MS Dhoni के बाद झारखंड की खान से निकल रहे हैं गजब नगीने, दलीप ट्रॉफी में दिखी झलक
झारखंड के खिलाड़ी इस समय भारतीय क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। दलीप ट्रॉफी में राज्य के खिलाड़ियों का प्रदर्शन इस बात की गवाही दे रहा है।

झारखंड से निकल रहे हैं गजब खिलाड़ी

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। एक समय भारत के बड़े शहरों को क्रिकेट का पावर हाउस कहा जाता था। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू, चेन्नई से ही अधिकतर क्रिकेटर आते थे, लेकिन समय बदला और छोटे राज्यों से भी कई खिलाड़ी निकले। ऐसा ही एक राज्य है झारखंड जिसने भारत को उसका सबसे सफल कप्तान एमएस धोनी दिया। कुछ साल शांत रहने के बाद फिर यहां की फिजा बदली है और अब राष्ट्रीय स्तर पर इस राज्य से कई उभरते हुए खिलाड़ी निकल रहे हैं। ताजा उदाहरण दलीप ट्ऱॉफी है।
दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन ने साउथ जोन को मात दे लंबे समय बाद खिताब जीता। इस टीम में झारखंड के खिलाड़ियों का अहम रोल रहा। टीम में झारखंड के पांच खिलाड़ी चुने गए थे और कप्तानी मिली थी ईशान किशन को जो झारखंड से ही आते हैं। उनके अलावा कुमार कुशाग्र, अनुकूल रॉय, शिखर मोहन और विराट सिंह भी टीम का हिस्सा थे।
दिखाया दम
ईशान ने कप्तानी की जिम्मेदारी को बखूबी निभाया और फाइनल में 270 रनों की पारी खेली। कुमार कुशाग्र ने भी उनका साथ दिया और 101 रन ठोके। शिखर मोहन और अनुकूल रॉय ने भी अच्छा योगदान दिया। एक और खिलाड़ी शरणदीप भी टीम में जगह बनाने के करीब थे, लेकिन करीब से चूक गए।
झारखंड ने सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं दिए बल्कि एक टीम के तौर पर जीत कैसे हासिल करनी है वो भी बताया है। ईशान की कप्तानी में ही झारखंड ने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जीती। यहीं से ईशान का टीम इंडिया में वापसी का रास्ता भी खुला।
हो रहा है बदलाव
झारखंड के खिलाड़ी सिर्फ सीमित ओवरों में अच्छा नहीं कर रहे हैं बल्कि खेल के लंबे प्रारूप में भी उनका खेल लगातार चमक रहा है। इसका कारण झारखंड क्रिकेट संघ (जेएससीए) में आए बदलाव है। संघ के सचिव और तकरीबन ढाई दशक तक घरेलू क्रिकेट खेलने वाले सौरभ तिवारी के मुताबिक, झारखंड जूनियर क्रिकेट में लंबे प्रारूप को अहमियत दे रहा है और इसलिए लीग मैचों को दो दिवसीय, नॉकआउट मैचों को तीन दिन और फाइनल को चार दिन का कर दिया गया है।
तिवारी के मुताबिक, इससे खिलाड़ी लंबे प्रारूप की तकनीक में दक्ष होंगे और टी20 जैसे रफ्तार वाले फॉर्मेट के ढर्रे से बाहर निकलेंगे तभी वह लंबी पारियां खेलने में महारत हासिल कर सकेंगे।
मजबूत हो रहा है ढांचा
जेएससीए ने राज्य से प्रतिभा को बाहर निकालने का भी प्रयास जोरों से किया है। इसके लिए अब संघ राज्य के दो बड़े शहरों- रांची और जमशेदपुर तक सीमित नहीं है बल्कि वह चार जोनों में एक अधुनिक क्रिकेट अकादमी बनाने जा रहा है जिससे पूरे राज्य से प्रतिभा सामने आ सके और उसे निखारा जा सके।
