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द्वारका हिट एंड रन केस में साहिल की मां की दलीलें खारिज, नाबालिग की जमानत रद करने से कोर्ट का इनकार

Published: Mon, 20 Apr 2026 09:34 PM (IST)

दिल्ली के द्वारका में स्कार्पियो की टक्कर से साहिल धनेशरा की मौत के मामले में कोर्ट ने नाबालिग आरोपी की ...और पढ़ें

नाबालिग की जमानत रद करने से कोर्ट का इनकार। फोटो: आर्काइव

नाबालिग की जमानत रद करने से कोर्ट का इनकार। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. द्वारका कोर्ट ने नाबालिग की जमानत रद करने से इनकार किया

  2. मृतक के परिवार ने पछतावे की कमी का तर्क दिया था

  3. कोर्ट ने कहा, केवल संपन्न होने पर स्वतंत्रता नहीं छीनी जा सकती

जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। द्वारका साउथ थाना क्षेत्र में स्कार्पियो कार की टक्कर से मोटरसाइकिल सवार साहिल धनेशरा की मौत मामले में द्वारका कोर्ट ने नाबालिग आरोपित की जमानत रद करने से इनकार कर दिया है।

मां की दलीलों कोर्ट का तर्क 

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि मृतक के परिवार ने दलील दी थी कि नाबालिग के मन में अपने किए का कोई पछतावा नहीं है। इस पर कोर्ट ने कहा कि शुरुआती जांच के दौरान पछतावे की कमी को पूरे मामले का आधार नहीं बनाया जा सकता हैं।

याचिकाकर्ता ने यह डर जताया था कि आरोपित का परिवार प्रभावशाली और संपन्न है, जिससे वह कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि केवल किसी के संपन्न होने की आशंका के आधार पर एक किशोर की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को नहीं छीना जा सकता है।

मृतक के परिवार (अपीलकर्ता) के वकील ने तर्क दिया था कि अगर इस नाबालिग को जमानत मिल गई, तो जनता का न्याय व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा। लोगों को लगेगा कि नाबालिग चाहे जो भी अपराध करें, उन्हें कोई सजा नहीं मिलेगी। इस पर कोर्ट ने कहा कि जमानत देने का मतलब यह नहीं है कि नाबालिग को उसके किए की सजा नहीं मिलेगी।

क्या है मामला

फरवरी 2026 में द्वारका साउथ थाना क्षेत्र में एक तेज रफ्तार स्कार्पियो ने साहिल धनेशरा की मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी थी, जिसमें उनकी जान चली गई थी। कार चलाने वाला आरोपित नाबालिग था। किशोर न्याय बोर्ड ने 10 मार्च को उसे जमानत दे दी थी, जिसे मृतक की मां ने ऊपरी अदालत में चुनौती दी थी।

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