नई दिल्ली [राहुल चौहान]। Delhi Driving License New Guideline: अब दिल्ली में ड्राइविंग में दक्ष लोगों को ही ड्राइविंग लाइसेंस मिल सकेगा। यानी मैन्युअल ड्राइविंग टेस्ट सिस्टम पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इसी कड़ी में लोनी, राजा गार्डन और रोहिणी परिवहन कार्यालयों में भी ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर चालू हो रहे हैं। इसकी सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इससे पहले वजीरपुर, बुराड़ी, सूरजमल विहार, मयूर विहार और सराय काले खां में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर काम कर रहे हैं। वहीं जनवरी से द्वारका, लाडो सराय और हरिनगर में भी ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर तैयार हो जाएंगे। ऐसे में इसी साल ड्राइविंग लाइसेंस में मैन्युअल सिस्टम पूरी तरह खत्म हो जाएगा। नए सिस्टम से ड्राइविंग टेस्ट को पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।

परिवहन विभाग के मुताबिक ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर ठीक से गाड़ी चलाने वालों को ही स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस मिल पाता है। इससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और साथ ही ड्राइविंग टेस्ट सिस्टम को शत-प्रतिशत पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।

डॉ. अजीत कुमार सिंगला (अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (यातायात) बाहरी परिक्षेत्र) का कहना है कि सुरक्षित यातायात के लिए सड़क सुरक्षा विभाग लगातार विज्ञापन और जगह-जगह स्टिकर, पम्पप्लेट और बोर्ड लगाकर लोगों को जागरूक करता रहता है। यातायात सप्ताह व माह में इसके लिए विशेष अभियान चलाया जाता है।

रह जाती है व्यवस्था में कमी

राजधानी दिल्ली में सुरक्षित यात्रा को लेकर यूं तो यातायात पुलिस परिवहन विभाग लोक निर्माण विभाग द्वारा कई सारी व्यवस्थाएं की गई हैं। साथ ही समय-समय पर इनमें सुधार भी किया जाता है। इसके बावजूद भी कुछ कमियां रह जाती हैं, जो हादसे का कारण बनती हैं। इसमें लोगों की लापरवाही भी मुख्य रूप से जिम्मेदार रहती है। सुरक्षित यातायात के लिए सड़कों संकेतकों, सिग्नलों की व्यवस्था लोक निर्माण विभाग द्वारा की जाती है। इस बारे में लोक निर्माण विभाग (पीडब्लूडी) का कहना है कि यातायात पुलिस द्वारा मांगी गई मदद पर लोक निर्माण विभाग सुविधाएं उपलब्ध कराता है। चौराहों पर लालबत्ती, ब्लिंकर, तेज रफ्तार को पकड़ने व लालबत्ती के उल्लंघन को पकड़ने वाले कैमरे लगाने का कार्य खुद यातायात पुलिस द्वारा कराया जाता है, इसलिए इनके रख रखाव का कार्य भी यातायात पुलिस द्वारा ही किया जाता है।

लोक निर्माण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि दिल्ली में नई दिल्ली नगरपालिका परिषद, दिल्ली छावनी, तीनों नगर निगम की भी अपनी सड़कें हैं। उनके पास दिल्ली में जितनी सड़कें हैं उनकी कुल लंबाई 1259 किलोमीटर है। इन सड़कों पर लालबत्तियों और कैमरे लगाने को छोड़कर अन्य सभी कार्य विभाग करता है। कहां पर वाहनों के लिए कितनी रफ्तार निर्धारित है। कौन सा प्वाइंट सड़क दुर्घटनाओं वाला है। जहां पर सड़क दुर्घटना का खतरा रहता है। कहां तीव्र मोड़ है। यह सब जानकारी विभाग द्वारा स्थान से लगभग 500 मीटर पहले ही वाहन चालकों को उपलब्ध कराई जाती है। जगह-जगह संकेतक लगाए जाते हैं। इसके साथ ही स्पीड ब्रेकर, सफेद पट्टी, डिवाइडर सहित अन्य कार्य भी यातायात पुलिस के प्रस्ताव पर ही पीडब्लूडी करता है।

यातायात पुलिस द्वारा बताए गए स्थान पर उनके अनुसार यह सब सुविधाएं विभाग उपलब्ध कराता है। वह कहते हैं कि यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि अन्य शहरों की अपेक्षा दिल्ली में यातायात प्रबंधन बेहतर है। वहीं यातायात पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक यातायात पुलिस के पास अधिकतर संसाधन हैं। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरे आदि जैसे संसाधनों की संख्या भी बढ़ रही है इससे और भी मदद मिलेगी।

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