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युवा टीम और अनुभवी कोच के फॉर्मूले ने मचाया गदर, उत्तर प्रदेश का क्या 20 सालों का सूखा होगा खत्म

By Vikas MishraEdited By: Praveen Kumar Mishra
Published: Fri, 23 Oct 2026 06:00 AM (IST)

उत्तर प्रदेश रणजी टीम ने बिहार और गोवा पर लगातार जीत दर्ज कर शानदार शुरुआत की है, जिससे वह तालिका ...और पढ़ें

उत्तर प्रदेश क्रिकेट टीम

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संक्षेप में पढ़ें

विकास मिश्र, लखनऊ। बिहार पर बोनस अंक और गोवा के खिलाफ 68 रनों की सीधी जीत से 13 अंक के साथ तालिका में शीर्ष पर उत्तर प्रदेश के लिए रणजी ट्रॉफी में इससे बढ़िया शुरुआत और क्या हो सकती है। उत्तर प्रदेश ऐसा आगाज इसके पहले वर्ष 2018-19 सत्र में किया था, जिसमें पहले मुकाबले में गोवा को पारी व 247 रन और दूसरे मैच में ओडिशा को 10 विकेट से हराकर दोनों मैचों में बोनस अंक हासिल किए थे। लंबे समय बाद कोच की भूमिका, टीम संतुलन, कप्तान का नेतृत्व और मजबूत रणनीति का असर दिख रहा है।

...तो क्या खत्म होगा 20 साल का ट्रॉफी का सूखा?

जनसंख्या की लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश को करीब 20 साल से रणजी ट्रॉफी का इंतजार है। यही नहीं, पिछले 11 वर्ष में टीम महज दो बार नॉकआउट में जगह बनाने में सफल रही है, जबकि लगातार चार साल से उत्तर प्रदेश का सफर नाकआउट से पहले ही समाप्त हो गया। पिछले 11 वर्ष में दो बार ऐसा हुआ है जब उत्तर प्रदेश ने अपने अभियान की शुरुआती दो मैचों में बड़ी से की है, टीम सेमीफाइनल तक जरूर पहुंची है।

2018-19 में उप्र ने क्वार्टर फाइनल तक सफर तय किया, जबकि 2021-22 में सेमीफाइनल का टिकट हासिल किया। मौजूदा सत्र के पहले मैच में उत्तर प्रदेश ने बिहार को पारी और 267 रनों के भारी अंतर से करारी शिकस्त दी। दूसरे मैच में भी टीम ने अपनी लय बरकरार रखते हुए गोवा को 68 रनों से पराजित कर अन्य टीमों की बेचैनी बढ़ा दी है। दोनों मैचों में उत्तर प्रदेश की जीत के नायक लखनऊ के लेग स्पिनर जीशान अंसारी, हापुड़ के कार्तिक यादव, सहारनपुर के माधव कौशिक और अलीगढ़ के रिंकू सिंह रहे। रिंकू दोनों मैचों में शतकीय पारी खेलकर शानदार फार्म के संकेत दिए है।

नए कोच बदलेंगे किस्मत

उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) के चयनकर्ताओं ने इस बार टीम के संतुलन पर पूरा ध्यान दिया है। शुरुआती दोनों मुकाबलों मिली जीत ने इस बात पर मुहर भी लगा दी है। लंबे समय बाद जीशान अंसारी की टीम में वापसी हुई। सूत्रों के मुताबिक, मुख्य कोच ज्ञानेंद्र पांडेय का टीम एकादश तैयार करने काफी दखल रहा है। किस खिलाड़ी को कब अवसर देना है, इस बात को वह बखूबी जानते हैं।

उत्तर प्रदेश ने वर्ष 2005-06 में ज्ञानेंद्र पांडेय की कोचिंग में ही रणजी का रण जीता था। इसके अलावा दो बार 2007-08 और 2008-09 में फाइनल तक सफर तय किया। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीसीए ने सही समय पर पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर को उत्तर प्रदेश क्रिकेट टीम की बागडोर सौंपी है। कप्तान और कोच की निगरानी में टीम अनुशासित रखते हुए बढ़िया प्रदर्शन के लिए उत्साहित है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश ने रक्षात्मक नहीं, 'परिणामोन्मुखी' क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया है।

चुनौतीपूर्ण है आगे की राह

उत्तर प्रदेश के लिए शुरुआत तो अच्छी हो गई है, लेकिन आगे की राह चुनौतीपूर्ण हो सकती है। अपने ग्रुप में उत्तर प्रदेश को अभी बड़ोदरा, विदर्भ, मध्य प्रदेश, जम्मू एवं कश्मीर, पुडुचेरी से मुकाबला करना है। नॉकआउट दौर में मजबूत टीमें सामने होंगी। बीच में ब्रेक के बाद रणजी ट्रॉफी का सीजन लंबा चलना है। मुश्ताक अली और विजय हजारे ट्रॉफी आयोजित होगी। ऐसे में टीम को लय बरकरार रखनी होगी। इसकी सर्वाधिक जिम्मेदारी कोच ज्ञानेंद्र पांडेय और कप्तान आर्यन जुयाल के कंधों पर होगी।

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