11 साल की उम्र में अनाथ हुए अमन, कुश्ती को बनाया सहारा; अब एशियाई खेलों में जीता गोल्ड
11 साल की उम्र में अनाथ हुए अमन सेहरावत ने कुश्ती को अपना सहारा बनाया और कड़ी तपस्या के बाद एशियाई खेलों में 57 किग्रा भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीता।

57 किलोग्राम भारवर्ग में स्वर्ण जीतकर अमन ने सिर्फ पदक नहीं जीता, बल्कि अपने संघर्ष और त्याग को भी दुनिया के सामने साबित किया।
HighLights
11 साल की उम्र में अनाथ हुए, कुश्ती को बनाया जीवन का सहारा।
छत्रसाल स्टेडियम में प्रशिक्षण लेकर एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता।
57 किग्रा भारवर्ग में भारत के लिए गौरवशाली उपलब्धि हासिल की।
लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। 11 साल की उम्र में जिस बच्चे ने माता-पिता काे खो दिया था, उसने जिंदगी से शिकायत करने के बजाय कुश्ती को अपना सहारा बनाया। छत्रसाल स्टेडियम की मिट्टी को अपना घर और अखाड़े को अपनी दुनिया मानकर वर्षों तक की गई तपस्या का फल अब अमन सेहरावत को एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक के रूप में मिला है। 57 किलोग्राम भारवर्ग में स्वर्ण जीतकर अमन ने सिर्फ पदक नहीं जीता, बल्कि अपने संघर्ष और त्याग को भी दुनिया के सामने साबित किया।
पूरा ध्यान प्रशिक्षण पर रहा
'सफलता हासिल करनी है तो त्याग करना ही होगा' अमन की यह सोच उनके पूरे सफर में दिखाई देती है। पिछले एक वर्ष से उन्होंने खुद को पूरी तरह कुश्ती के लिए समर्पित कर दिया था। अमन ने कहा, बाहरी दुनिया, इंटरनेट मीडिया और नकारात्मकता से दूरी बनाकर उनका पूरा ध्यान प्रशिक्षण पर रहा।
हरियाणा के झज्जर में रहते हैं अमन
फोन भी मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि कुश्ती के दांव-पेंच सीखने का माध्यम बना। सुबह से लेकर अभ्यास खत्म होने तक उनकी दुनिया छत्रसाल स्टेडियम के इर्द-गिर्द ही सिमट गई थी। जीत के बाद छत्रसाल स्टेडियम में मिठाई बांट कर खुशी मनाई गई। अमन हरियाणा के झज्जर जिले के बिरोहर गांव का रहने वाला है।
हर मुकाबले ने बढ़ाया आत्मविश्वास: कोच
कोच जयवीर सिंह ने बताया अमन के चाचा ने उन्हें छत्रसाल स्टेडियम में दाखिल कराया। यहां द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता महाबली सतपाल के मार्गदर्शन में उनकी प्रतिभा को धार मिली। बचपन का दर्द धीरे-धीरे उनकी ताकत बनता गया और हर मुकाबले के साथ उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया। अमन के शानदार प्रदर्शन पर पूरा देश गौरव कर रहा है।
छोटी उम्र में शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय सफर
अमन ने 2022 में अंडर-23 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतकर इतिहास रचा और इस प्रतियोगिता में स्वर्ण जीतने वाले भारत के पहले पहलवान बने। इसी वर्ष जाग्रेब ओपन में कांस्य पदक जीता। 2023 में अस्ताना में एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप के 57 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके बाद 2024 पेरिस ओलिंपिक में कांस्य जीतकर वह भारत के सबसे कम उम्र के व्यक्तिगत ओलिंपिक पदक विजेता बने। अब एशियाई खेलों का स्वर्ण उनके पदकों की सूची में एक और बड़ी उपलब्धि बन गया है।
