भारत के 57% जिलों में रेड अलर्ट, अल नीनो से पड़ेगी भीषण गर्मी; 75% आबादी पर मंडराया खतरा
अल नीनो के मजबूत होने से दक्षिण एशिया में भीषण गर्मी का खतरा बढ़ गया है, जिसके चलते भारत समेत चारों देशों ने हीट एक्शन प्लान बनाए हैं।

भारत, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान ने गर्मी से निपटने के लिए हीट एक्शन प्लान और पूर्व चेतावनी प्रणालियां तो तैयार कर ली हैं।
HighLights
अल नीनो से दक्षिण एशिया में भीषण गर्मी का खतरा बढ़ा
हीट एक्शन प्लान को स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय बजट से जोड़ना चुनौती
भारत के 57% जिले उच्च गर्मी जोखिम में, बड़ी आबादी प्रभावित
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। पूरे प्रशांत महासागर में मजबूत हो रहे अल नीनो के बीच दक्षिण एशिया में भीषण गर्मी का खतरा बढ़ रहा है।
भारत, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान ने गर्मी से निपटने के लिए हीट एक्शन प्लान और पूर्व चेतावनी प्रणालियां तो तैयार कर ली हैं, लेकिन अब चुनौती इन व्यवस्थाओं को स्वास्थ्य सेवाओं, स्थानीय बजट और जमीनी स्तर की सुरक्षा से जोड़ने की है।
गुरुवार को ग्लोबल हीट फोरम में चारों देशों के लिए गर्मी और स्वास्थ्य पर पहले राष्ट्र-स्तरीय आकलन जारी किए गए। ये आकलन ग्लोबल हीट हेल्थ इंफॉर्मेशन नेटवर्क-साउथ एशिया हब के पहले आकलन हैं, जिसकी मेजबानी नई दिल्ली स्थित काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) कर रहा है।
भारत में 57 प्रतिशत जिले उच्च से बहुत उच्च गर्मी जोखिम में
सीईईडब्ल्यू के जिला-स्तरीय अध्ययन के अनुसार, भारत के 57 प्रतिशत जिले पहले से ही गर्मी के उच्च से बहुत उच्च जोखिम का सामना कर रहे हैं। इन जिलों में देश की करीब तीन-चौथाई आबादी रहती है।
भारत में 250 से अधिक शहर और जिला स्तरीय हीट एक्शन प्लान लागू हैं। लू को आपदा जोखिम प्रबंधन कोष के तहत अधिसूचित प्राकृतिक आपदा के रूप में मान्यता दी जा चुकी है।
गर्मी से होने वाली बीमारियों की राष्ट्रीय निगरानी व्यवस्था भी बनाई गई है और 18,000 से अधिक मेडिकल ऑफिसरों को प्रशिक्षण दिया गया है।
आकलन में कहा गया है कि अब गर्मी से निपटने की कार्रवाई को सिर्फ आपदा प्रबंधन तक सीमित रखने के बजाय इसके लिए अलग फंड और हर योजना में स्वास्थ्य से जुड़े नतीजों को शामिल करने की जरूरत है।
नेपाल में 2024 में 50 दिन 40 डिग्री से ऊपर तापमान
हिमालयी देश नेपाल में भीषण गर्मी का जोखिम तेजी से उभर रहा है। राष्ट्रीय मौसम विभाग के अनुसार, 2024 में दक्षिणी तराई के मैदानों में 50 दिन तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा।
नेपाल ने अपनी पहली संघीय हीट योजना जारी करने के साथ चरणबद्ध हीट अलर्ट प्रणाली शुरू की है। हालांकि, स्वास्थ्य व्यवस्था में गर्मी से होने वाली बीमारियों के आंकड़े अभी व्यवस्थित तरीके से दर्ज नहीं किए जाते।
