नई दिल्ली। आइपीएल में सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग के मामले में आइसीसी के चेयरमैन एन श्रीनिवासन और 12 प्रमुख खिलाडिय़ों के खिलाफ जांच करने वाली न्यायमूर्ति मुकुल मुद्गल की अध्यक्षता वाली समिति ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी।

न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने इस तथ्य का उल्लेख किया तो इसके बाद कोर्ट ने रिपोर्ट रिकार्ड में लेते हुए इस मामले की सुनवाई एक सितंबर के लिए निर्धारित कर दी। शीर्ष अदालत ने मई में इस प्रकरण की जांच अपनी ही समिति से कराने की बीसीसीआइ की पेशकश ठुकराते हुए यह मामला न्यायमूर्ति मुद्गल समिति को सौंप दिया था। मुद्गल समिति ने इससे पहले भी इसी मामले से जुड़े कुछ पहलुओं की जांच करके अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में न्यायालय को सौंपी थी जिसमे श्रीनिवासन और 12 क्रिकेट खिलाडिय़ां के नाम का उल्लेख था।

कोर्ट ने उस वक्त कहा था, 'हमारी यह सुविचारित राय है कि सीलबंद लिफाफे में सौंपी गयी रिपोर्ट में शामिल एन श्रीनिवासन सहित 13 व्यक्तियों के खिलाफ न्यायमूर्ति मुद्गल समिति को ही आगे जांच करनी चाहिए क्योंकि यदि इन आरोपों की जांच के लिए नई समिति बनाई गई तो इससे आरोपों के जनता में लीक होने की संभावना बनी रहेगी, जिससे 13 व्यक्तियों की प्रतिष्ठा को अपूर्णीय क्षति पहुंचेगी।'

उल्लेखनीय है कि आइपीएल के 2013 के संस्करण में दिल्ली पुलिस ने स्पॉट फिक्सिंग के आरोप में राजस्थान रॉयल्स के तीन खिलाडिय़ों एस श्रीसंत, अजित चंदीला और अंकित चव्हाण को गिरफ्तार किया था। इसके बाद मुंबई पुलिस ने बीसीसीआई के तत्कालिन अध्यक्ष एन श्रीनिवासन के दामाद मयप्पन और अभिनेता विंदू दारा सिंह को सट्टेबाजी के आरोपों में गिरफ्तार किया था। अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जांच के लिए न्यायमूर्ति मुकुल मुद्गल की अगुआई में तीन सदस्यीय समिति गठित की थी।

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