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बिजवासन टर्मिनल के लिए 16 साल से बंद सड़क खुलेगी, भरथल-शाहाबाद मोहम्मदपुर को मिलेगी सीधी कनेक्टिविटी

Published: Wed, 16 Sep 2026 04:44 AM (IST)

द्वारका परियोजना में भरथल और शाहाबाद मोहम्मदपुर गांवों को जोड़ने वाली 16 साल से बंद सड़क को दोबारा खोलने का ...और पढ़ें

ग्रामीणों के साथ पुरानी रोड का निरीक्षण करते अधिकारी। जागरण

ग्रामीणों के साथ पुरानी रोड का निरीक्षण करते अधिकारी। जागरण

HighLights

  1. भरथल-शाहाबाद रोड 16 साल से बिजवासन टर्मिनल के कारण बंद थी।

  2. ग्रामीणों को 7-8 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी।

  3. डीडीए और रेलवे की सहमति से सड़क अब दोबारा खुलेगी।

जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। द्वारका परियोजना में शामिल भरथल और शाहाबाद मोहम्मदपुर गांव के निवासियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है।

दोनों गांवों को आपस में जोड़ने वाली महज आधा किलोमीटर लंबी पुरानी सड़क, जो पिछले 16 वर्षों से बंद पड़ी थी, उसे आखिरकार दोबारा शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि लंबाई के लिहाज से यह सड़क बहुत छोटी है, लेकिन कनेक्टिविटी के दृष्टिकोण से इसका महत्व बेहद खास है।

मात्र आधा किलोमीटर का यह संपर्क मार्ग बंद रहने की वजह से ग्रामीणों को लगभग सात से आठ किलोमीटर की लंबी दूरी तय करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा था। अब रेलवे अधिकारियों ने इस मार्ग को नए सिरे से बनाकर ग्रामीणों को सौंपने पर सहमति जता दी है।

16 साल पहले क्यों बंद हुई थी सड़क 

वर्ष 2003 में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने बिजवासन रेलवे टर्मिनल के निर्माण के लिए भरथल और शाहाबाद मोहम्मदपुर को जोड़ने वाली सड़क की जमीन का अधिग्रहण कर उसे रेलवे को सौंप दिया था। लगभग 16 वर्ष पहले जब रेलवे ने इस अधिग्रहीत जमीन पर अपनी चारदीवारी बनाई, तो यह संपर्क मार्ग पूरी तरह बंद हो गया।

इसके बाद शाहाबाद मोहम्मदपुर के लोगों को तो एयरपोर्ट की चारदीवारी से सटा एक वैकल्पिक मार्ग मिल गया, लेकिन भरथल गांव के लोग इससे वंचित रह गए। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग (फ्लड डिपार्टमेंट) ने यहां रास्ता बनाने की कोशिश भी की थी, लेकिन रेलवे से अनुमति न मिलने के कारण मामला अधर में लटका रहा।

लंबा चक्कर लगाने को मजबूर थे ग्रामीण 

सड़क बंद होने के कारण भरथल से शाहाबाद अंडरपास की ओर जाने वाले ग्रामीणों का सीधा संपर्क कट गया था। लोगों को मजबूरी में कच्चे रास्तों से गुजरना पड़ता था। हाल के दिनों में यशोभूमि के बनने के बाद ग्रामीणों को लंबा चक्कर लगाकर अपनी यात्रा पूरी करनी पड़ रही थी, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही थी।

ऐसे बना सहमति का माहौल 

समस्या के समाधान के लिए दिल्ली देहात किसान संघर्ष समिति के पदाधिकारी लंबे समय से प्रयासरत थे। समिति के पदाधिकारियों ने इस मसले पर डीडीए उपाध्यक्ष से मुलाकात की।

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इसके बाद क्षेत्रीय सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी की पहल पर एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली के उपराज्यपाल ने भी इसमें हस्तक्षेप किया और डीडीए को रेलवे के साथ समन्वय बनाकर समस्या सुलझाने के निर्देश दिए।

अब आगे क्या 

डीडीए और रेलवे के अधिकारियों के बीच हुई सकारात्मक बातचीत के बाद रेलवे ने अपनी सहमति दे दी है। तय योजना के मुताबिक, जिस पुराने रास्ते को चारदीवारी करके बंद किया गया था, अब उसी मार्ग का जीर्णोद्धार कर उसे नए सिरे से तैयार किया जाएगा और ग्रामीणों की आवाजाही के लिए खोल दिया जाएगा।


हम इस सड़क को दोबारा खुलवाने के लिए पिछले कई सालों से लगातार संघर्ष कर रहे थे। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने ग्रामीणों की इस जायज मांग को प्रमुखता से उठाया गया। खुशी की बात है कि अब डीडीए और रेलवे के बीच सहमति बन गई है। यह जीत गांव वालों के धैर्य और संघर्ष की है।'
- कृष्ण गोदारा, महासचिव, दिल्ली देहात किसान संघर्ष समिति

सड़क बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, स्कूली बच्चों और रोजाना दफ्तर जाने वालों को उठानी पड़ रही थी। छोटे से काम के लिए भी यशोभूमि से घूमकर जाना पड़ता था। अगर पुराना रास्ता नया बनकर जल्द शुरू हो जाता है, तो इससे दोनों गांवों के लोगों का जीवन बहुत आसान हो जाएगा।
- महेश कुमार, शाहाबाद मोहम्मदपुर