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उत्तराखंड प्रीमियर लीग युवाओं के लिए IPL और टीम इंडिया का रास्ता, UPL चेयरमैन सुनील जोशी ने दिया बड़ा बयान

Published: Fri, 25 Sep 2026 10:17 PM (IST)

उत्तराखंड प्रीमियर लीग (UPL) के चेयरमैन सुनील जोशी ने कहा है कि यह टूर्नामेंट राज्य के युवा क्रिकेटरों के लिए आईपीएल और भारतीय टीम तक पहुंचने का महत्वपूर्ण रास्ता है।

उत्तराखंड प्रीमियर लीग

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स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। उत्तराखंड प्रीमियर लीग (UPL) के चेयरमैन सुनील जोशी का मानना है कि यह टूर्नामेंट राज्य के युवा क्रिकेटरों के लिए आईपीएल, महिला प्रीमियर लीग (WPL) और अंत में भारतीय टीम तक पहुंचने का महत्वपूर्ण रास्ता बन रहा है। जोशी का कहना है कि लीग अधिक खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी मंच दे रही है। उनका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वे प्रतिभाशाली युवा, जिन्हें तुरंत उम्र-समूह या सीनियर राज्य टीम में जगह न मिले, अपनी क्षमता दिखा सकें।

सुनील जोशी के अनुसार, यूपीएल खिलाड़ियों के लिए एक मंच है। यह उन्हें भारत स्तर और संभावित रूप से आईपीएल की ओर बढ़ने का रास्ता देता है। राज्य स्तर पर रंजी ट्रॉफी और अंडर-19 जैसे कई मुकाबले होते हैं, लेकिन UPL उन खिलाड़ियों को मौका देती है जिन्हें उन टीमों में चयन नहीं मिला। वे किसी टीम के लिए खेलकर अपनी प्रतिभा दिखा सकते हैं।

सुनील जोशी ने कई खिलाड़ियों के दिए उदाहरण

लीग से कई खिलाड़ी अपने करियर में आगे बढ़ चुके हैं। जोशी ने राघवी बिष्ट, प्रेमा रावत, नीलम भारद्वाज और आकाश मधवाल जैसे खिलाड़ियों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि UPL से कुछ खिलाड़ी आईपीएल तक भी पहुंचे हैं। आकाश मधवाल इसका उदाहरण हैं। कई अन्य युवा भी आगे बढ़ रहे हैं।

खिलाड़ियों के पास क्षमता दिखाने का मौका

जोशी के मुताबिक, यूपीएल की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह ज्यादा खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी माहौल देती है। सात टीमें लगभग 77 खिलाड़ियों को मौका देती हैं। रणजी टीम में सीमित जगहों की तुलना में यह बहुत बड़ा पूल है, जहां खिलाड़ी अपनी क्षमता दिखा सकते हैं।

गांव से राज्य तक का सफर

जोशी ने उत्तराखंड के दूरदराज और पहाड़ी इलाकों से प्रतिभा खोजने के काम पर भी जोर दिया। यह रास्ता जमीनी स्तर से शुरू होता है। खिलाड़ी गांव और जिला स्तर से राज्य प्रणाली तक पहुंचते हैं।

उन्होंने कहा, "सिस्टम गांव स्तर से जिला स्तर और फिर राज्य तक काम करता है। गांव में क्रिकेट खेलने वाले बच्चों को पहचाना जाता है और जिला प्रणाली में लाया जाता है। सुविधाएं सीमित होने पर भी बच्चे मेहनत करते हैं और कौशल विकसित करते हैं। इसके बाद वे बड़े मैदानों पर आकर प्रतिभा दिखाते हैं। उनकी मेहनत ही उन्हें आगे ले जाती है। प्रेमा रावत जैसी खिलाड़ी चुनौतीपूर्ण पृष्ठभूमि से आकर इस स्तर तक पहुंची हैं।"

जोशी ने पूर्व सचिव महिम वर्मा और पीसी वर्मा के प्रयासों को भी सराहा, जिन्होंने राज्य में क्रिकेट संरचना बनाने और जिलों में सिस्टम मजबूत करने में मदद की।

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