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ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा पत्र जारी, भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत

By Jayaprakash RanjanEdited By: Deepak Gupta
Published: Sat, 12 Sep 2026 11:05 PM (IST)

भारत की कूटनीतिक कोशिशों के बाद 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणा पत्र जारी हुआ, जिसमें सदस्य देशों की चिंताओं का ध्यान रखा गया।

ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा पत्र जारी। (एएनआई)

ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा पत्र जारी। (एएनआई)

HighLights

  1. ब्रिक्स ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की।

  2. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया।

  3. फिलिस्तीन के मुद्दे पर दो-राज्य समाधान का समर्थन दोहराया गया।

जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। आखिरकार भारत की कूटनीतिक कोशिशों का असर दिखा और शनिवार को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद नई दिल्ली घोषणा पत्र जारी करने पर सदस्य देशों के बीच सहमति बन गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले सत्र के समापन पर सहमति बनने की घोषणा की। घोषणा पत्र में हर सदस्य देश की चिंताओं का ध्यान रखा गया है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर ब्रिक्स ने गहरी चिंता जताई है। समूह ने सभी संबंधित पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसी कार्रवाई से बचने की अपील की है जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है। नागरिक ठिकानों व ढांचागत सुविधाओं को सुरक्षा देने की बात है और हर देश की भौगोलिक संप्रभुता का आदर करने की अपील है।

संयुक्त बयान जारी करने में आ रही दिक्कतों को दूर करने में भारतीय कूटनीतिकारों को वर्ष 2023 में जी-20 सम्मेलन के दौरान विभिन्न समूहों के बीच विवाद के बीच सहमति बनाने का अनुभव इस बार भी काम आया। सूत्रों ने बताया है कि संयुक्त बयान के 90 फीसद हिस्सों पर 11 सितंबर, 2026 को देर शाम को ही सहमति बन गई थी।

पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर घोषणा पत्र में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा को लेकर ईरान व यूएई के बीच मतभेद था जिसे दूर करने के लिए भारतीय अधिकारियों ने सुबह 2.45 बजे तक बैठक की है। उसके बाद ड्राफ्ट पर सहमति बनी, फिर इसे सभी देशों के बीच वितरित किया गया। सुबह 10 बजे जा कर सभी सदस्यों की सहमति मिली। रूस और चीन की मदद से भी सभी बिंदुओं पर सहमति हो पाई।

नई दिल्ली घोषणा पत्र में नागरिकों और नागरिक ढांचे की सुरक्षा, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार हर देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की बात कही गई है। साथ ही संवाद और कूटनीति के जरिए क्षेत्र में स्थायी शांति के प्रयास बढ़ाने तथा वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा प्रवाह को सुचारू रखने पर जोर दिया गया है।

आतंकवाद के मामले में घोषणा पत्र पिछले साल के रियो डी जेनेरियो घोषणा पत्र की लाइन पर है। उसमें कहा गया था कि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की जाती है, जिसमें 26 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हुए।

आतंकवाद के सभी रूपों से निपटने की प्रतिबद्धता दोहराई गई थी, जिसमें आतंकियों की सीमा-पार आवाजाही, आतंकवाद का वित्तपोषण और सुरक्षित पनाहगाह शामिल हैं।

आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या सभ्यता से न जोड़ने और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने की बात कही गई थी। इस साल भी यही रुख बरकरार रखा गया है।संयुक्त राष्ट्र में सुधार की अपील ब्रिक्स ने फिर की है। सुरक्षा परिषद में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका निभाने की मंशा का समर्थन किया गया है।

असल में 2011 के बाद से ही ब्रिक्स के घोषणा पत्रों में यह बात आती रही है। सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में चार—अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस—भारत की स्थायी सदस्यता के दावे का समर्थन करते हैं। चीन ब्रिक्स मंच पर तो इस बात का समर्थन करता है, लेकिन असलियत में वह सुरक्षा परिषद में सुधार कर अन्य देशों को स्थायी सदस्य बनाने का विरोध करता रहा है।

फिलिस्तीन के मुद्दे पर ब्रिक्स ने इस बार घोषणा पत्र में काफी विस्तृत जगह दी है। गाजा में अक्टूबर 2025 के युद्धविराम समझौते के बावजूद जारी हिंसा पर चिंता जताई गई है। फिलिस्तीनियों के जबरन विस्थापन का विरोध किया गया है और दो-राज्य समाधान के तहत 1967 की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सीमाओं पर पूर्वी येरुशलम को राजधानी बनाकर संप्रभु, स्वतंत्र फिलिस्तीन राज्य का समर्थन दोहराया गया है।

फिलिस्तीन की संयुक्त राष्ट्र में पूर्ण सदस्यता और संबंधित अंतरराष्ट्रीय संगठनों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व की भी बात है।

ब्रिक्स संगठन ने पहली बार फिलिस्तीन के मुद्दे को इस विस्तार और स्पष्टता के साथ अपनी घोषणा पत्र में जगह दी है। माना जा रहा है कि यह ईरान की पहल पर हुआ। हालांकि मोटे तौर पर भारत भी इन मुद्दों का समर्थन करता है, लेकिन इजरायल के साथ भारत के करीबी संबंधों को देखते हुए इसे कुछ अचरज से देखा जा रहा है।

नई दिल्ली घोषणा पत्र में कुछ मुद्दों का कोई जिक्र नहीं है। जैसे इसमें ब्रिक्स करेंसी को कोई जिक्र नहीं है जो इस बात का प्रमाण है कि अभी इस बारे में सोचा नहीं जा रहा है। ब्रिक्स में भारत के शेरपा शंभु एस कुमारन ने बताया कि आपसी कारोबार की जगह ब्रिक्स करेंसी पर कोई बात नहीं हुई। घोषणा पत्र में स्थानीय करेंसी में सदस्य देशों के बीच कारोबार करने को बढ़ावा देने की बात है तो पहले से ही चल रहा है।

घोषणा पत्र के मुताबिक, “इस संबंध में हम सीमा-पार भुगतान और संदेश प्रणालियों की पारस्परिक अनुकूलता का अध्ययन करने के लिए किए गए कार्यों तथा ब्रिक्स देशों की स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान और निवेश को बढ़ावा देने संबंधी चर्चाओं को स्वीकार करते हैं। साथ ही हम राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का सम्मान करते हुए यह भी मानते हैं कि सभी के लिए एक जैसा समाधान संभव नहीं है।”

साथ ही ब्रिक्स ने अमेरिका पर परोक्ष तौर पर निशाना साधा है। घोषणा पत्र में एकतरफा टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधात्मक कदमों की तीखी आलोचना की तथा कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम-यूरोपीय संघ का कदम) का विरोध किया है। इन कदमों को भेदभावपूर्ण और संरक्षणवादी बताते हुए विकासशील देशों के लिए नुकसानदेह बताया गया है।

पहली बार सीबीएएम का स्पष्ट नाम लेकर पश्चिमी व्यापार बाधाओं की निंदा की गई है। साथ ही विश्व व्यापार संगठन में व्यापक सुधार की मांग दोहराई गई है। ब्रिक्स ने एकतरफा टैरिफ, जलवायु से जुड़े व्यापार अवरोधों और डब्ल्यूटीओ सुधार को जोड़ते हुए ऐसी व्यापार व्यवस्था की मांग की है जिसमें उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की आवाज और वैश्विक बाजारों तक समान पहुंच बढ़े।