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ब्रिक्स में Green Energy की राह होगी आसान, सौर ऊर्जा से ईवी और हाइड्रोजन तक सहयोग बढ़ाने पर जोर

Published: Sun, 13 Sep 2026 09:13 PM (IST)

सीएसई ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र को हरित ऊर्जा और स्वच्छ तकनीक को बढ़ावा देने वाला बताया है, जिसमें ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. ब्रिक्स घोषणापत्र हरित ऊर्जा, स्वच्छ तकनीक को बढ़ावा देगा।

  2. नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट ग्रिड, हाइड्रोजन पर सहयोग बढ़ाने का निर्णय।

  3. ब्रिक्स देश सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन जैसी तकनीकें अपना रहे।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में जारी घोषणापत्र को सीएसई सेंटर फार साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) ने हरित ऊर्जा व स्वच्छ तकनीक को बढ़ावा देने वाला बताया है।

इसमें स्वच्छ तकनीक और हरित औद्योगिक विकास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर बल दिया गया है। जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों के साथ स्वच्छ तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट ग्रिड, ऊर्जा भंडारण और कम उत्सर्जन वाले हाइड्रोजन को बढ़ावा देने की बात कही गई है।

सीएसई की कार्यक्रम प्रबंधक अवंतिका गोस्वामी ने कहा कि ब्रिक्स देशों की ऊर्जा जरूरतें तेजी से बढ़ रही हैं।

तेजी से ईवी अपना रहे ब्रिक्स देश

ऐसे में जीवाश्म ईंधन का उपयोग तत्काल समाप्त होने की उम्मीद कम है, लेकिन घोषणापत्र में न्यायसंगत, व्यवस्थित, समान और समावेशी ऊर्जा बदलाव के साथ ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला पर जोर दिया गया है।

ब्रिक्स देश सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसी स्वच्छ तकनीकों को तेजी से अपना रहे हैं। विश्व की आधे से अधिक सौर ऊर्जा का उत्पादन इन्हीं देशों में हो रहा है। ऐसे में नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार और अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन में कमी जरूरी है।

व्यापार के मुद्दे पर ब्रिक्स देशों ने जलवायु से जुड़े एकतरफा और संरक्षणवादी उपायों का विरोध किया है। इसमें कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (सीबीएएम) का भी उल्लेख है।

वैश्विक तकनीकी सहयोग

सीएसई के उप कार्यक्रम प्रबंधक त्रिशांत देव ने कहा कि विकासशील देशों को वैश्विक उच्च मूल्य वाले विनिर्माण में आगे बढ़ाने के लिए व्यापक सहयोग जरूरी है।

घोषणा में फोटोवोल्टिक उद्योग के लिए कार्ययोजना, कम उत्सर्जन वाले हाइड्रोजन और स्मार्ट ग्रिड व ऊर्जा भंडारण पर सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा सम्मेलन (यूएनएफसीसीसी) और पेरिस समझौते के प्रति प्रतिबद्धता भी दोहराई गई है।

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