सौरव दास और आशुतोष रांका जेल में, लेकिन दीपके रिहा... तिहाड़ जाने से कैसे बचा अभिजीत?
सीजेपी नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल भेजा गया है, जबकि अभिजीत दीपके को कोर्ट से राहत ...और पढ़ें

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके। PTI
HighLights
अभिजीत दीपके को कोर्ट से सशर्त जमानत मिली।
सौरभ दास और आशुतोष रांका तिहाड़ जेल भेजे गए।
दीपके अशांति फैलाने वाले जुलूस में शामिल नहीं थे।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ बॉन्ड भरवाकर जमानत दे दी। शनिवार सुबह ही दिल्ली पुलिस ने दीपके को गिरफ्तार किया था।
अब लोगों के मन में सवाल है कि जब कोर्ट ने सीजेपी नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल भेज दिया तो दीपके को कैसे राहत मिल गई? आइए आपको इसी सवाल का जवाब बताएंगे।
सौरव और रांका को जेल
सीजेपी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिन के लिए तिहाड़ जेल भेजने के बाद शनिवार को पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को भी दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, एसीएम कोर्ट से उन्हें सशर्त जमानत मिल गई। दीपके को कनॉट प्लेस में निषेधाज्ञा (धारा 163) का उल्लंघन कर तिरंगा मार्च निकालने की कोशिश के आरोप में शुक्रवार को पकड़ा गया था।

बॉन्ड भरने के बाद दी जमानत
एसीएम कोर्ट में पेशी के दौरान पुलिस ने उन्हें जेल भेजने की पुरजोर मांग की। अदालत ने चार घंटे चली लंबी बहस के बाद भविष्य में शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरवाकर उनकी रिहाई का आदेश दिया। एक सप्ताह में यह दूसरा मौका है, जब दीपके को बॉन्ड भरने के बाद जमानत दी गई।
5 दिन के लिए जेल भेजा
इससे पहले 11 अक्टूबर को पुलिस ने दीपके, रांका व दास के खिलाफ केस दर्ज कर एक साल तक शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरवाकर 50-50 हजार के जमानत पर उन्हें छोड़ दिया था। इसके बावजूद 13 अक्टूबर को दोबारा जंतर-मंतर पर बेल बॉन्ड उल्लंघन के आरोप में पुलिस ने रांका व दास को 5 दिन के लिए तिहाड़ जेल भेज दिया। इसकी जानकारी मिलने पर दीपके 14 अक्टूबर को महाराष्ट्र से फ्लाइट से दिल्ली आ गए थे।
यूथ का नहीं मिला समर्थन
उन्होंने सोशल मीडिया पर शुक्रवार को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च निकालने का एलान किया। दीपके को उम्मीद थी कि मार्च के बहाने यूथ का भरपूर समर्थन मिल सकता है, लेकिन महज 200 से 250 समर्थक ही इनर सर्किल तक पहुंचे। इसके बाद दीपके को झंडेवालान स्थित एनसीपी के नेता के घर से हिरासत में लिया गया।
शनिवार को रिहाई के बाद दीपके एनसीपी (शरद पवार गुट) के प्रवक्ता अनीश गवांडे के झंडेवालान स्थित उसी आवास पहुंच गए, जहां से पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था। शुक्रवार को मार्च में शामिल होने जा रहीं आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा को भी पुलिस ने हिरासत में लिया था। शनिवार तड़के उन्हें भी हिदायत देकर छोड़ दिया गया।
रिहाई का मुख्य कारण
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, जंतर-मंतर पर अशांति फैलाने के मामले में दीपके की रिहाई का मुख्य कारण यह रहा कि वह जुलूस में शामिल ही नहीं हुआ था। वहीं, सूत्रों का कहना है कि इसके विपरीत मना किए जाने के बावजूद दास और रांका चुपके से जंतर-मंतर पहुंच गए और अशांति फैलाने की कोशिश की। दोनों मामलों पर एक ही कानून लागू किया गया।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि दीपके को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत शांति भंग की आशंका में औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया था। धारा 170 पुलिस को संज्ञेय अपराध रोकने के लिए गिरफ्तारी का अधिकार देती है, जबकि धारा 126 के तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरवा सकते हैं।
