खतरे में बच्चों का दिल, समय से पहले थम रहीं धड़कनें; एक्सपर्ट्स ने पैरेंट्स को चेताया
बच्चों में अचानक मौतें और हृदय रोग चिंता का विषय बन गए हैं, जैसे मयूर विहार और सीकर की घटनाएं ...और पढ़ें
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प्रो. डॉ. अनीता सक्सेना
HighLights
बच्चों की अचानक मौतें और हृदय रोग गंभीर चिंता का विषय।
बिना स्पष्ट लक्षण पनपते हृदय रोग बच्चों के लिए खतरनाक।
लाखों जन्मजात हृदय दोष वाले बच्चों को समय पर उपचार नहीं।
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। हंसते-खेलते, स्कूल बैग टांगे कक्षा में जाते बच्चों का अचानक जमीन पर गिर जाना और उनकी धड़कनें हमेशा के लिए थम जाना, आज हर माता-पिता और समाज के लिए चिंता का विषय बन चुका है।
दिल्ली के मयूर विहार में तीसरी कक्षा की मासूम बच्ची की क्लास में हुई मौत और पिछले साल राजस्थान के सीकर में 9 वर्षीय प्राची कुमावत की लंच बाक्स खोलते समय अचानक गई जान, यह महज हादसे नहीं, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य पर खड़े होने वाले वो गंभीर सवाल हैं, जिन्हें अब अनदेखा नहीं किया जा सकता।
चिकित्सा विशेषज्ञों की यह चेतावनी कि "हृदय रोग कई बार बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बच्चों के शरीर में पनपते रहते हैं", इस संकट को और अधिक डरावना बना देती है।
एम्स की पूर्व प्रो. डॉ. अनीता सक्सेना के अनुसार, देश में हर वर्ष दो लाख से अधिक बच्चे हृदय दोष के साथ पैदा होते हैं, लेकिन इनमें से कुछ को ही समय पर उपचार मिल पाता है। हर पांच में से एक बच्चे को जन्म के पहले वर्ष में ही उपचार की जरूरत होती है।
अध्ययन के अनुसार, केवल सामान्य चिकित्सकीय परीक्षण से रोग की पहचान संभव नहीं, पल्स आक्सीमेट्री को भी जांच में शामिल करना जरूरी है। मैसूरु के जेएसएस अस्पताल में 1009 नवजातों पर हुए अध्ययन में 57 बच्चों में जन्मजात हृदय रोग मिला।
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