद्यार्थियों को नई ...और पढ़ें

नौवीं कक्षा के छात्रों को नई एनसीईआरटी किताबों का इंतजार। फाइल फोटो
HighLights
नौवीं कक्षा के छात्रों को नई एनसीईआरटी किताबों का इंतजार।
किताबों की कमी से दिल्ली में पढ़ाई हो रही प्रभावित।
हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों को सबसे अधिक परेशानी।
रीतिका मिश्रा, नई दिल्ली। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा (एनसीएफ-एसई 2023) के तहत नौवीं का पाठ्यक्रम बदलने के तीन माह बाद भी राजधानी के हजारों विद्यार्थियों को नई एनसीईआरटी की किताबों का इंतजार है।
अप्रैल में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो गया, जुलाई का मध्य भी बीतने को है, लेकिन दिल्ली के प्रमुख पुस्तक बाजारों में अब भी कई विषयों की किताबें उपलब्ध नहीं हैं। सबसे अधिक परेशानी हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों को हो रही है। किताबों के अभाव में स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जबकि जुलाई के अंत से कई स्कूलों में यूनिट टेस्ट और आगामी माह में अर्धवार्षिक परीक्षाएं प्रस्तावित हैं।
किताबें अभी अंग्रेजी में उपलब्ध
एनसीईआरटी के अधिकारियों ने बताया कि किताबें अभी अंग्रेजी में उपलब्ध हैं। हिंदी के लिए उनका अनुवाद किया जा रहा है। अनुवाद पूरा होते ही छपाई होगी और फिर किताबें मार्केट में आ जाएंगी। उन्होंने बताया कि किताबें मार्केट में आने में अभी थोड़े दिन और हैं।
चावड़ी बाजार के पुस्तक विक्रेताओं ने बताय कि एनसीईआरटी से उन्हें आवश्यकता के अनुरूप पुस्तकें नहीं मिल रही हैं। अंग्रेजी माध्यम की कुछ पुस्तकें सीमित संख्या में उपलब्ध हैं, जबकि हिंदी माध्यम की विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान जैसी प्रमुख विषयों की पुस्तकें अधिकांश दुकानों पर नहीं पहुंची हैं। हर दिन बड़ी संख्या में अभिभावक और विद्यार्थी किताबों की तलाश में पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है।
बाजार में एनसीईआरटी के नाम पर नकली किताबें
पुस्तक विक्रेताओं का कहना है कि मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर होने का फायदा कुछ लोग उठा रहे हैं। बाजार में एनसीईआरटी के नाम पर नकली किताबें बेची जा रही हैं और कई जगह किताबों के सेट निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर बेचे जा रहे हैं। इससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।
अब किताबों की कमी का असर स्कूलों तक पहुंच चुका है। एक हिंदी शिक्षक ने बताया कि अधिकांश छात्रों के पास किताबें नहीं हैं। ऐसे में उन्हें अपनी निजी प्रतियां लाकर पढ़ाना पड़ रहा है या फिर एनसीईआरटी की वेबसाइट से सामग्री लेकर कक्षाएं संचालित करनी पड़ रही हैं।
हालांकि यह व्यवस्था व्यवहारिक नहीं है।उन्होंने बताया कि सभी विद्यार्थियों के पास स्मार्टफोन या स्थायी इंटरनेट सुविधा नहीं है। कई बार तकनीकी दिक्कतों के कारण कक्षा की गति भी प्रभावित होती है। फिलहाल कई शिक्षक नियमित पाठ्यक्रम आगे बढ़ाने के बजाय व्याकरण और पुनरावृत्ति पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।
वहीं, अभिभावकों का कहना है कि मोबाइल पर पढ़ाई बच्चों के लिए प्रभावी विकल्प नहीं है। बच्चे लंबे समय तक स्क्रीन पर पढ़ाई नहीं कर पाते और कई बार अन्य ऐप्स में उलझ जाते हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि किताबें नहीं होने के कारण वे घर पर पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं और पूरी तरह स्कूल में कराई जा रही पढ़ाई पर निर्भर हैं। कई छात्र अभी भी केवल कापी लेकर स्कूल पहुंच रहे हैं।
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