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बसोया सिंडिकेट के 13 हजार करोड़ के ड्रग्स नेटवर्क की नई कड़ियां सामने आईं, वीरू-ऋषभ से पूछताछ में मिले कई सुराग

Published: Sat, 19 Sep 2026 10:09 PM (IST)

अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सरगना वीरेंद्र सिंह बसोया उर्फ वीरू और उसके बेटे ऋषभ बसोया से पूछताछ में 13 हजार करोड़ के ...और पढ़ें

ड्रग्स तस्करी के मिले सुरागों के आधार सेल की कई टीम ने दिल्ली और मुंबई समेत अन्य राज्यों में उनकी तलाश शुरू कर दी है।

ड्रग्स तस्करी के मिले सुरागों के आधार सेल की कई टीम ने दिल्ली और मुंबई समेत अन्य राज्यों में उनकी तलाश शुरू कर दी है।

HighLights

  1. अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सरगना वीरेंद्र बसोया और बेटे ऋषभ से पूछताछ।

  2. 13 हजार करोड़ के ड्रग्स नेटवर्क की नई कड़ियां उजागर हुईं।

  3. फार्मा कंपनियों की आड़ में तस्करी, हवाला से करोड़ों का लेनदेन।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े और अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सरगना वीरेंद्र सिंह बसोया उर्फ वीरू और उसके बेटे ऋषभ बसोया से केंद्रीय जांच एजेंसियों और स्पेशल सेल ने लंबी पूछताछ की। पूछताछ में सिंडिकेट से जुड़े कई भारतीय तस्करों के बारे में अहम जानकारी मिली है। इसके बाद सेल की कई टीम ने दिल्ली और मुंबई समेत अन्य राज्यों में उनकी तलाश शुरू कर दी है।

ड्रग्स की तस्करी का कोआर्डिनेटर 

वीरेंद्र सिंह बसोया को इंटरपोल के रेड काॅर्नर नोटिस और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के लंबे प्रयासों के बाद बीते 14 अगस्त को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से डिपोर्ट करके भारत लाया गया था। एनसीबी और इसके बाद स्पेशल सेल ने उसकी रिमांड लेकर पूछताछ की।

पूछताछ में सामने आया कि बसोया इस पूरे सिंडिकेट का मास्टरमाइंड है। उसका नेटवर्क ब्रिटेन, पाकिस्तान, यूएई, थाईलैंड और दक्षिण अमेरिका आदि कई देशों में तक फैला हुआ है। वह विदेश में बैठकर भारत और अन्य देशों के बीच ड्रग्स की तस्करी को कोआर्डिनेट करता था।

हजारों करोड़ हवाला चैनलों और विदेशी बैंक खातों

पूछताछ से पता चला है कि तस्करों ने मादक पदार्थों (कोकेन, मेफेड्रोन आदि) की सप्लाई के लिए फार्मा और केमिकल कंपनियों (जैसे- फार्मा सलूशन सर्विसेज, आरएम बायोकेम और लाइफ सेवर फार्मा) की आड़ ली थी।

गुजरात के अंकलेश्वर और अन्य जगहों से दवाइयों और केमिकल कंसाइनमेंट, कार्डबोर्ड बाक्स या कूरियर के जरिए माल विदेश और देश के विभिन्न राज्यों में भेजा जाता था।

यह बात भी सामने आई कि इस काले कारोबार से कमाए गए हजारों करोड़ रुपये को हवाला चैनलों और विदेशी बैंक खातों के जरिए घुमाया और ठिकाने लगाया जाता था।

ब्रिटेन में रहकर कर रहा कानून की पढ़ाई 

वीरेंद्र बसोया के पकड़े जाने के बाद उससे पूछताछ के आधार पर अबू धाबी में उसके बेटे ऋषभ बयोसा काे भी पकड़ कर भारत डिपाेर्ट कर दिया गया जिसके बाद आईजीआई एयरपोर्ट से उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

पूछताछ के लिए सात दिन की रिमांड मिलने पर सेल से वीरेंद्र बसोया को भी आमना-सामना कराने के लिए तीन दिन की रिमांड लिया और उसके बाद दोनों से पूछताछ की गई। ऋषभ, ब्रिटेन में रहकर कानून की पढ़ाई कर रहा था, अक्टूबर 2024 से वह भी फरार था।

कोकेन और अन्य ड्रग्स की सप्लाई की

स्पेशल सेल का कहना है कि वह पिता को ड्रग्स के धंधे में हाथ बंटाता था। उसने गिरोह के सदस्यों को 2024 में ड्रग्स तस्करी के लिए गाड़ियां उपलब्ध कराई थीं, जिनका इस्तेमाल कोकेन और अन्य ड्रग्स की ढुलाई और सप्लाई के लिए किया गया था।

जांच एजेंसियों का मानना है कि ऋषभ के जरिए वीरेंद्र बसोया के विदेशी संपर्कों और भारत के लाजिस्टिक्स के बीच तालमेल बैठाया जाता था। उसकी गिरफ्तारी से पुलिस को यूएई, यूके और अन्य देशों में छिपे अन्य सहयोगियों के बारे में अहम कड़ियां मिली हैं।

अब नेटवर्क खंगाल रही पुलिस

यह पूरा मामला 2024 में स्पेशल सेल और एनसीबी द्वारा पकड़े गए उस विशाल ड्रग्स नेटवर्क से जुड़ा है। इसमें दिल्ली, एनसीआर (गाजियाबाद, हापुड़), पंजाब, गुजरात और पुणे से करीब 13,000 करोड़ रुपये (विभिन्न चरणों में पकड़ी गई कोकेन, मेफेड्रोन और थाईलैंड के गांजे की भारी खेप) का पर्दाफाश हुआ था।

एजेंसियां इस सिंडिकेट को स्थानीय स्तर पर कौन-कौन लोग फंडिंग कर रहे थे और इसके तार देश के किन अन्य बड़े चेहरों या राजनीतिक-अपराध सिंडिकेट से जुड़े हैं।

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