चुनाव आयोग के समर्थन में आए 1000 से ज्यादा प्रोफेसर; DU, JNU और IIT के दिग्गजों ने राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) विवाद के बीच 1000 से अधिक शिक्षाविदों ने निर्वाचन आयोग का समर्थन किया ...और पढ़ें

चुनाव आयोग के समर्थन में आए प्रोफेसर्स। फोटो: आर्काइव
HighLights
1000+ शिक्षाविदों ने निर्वाचन आयोग के समर्थन में अभियान चलाया।
डीयू, जेएनयू, आइआइटी दिल्ली के प्रोफेसर अभियान से जुड़े।
राष्ट्रपति को पत्र लिखकर संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता बनाए रखने की अपील।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक और सार्वजनिक विरोध के बीच देशभर के 1000 से अधिक शिक्षाविदों ने निर्वाचन आयोग के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है।
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) दिल्ली समेत विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों के कुलगुरु, निदेशक और प्रोफेसर इस अभियान से जुड़े हैं।
शिक्षाविदों ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता, गरिमा और संवैधानिक संस्थाओं में जनता का विश्वास बनाए रखने की अपील की है।
संवैधानिक प्रक्रियाओं के सम्मान पर जोर
हस्ताक्षर अभियान से जुड़े शिक्षाविदों ने कहा है कि संविधान के तहत काम करने वाली संस्थाओं के निर्णयों और प्रक्रियाओं का विरोध लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए।
उनका कहना है कि किसी संवैधानिक संस्था पर दबाव बनाने के लिए हिंसा, धमकी या असंवैधानिक तरीकों का सहारा लेना उचित नहीं है। इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था और संस्थाओं की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
शिक्षाविदों ने शांतिपूर्ण विरोध को लोकतंत्र का अभिन्न अधिकार माना, लेकिन इसके साथ संवैधानिक मर्यादाओं के पालन पर भी जोर दिया है। उनका कहना है कि असहमति लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन इसका इस्तेमाल संस्थाओं की स्वतंत्रता को कमजोर करने के लिए नहीं होना चाहिए।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में भरोसा बनाए रखने की अपील
शिक्षाविदों ने आगाह किया कि भारत को ऐसी परिस्थितियों की ओर बढ़ने से बचना चाहिए, जहां विरोध हिंसक रूप ले ले और संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाया जाए। उन्होंने बांग्लादेश, नेपाल और फ्रांस में सामने आई परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए लोकतांत्रिक स्थिरता बनाए रखने की जरूरत बताई।