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भारतीय क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा विवाद, 25 सालों तक एक-दूसरे के 'दुश्मन' बने रहे कपिल देव और सुनील गावस्कर

Published: Tue, 27 Oct 2026 06:00 AM (IST)Updated: Tue, 27 Oct 2026 06:40 AM (IST)

भारतीय क्रिकेट के दो महान खिलाड़ी कपिल देव और सुनील गावस्कर के बीच 25 साल तक चली 'कोल्ड वॉर' का ...और पढ़ें

कपिल देव-सुनील गावस्कर

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स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और सोवियंत संघ (USSR) के बीच कोल्ड वॉर से हर कोई वाकिफ है। यहां दोनों महाशक्तियों के बीच प्रत्यक्ष रूप से कोई युद्ध नहीं हुआ लेकिन अपने-आपको को बड़ा बताने की होड़ लग गई। ठीक इसी तरह भारतीय क्रिकेट में भी कोल्ड वॉर देखने को मिला, जब कपिल देव और सुनील गावस्कर के बीच अनबन हो गई। ये दोनों एक-दूसरे को सामने से कुछ नहीं कहते थे लेकिन दोनों ने एक-दूसरे को प्लेइंग से ड्रॉप किया।

इसके अलावा जब गावस्कर के हाथ में कप्तानी आई, तो उन्होंने कपिल देव को टीम से बाहर कर दिया। एक तरह से दोनों के बीच 25 सालों तक कोल्ड वॉर चलता रहा। हालांकि, हर लड़ाई का एक अंत होता है और गावस्कर-कपिल की लड़ाई का भी 25 सालों बाद अंत हुआ और दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। आइए दो महान खिलाड़ियों के बीच 25 सालों तक चली अनबन के बारे में बताते हैं।

1983 वर्ल्ड कप से शुरू हुआ मामला

1983 विश्व कप में भारतीय टीम की कप्तानी कपिल देव कर रहे थे। टीम इंडिया को शुरुआती मुकाबलों में हार मिली। उस टूर्नामेंट में गावस्कर उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे और वर्ल्ड कप में छह पारियों में केवल 64 रन बना सके थे। भारत के इतने बड़े मैच विनर का इस तरह से फेल होना, टीम के लिए चिंता का विषय बन गया। भारत का मुकाबला वेस्टइंडीज से होना था और ऐसे में टीम मीटिंग की गई।

कप्तान कपिल देव ने मीटिंग में गावस्कर को साफ शब्दों में कह दिया कि इस तरह से नहीं चल पाएगा। उन्हें रन बनाने होंगे। माना जाता है कि गावस्कर इससे नाराज हो गए। इसके बाद गावस्कर को अगले मैच से ड्रॉप कर दिया गया। हालांकि, अनुभवी खिलाड़ी दिलीप वेंगसकर चोटिल हो गए, तो फिर गावस्कर की प्लेइंग-11 में वापसी हो गई। यहीं से दोनों के बीच मनमुटाव शुरू हो गया।

सुनील गावस्कर ने कपिल देव को किया ड्रॉप

गावस्कर खुद को टीम से ड्रॉप किए जाने की बात नहीं भूले थे। उन्होंने इसका बदला 1984 में लिया। भारत और इंग्लैंड के बीच कोलकाता के ईडन गार्डन में तीसरा टेस्ट मैच खेला जाना था। उस सीरीज में भारत की कप्तानी सुनील गावस्कर कर रहे थे और उन्होंने कपिल देव और संदीप पाटिल को टीम से ड्रॉप कर दिया। इसके बाद बवाल हो गया था। फैंस 'नो कपिल नो टेस्ट मैच' का बैनर लेकर पहुंच गए। हालांकि, भारतीय टीम ने उस मुकाबले में जीत हासिल की। दूसरी तरफ गावस्कर का कहना था कि दोनों को ड्रॉप करने का फैसला उनका नहीं बल्कि चयनकर्ताओं का था।

25 सालों तक दोनों ने की बात

कपिल देव और गावस्कर के बीच मनमुटाव इतना बढ़ गया कि दोनों ने एक-दूसरे से 25 सालों तक बात नहीं की। हालांकि, इस लड़ाई का भी अंत होना था। दरअसल, विश्व कप 1983 में जीत के 25 साल पूरे होने पर एक पार्टी का आयोजन किया गया, जहां सभी सदस्य पहुंचे और इस दौरान कपिल-गावस्कर भी पार्टी का हिस्सा बने। वहां पर अन्य खिलाड़ियों ने पहल की और उसके बाद दोनों ने दुश्मनी भूलकर एक-दूसरे से बातचीत करने लगे।

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