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7 मौतों के बाद भी नहीं चेती MCD, दिल्ली में अवैध PG सर्वे की कछुआ चाल; इस साल पूरा होना मुश्किल

Published: Sat, 12 Sep 2026 10:43 AM (IST)

सत्य निकेतन घटना के बाद दिल्ली में पीजी और अवैध निर्माण के सर्वे का काम एमसीडी की कछुआ चाल से ...और पढ़ें

दिल्ली में इस साल पूरा नहीं हो पाएगा अवैध पीजी का सर्वे। फोटो: आर्काइव

दिल्ली में इस साल पूरा नहीं हो पाएगा अवैध पीजी का सर्वे। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. सत्य निकेतन घटना के बाद पीजी सर्वे की गति धीमी

  2. चार दिन में मात्र 1523 पीजी का ही सर्वे हो पाया

  3. 50,000 पीजी सर्वे में जनवरी 2027 तक का अनुमान

निहाल सिंह, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में सत्य निकेतन की घटना में सात लोगों की मौत के बाद एक बार फिर कागजी लीपापोती शुरू हो गई है।

अवैध निर्माण और पीजी के सर्वे के नाम पर खानापूरी की जा रही है। साथ ही जिस गति से एमसीडी काम कर रही है उससे नहीं लगता है कम से कम 2026 में इस समस्या से मुक्ति मिल पाएगी।

चार दिन में 1523 पीजी का ही हो सका सर्वे

सत्य निकेतन की घटना के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर हुए सर्वे में एमसीडी मात्र 1500 पीजी का पता चार दिन में लगा पाई है जबकि अवैध निर्माण पर हुई कार्रवाई का आंकड़ा ही मात्र 100 पर पहुंचा है। जबकि इसकी मूल संख्या लाखों में हैं।

जहां पर चौथी मंजिल से अतिरिक्त अवैध निर्माण किया गया है या फिर अवैध निर्माण जारी है। जबकि राजधानी में पीजी और अवैध रूप से संचालित इमारतों की संख्या अनुमानित रूप से 50 हजार है। जिसमें करीब पांच से सात लाख विद्यार्थी या नौकरी पेशा लोग रहते हैं।

पहले दिन 1100 इमारतें मिलीं, फिर सब धीमा

हाईकोर्ट ने रिपोर्ट मांगी तो एमसीडी ने पहले ही दिन सर्वे में 1100 इमारतों की पहचान कर ली। जिससे लगा कि एमसीडी इस बार सख्ती से काम करेगी लेकिन, अगले तीन दिन में यह आंकड़ा बमुश्किल 1500 पार हो पाया है।

एमसीडी की इस कछुआ चाल से 50 हजार अगर पीजी को सर्वे में शामिल करना है तो जनवरी 2027 तक का समय लगेगा क्योंकि 1523 पीजी का सर्वे चार दिन में हो पाया है।

50 हजार पीजी के सर्वे में लगेंगे 131 दिन

ऐसे में औसतन 380 पीजी का सर्वे एक दिन में शामिल हो रहे हैं। प्रतिदिन 380 पीजी भी सर्वे में शामिल होते हैं तो 50 हजार पीजी का सर्वे करने में 131 दिन लगेंगे। वहीं, दिल्ली की चौथी मंजिल से अतिरिक्त की इमारतों को गिराने में तीन से चार साल का समय लगेगा।

क्योकि पांच से सात लाख इमारतें ऐसी है। अकेले दक्षिणी दिल्ली ओखला और तेहखंड जैसे इलाके में ऐसी इमारतों की संख्या ही हजारों में हैं। जबकि दिल्ली की 1511 अनधिकृत कालोनियों में यह संख्या लाखों में हैं।

स्टक्चरल सर्वे जरूरी, लेकिन खर्च कौन वहन करेगा

एमसीडी से सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता जेपी वर्मा कहते हैं कि वैसे तो जो भी इमारतों की मजबूती का देखकर सर्वे करना यह अपने आप में हास्यस्पद है। अगर, हमे सही में पीजी में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा की चिंता है तो स्टक्चरल सर्वे होना चाहिए।

लेकिन , चिंताजनक यह है कि एक ही इमारत को स्टक्चरल सर्वे कराने में लाखों का खर्चा होता है तो इसका खर्चा कौन वहन करेगा। उन्होंने कहा कि गीता कालोनी हादसे में जो इमारत गिरी थी उसका सर्वे हुआ था साथ ही उसकी साथ वाली इमारत का सर्वे उन्होंने सेंट्रल बील्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट रुड़की से कराया था उस समय 2011 में साढ़े छह लाख का खर्च आया था।

ऐसे में अब इतना खर्च होगा तो आखिर इसे वहन कौन करेगा । यह देखना होगा। क्योंकि नागरिक तो इतना खर्च स्वयं नहीं करेंगे।

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