यूपी में उम्र को लेकर युवा क्रिकेटर कर रहे हैं जमकर फ्रॉड, एक साल बीतने के बाद दो महीने छोटा हो गया क्रिकेटर
उत्तर प्रदेश में अंडर-16 क्रिकेटरों की आयु जांच रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी सामने आई है, जहाँ एक साल ...और पढ़ें

यूपीसीए

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अभिषेक त्रिपाठी, जागरण, नई दिल्ली। अगर आप पिछले साल 21 साल के थे तो 365 दिन बाद आप 22 साल के होंगे लेकिन ये क्रिकेट है, यहां कभी-कभी एक साल बाद भी क्रिकेटरों की उम्र नहीं बढ़ती। और ये मैं नहीं कह रहा हूं, ये तो भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ (यूपीसीए) के कंसलटेंट द्वारा अंडर-16 के क्रिकेटरों की आयु जांच रिपोर्ट बता रही है।
हर साल अंडर-16 के बच्चों का बोन टेस्ट लिया जाता है और इसके आधार पर बच्चों को राज्य क्रिकेट संघ की अंडर-16 टीम में खेलने को मिलता है क्योंकि आधार कार्ड में जन्मतिथि में फ्राड के कई मामले पहले सामने आ चुके हैं। जो लोग निर्धारित उम्र से ज्यादा होते हैं उन्हें इसके लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाता है। पिछले कई सालों से इन रिपोर्टों पर सवाल उठ रहे हैं लेकिन इस बार तो हद ही हो गई है।
आरव त्यागी की रिपोर्ट ने चौंकाया
दैनिक जागरण के पास उत्तर प्रदेश के अंडर-16 के बच्चों की पिछले और इस साल दोनों की रिपोर्ट है। इसमें कुछ क्रिकेटरों की रिपोर्ट चौंकाती है। बीसीसीआई और यूपीसीए के द्वारा पिछले साल कराई गई आयु जांच रिपोर्ट में आरव त्यागी की फाइनल रेटिंग 15.6 थी और उस आधार पर वह इस साल 16.6 वर्ष के हो जाते। पिछले साल की रिपोर्ट में उन्हें 2026-27 सत्र में उप्र से अंडर-16 खेलने के लिए अयोग्य बताया गया था। कमाल की बात ये है कि इस साल की रिपोर्ट में उनकी फाइनल रेटिंग 16.2 आई है। यानी 12 महीने बीतने के बाद भी वह सिर्फ छह महीने ही बड़े हुए हैं।
आलोक कुमार का मामला और हैरान करने वाला है। पिछले साल उनकी फाइनल रेटिंग 15.9 थी। उनकी इस साल की फाइनल रेटिंग 15.7 आई है। यानी वह एक साल में दो महीने छोटे हो गए हैं। ऐसे ही एक नाम अयांश सानू का है। वह पिछले साल बोन टेस्ट के हिसाब से 15.7 वर्ष के थे। एक साल बाद वह सिर्फ 15.9 वर्ष के घोषित हुए हैं। यानी कैलेंडर में भले ही आपने 12 पन्ने पलट लिए हों लेकिन अयांश एक साल में सिर्फ दो महीने बड़े हुए हैं।
अन्य खिलाड़ियों ने भी की गड़बड़ी
यही हाल कामरान अली, कृष्ण कुमार और रुद्र शर्मा का है। वे पिछले साल भी 16.2 वर्ष के थे और इस वर्ष भी उतनी ही उम्र के हैं। अगर आप जवान रहना चाहते हैं तो इन डॉक्टरों से अपनी बोन टेस्ट की जांच करवा सकते हैं। विष्णु सरोज और यश वर्धन सिंह की रिपोर्ट में भी आपको ऐसा ही कुछ देखने को मिलेगा। पिछले साल की रिपोर्ट के हिसाब से विष्णु इस साल 16.7 के हो जाते लेकिन नए बोन टेस्ट का कमाल ये है कि उनकी उम्र इस साल सिर्फ 16.2 आई है।
बोन टेस्ट की रिपोर्ट में फाइनल रेटिंग 16.4 तक आने पर कोई भी क्रिकेटर पूरे सत्र में अंडर-16 टूर्नामेंट खेलने के लिए योग्य होता है। 16.5 या उससे ऊपर उम्र आने पर उसे अयोग्य घोषित किया जाता है। एक सूत्र ने अंडर-16 की आयु जांच रिपोर्ट को सबसे बड़ा खेल बताया तो यूपीसीए के एक अधिकारी ने बीसीसीआई का नाम लेते हुए पल्ला झाड़ दिया।
बीसीसीआई ने मामले पर दी सफाई
बीसीसीआई के एक अधिकारी से जब इस बार बात की गई तो उन्होंने कहा कि पिछले साल तक हम मशीन से जांच करवाते थे। इस बार अलग से कंसलटेंट रखे गए हैं। जो पिछले साल की रिपोर्ट के आधार पर इस साल खेलने के लिए अयोग्य हो रहे थे उनको हमने दोबारा टेस्ट देने का मौका दिया था। हालांकि जो भी हो या तो पिछली रिपोर्ट का आधार गलत था या इस रिपोर्ट में खेल हुआ है।