आकलन में तराई के अस्पतालों में गर्मी के कारण भर्ती होने वाले मरीजों की अनिवार्य रिकॉर्डिंग शुरू करने और मौसम विभाग की चेतावनियों को जमीनी कार्रवाई तक पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करने का सुझाव दिया गया है।
बांग्लादेश में साल का एक-तिहाई हिस्सा खतरनाक उमस भरी गर्मी
विश्व बैंक के अनुसार, बांग्लादेश में 1980 से अब तक महसूस होने वाले तापमान में करीब 4.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। अब साल का लगभग एक-तिहाई हिस्सा खतरनाक उमस भरी गर्मी वाला होता है।
बांग्लादेश ने अपनी राष्ट्रीय अनुकूलन योजना में गर्मी को शामिल किया है और नारायणगंज में पहला शहरी हीट एक्शन प्लान बनाया है। गर्मी से जुड़ी बीमारियों पर राष्ट्रीय दिशानिर्देश जारी करने के साथ ‘बी.ई.ए.टी. द हीट’ नाम से जन अभियान भी शुरू किया गया है।
आकलन में राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग हीट एक्शन प्लान तथा अस्पतालों को राष्ट्रीय पूर्वानुमानों से जोड़ने वाली गर्मी-स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली की जरूरत बताई गई है।
भूटान में ठंडी घाटियों तक पहुंच रहा गर्मी का जोखिम
भूटान के दक्षिणी निचले इलाकों में बढ़ती गर्मी अब उन घाटियों को भी अधिक तापमान की ओर धकेल रही है, जहां पहले भीषण गर्मी से बचाव की योजनाओं की जरूरत नहीं पड़ती थी।
राष्ट्रीय स्तर के निर्देशों में गर्मी से जुड़ी जिम्मेदारियां स्वास्थ्य मंत्रालय को दी गई हैं। 2022 के एक नियम में श्रमिकों को गर्मी से सुरक्षा देना अनिवार्य किया गया है।
भूटान के पास बाढ़ और ग्लेशियर झीलों के लिए पहले से पूर्व चेतावनी प्रणालियां हैं। आकलन में इन व्यवस्थाओं के आधार पर गर्मी से निपटने के लिए एकीकृत हीट एक्शन प्लान बनाने का सुझाव दिया गया है।
चारों देशों में तैयारी बढ़ी, लेकिन जमीनी कार्रवाई में अंतर
आकलनों के मुताबिक, चारों देशों में गर्मी से निपटने की तैयारियों ने रफ्तार पकड़ी है। हीट एक्शन प्लान और पूर्वानुमान एवं पूर्व चेतावनी प्रणालियां योजना और नीति के स्तर पर सबसे तेजी से आगे बढ़ी हैं।
अब स्वास्थ्य निगरानी, स्थानीय कार्रवाई के लिए वित्तपोषण और स्वास्थ्य, श्रम तथा शहरी नियोजन में गर्मी को शामिल करने जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की जरूरत है। यही व्यवस्थाएं मौसम संबंधी चेतावनी को वास्तविक जमीनी सुरक्षा में बदल सकती हैं।
‘हर चेतावनी को भरोसेमंद सुरक्षा में बदलना होगा’
सीईईडब्ल्यू के फेलो और साउथ एशिया हब के अध्यक्ष डॉ. विश्वास चितले ने कहा कि दक्षिण एशिया में भीषण गर्मी अब पूरे साल बनी रहने वाला क्षेत्रीय जोखिम बन चुकी है। उनके अनुसार, क्षेत्र शून्य से शुरुआत नहीं कर रहा है और प्रत्येक देश ने पांच साल पहले की तुलना में गर्मी की स्थिति खराब होने का अनुमान लगाया है।
उन्होंने कहा कि अब इन पूर्वानुमानों को स्वास्थ्य व्यवस्थाओं, स्थानीय बजट और श्रम नियमों से जोड़ने की जरूरत है, ताकि हर चेतावनी को भरोसेमंद तरीके से सुरक्षा में बदला जा सके।
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