BRICS Summit से चमकेंगे पुरानी दिल्ली के थोक बाजार, डॉलर की निर्भरता घटने से बढ़ेगा निर्यात
ब्रिक्स सम्मेलन से पुरानी दिल्ली के थोक बाजारों में व्यापार की नई संभावनाएं जगी हैं, जिससे स्थानीय मुद्राओं में सीधे ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
ब्रिक्स पेमेंट सिस्टम से स्थानीय मुद्रा में सीधा व्यापार।
डॉलर निर्भरता घटेगी, आयात-निर्यात में आएगी तेजी।
पुरानी दिल्ली के थोक बाजारों को मिलेंगी नई उम्मीदें।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। ब्रिक्स सम्मेलन से पुरानी दिल्ली के थोक बाजारों में व्यापार की नई संभावनाएं जगी हैं। ब्रिक्स पेमेंट सिस्टम लागू होने और स्थानीय मुद्राओं में सीधे व्यापार की व्यवस्था से चांदनी चौक, खारी बावली, सदर बाजार, चावड़ी बाजार और भागीरथ पैलेस के व्यापारियों को बिना डालर निर्भरता के सुरक्षित आयात-निर्यात करने का मौका मिलेगा।
विशेषज्ञों और व्यापारियों का मानना है कि इस कदमों से न केवल लेनदेन की कागजी जटिलताएं खत्म होंगी, बल्कि मुद्रा रूपांतरण (करेंसी कन्वर्जन) पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी बचेगा।
तेजी से बढ़ेगा निर्यात
मसाले व सूखे मेवे की थोक मंडी खारी बावली से भारतीय मसालों, जड़ी-बूटियों और सूखे मेवों की रूस तथा यूएई जैसे खाड़ी देशों में भारी मांग है। स्थानीय मुद्रा में भुगतान होने से निर्यात तेजी से बढ़ेगा।
आटोमोटिव पार्ट्स मर्चेंट एसाेसिएशन (अपमा) के अध्यक्ष विनय नारंग के अनुसार, आटो पार्ट्स के निर्माण में तेजी आई है, जिसका लाभ ब्रिक्स देशों में निर्यात के रूप में मिलेगा।
दिल्ली हिंदुस्तानी मर्केंटाइल एसाेसिएशन के पूर्व अध्यक्ष श्रीभगवान बंसल के अनुसार, कपड़ा व ज्वैलरी के थोक बाजार चांदनी चौक व दरीबा कलां से लहंगे, साड़ियां, कसीदाकारी वाले परिधान और चांदी के आभूषणों का निर्यात ब्राजील व यूएई में आसान हो जाएगा।
जबकि, भागीरथ पैलेस व लाजपत राय मार्केट में चीन से आयात होने वाले इलेक्ट्रानिक्स सामान, एलईडी लाइट्स और कंपोनेंट्स पर कस्टम ड्यूटी में रियायत और त्वरित क्लीयरेंस मिलने से लागत में गिरावट आएगी।
इसी तरह, आटो पार्ट्स के थोक बाजार कश्मीरी गेट में चीन और रूस से स्पेयर पार्ट्स का सीधा और सस्ता आयात संभव होगा। चावड़ी बाजार में रूस से पल्प का सीधा आयात होने से देश में कागज की कीमतों में स्थिरता आएगी।
सुगम लॉजिस्टिक्स और डिजिटल व्यवस्था
अब तक छोटे और मध्यम थोक व्यापारियों के लिए डालर में भुगतान और जटिल कागजी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बड़ी बाधा थी। सीमा शुल्क में छूट, सरल नियमों और डिजिटल प्रक्रिया के लागू होने से छोटे व्यापारी भी आसानी से इंपोर्ट-एक्सपोर्ट कोड (आइएफसी) हासिल कर सीधे अंतरराष्ट्रीय आर्डर ले सकेंगे।
व्यापारियों का कहना है कि यदि सरकार पुरानी दिल्ली के बाजारों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और इंडस्ट्री को पूरी सुविधाएं देने पर ध्यान दे, तो ये पारंपरिक बाजार वैश्विक व्यापार के बड़े केंद्र बनकर उभरेंगे।
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