सत्य निकेतन हादसे के बाद तुलसी निकेतन में दहशत, जर्जर फ्लैट छोड़कर जा रहे लोग
दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद गाजियाबाद की तुलसी निकेतन कॉलोनी के जर्जर फ्लैटों में रहने वाले लोग सुरक्षा कारणों से अपने घर छोड़कर जा रहे हैं।

HighLights
सत्य निकेतन हादसे के बाद तुलसी निकेतन निवासी घर छोड़ रहे।
जीडीए की पुनर्विकास योजना मालिकाना हक विवाद से अटकी हुई है।
जर्जर फ्लैटों में रहने वाले लोग सुरक्षा कारणों से पलायन कर रहे।
जितेंद्र सिंह, साहिबाबाद। दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद भोपुरा के पास तुलसी निकेतन कॉलोनी के जर्जर आशियानाें में रह रहे निवासी अब मकान छोड़कर जाने लगे हैं। कॉलोनी से तीन फ्लैट स्वामियों ने मकान छोड़कर अन्य जगह किराये पर मकान ले लिया है।
माना जा रहा है कि दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद लोग सुरक्षा के लिहाज से दूसरी जगह जा रहे हैं। जीडीए द्वारा फ्लैटों का जीर्णोद्धार न किए जाने से अब निवासियों ने फिलहाल उम्मीद छोड़ दी है।
पूर्व में हुए हादसों में दो निवासी जान गवा चुके हैं जबकि कुछ चोटिल हो चुके हैं। आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों ने बताया कि अभी तीन फ्लैट स्वामियों ने छोड़ा है। आगे और फ्लैट स्वामी जान बचाने के लिए फ्लैट छोड़ने की योजना बना रहे हैं।
30 साल पहले बसाई गई थी कॉलोनी
बता दें कि तुलसी निकेतन कॉलोनी जीडीए द्वारा करीब 30 साल पहले बसाई गई थी। कॉलोनी के फ्लैट वर्ष 2006 से जर्जर घोषित हैं।
पिछले वर्ष जीडीए द्वारा 640 करोड़ से तुलसी निकेतन कॉलोनी के पुन: निर्माण की योजना लाई गई। इसके बाद तुलसी निकेतन में जीडीए द्वारा सर्वे कराया गया।
सर्वे में कुल 2292 फ्लैटों में सिर्फ 500 की ही रजिस्ट्री मिलीं। इसके बाद बाकी के फ्लैट स्वामियों का अभी तक स्वामित्व का निर्धारण की कवायद चल रही है। इस कारण योजना परवान नहीं चढ़ सकी है।
आवंटन रद होने के डर से नहीं दे रहे जानकारी
तुलसी निकेतन में घर खाली करने वाले परिवार किसी भी तरह की जानकारी साझा करने से बच रहे हैं। जीडीए की योजना को लेकर यहां के निवासियों की अपनी मांगें हैं। इनके पूरा नहीं होने से पहले फ्लैट खाली करने पर परिवार बात करने से बच रहे हैं। लोगों को फ्लैट का आवंटन रद होने का डर है।
अधिकांश फ्लैट स्वामी छोड़ सकते हैं आशियाना
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष कुलदीप कसाना का कहना है कि जान बचाने के लिए लोग आशियाना छोड़कर जा रहे हैं। पूर्व में हुए हादसे के बाद भी जीडीए ने कोई काम कॉलोनी में नहीं कराया। एक साल पहले जीडीए की ओर से जीर्णोद्धार योजना लाई गई।
हालांकि अभी तक योजना के तहत कोई काम शुरु नहीं हुआ है। मजबूरी में निवासियों को अपना आशियाना छोड़ना पड़ रहा है। उनका कहना है कि आधे से ज्यादा फ्लैट मालिक आशियाना छोड़कर जा सकते हैं।
सत्य निकेतन में हादसे के बाद से निवासी दहशत में हैं। जान बचाने के लिए लोग आशियाना छोड़कर अन्य जगह जा रहे हैं।
- राजेश चड्ढा, स्थानीय निवासी
पूर्व में हुए हादसे में दो लोगों की जान जा चुकी है। दो महीने पहले फिर छज्जा गिर गया था। उसमें लोग बाल-बाल बच गए थे।
- किशन रावत, स्थानीय निवासी
तुलसी निकेतन के फ्लैटों के पुन: निर्माण को लेकर कवायद चल रही है। फ्लैटों के मालिकाना हक को लेकर निर्धारण किया जा रहा है।
- राजीव कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता जीडीए
