IND vs NZ: न्यूजीलैंड में कई मोर्चों पर होगी भारत की परीक्षा, कीवियों ने टीम इंडिया को फंसाने के लिए बिछाया 'जाल'
वेस्टइंडीज सीरीज के बाद भारतीय टीम न्यूजीलैंड दौरे पर है, जहां उसे तीनों प्रारूपों में मजबूत प्रतिद्वंद्वी और मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना होगा।

भारतीय क्रिकेट टीम (फोटो: BCCI)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। वेस्टइंडीज के विरुद्ध 2-1 से वनडे सीरीज जीतने और टी-20 सीरीज 2-2 से बराबर रहने के बाद भारतीय टीम के सामने अब न्यूजीलैंड की चुनौती है। मुख्य कोच गौतम गंभीर सहित भारतीय खिलाड़ियों का पहला समूह सोमवार को न्यूजीलैंड पहुंच गया, लेकिन इस दौरे की मुश्किलें सिर्फ मजबूत प्रतिद्वंद्वी तक सीमित नहीं हैं।
करीब डेढ़ महीने लंबे दौरे में भारत को तीनों प्रारूपों में खेलना है, तेज और उछाल भरी पिचों पर खुद को ढालना है और सबसे अहम विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) के फाइनल की दौड़ में अपनी उम्मीदें बनाए रखनी हैं। भारत 22 अक्टूबर से पांच मैचों की टी-20 सीरीज के साथ दौरे की शुरुआत करेगा। यह सीरीज एक नवंबर तक चलेगी।
वनडे और टेस्ट सीरीज की शुरुआत
इसके बाद चार नवंबर से पांच वनडे मैचों की सीरीज शुरू होगी, जिसका आखिरी मुकाबला 15 नवंबर को खेला जाएगा। फिर 19 नवंबर से दो टेस्ट मैचों की सीरीज शुरू होगी। इस कार्यक्रम में खिलाड़ियों को प्रारूप बदलने, यात्रा करने और अगले मुकाबले की तैयारी करने के लिए सीमित समय मिलेगा। ऐसे में टीम प्रबंधन के सामने खिलाड़ियों को तरोताजा रखने के साथ-साथ हर प्रारूप के लिए सही संयोजन तैयार करने की चुनौती होगी।
भारतीय टीम के सामने होगी बड़ी चुनौती
न्यूजीलैंड में भारतीय टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल ढलना होगी। यहां की पिचों पर तेज गेंदबाजों को उछाल और सीम मूवमेंट मिल सकता है, जबकि मौसम और हवा की स्थिति गेंद को स्विंग कराने में मदद कर सकती है। ऐसे में भारतीय बल्लेबाजों को तकनीक और शॉट चयन में अनुशासन दिखाना होगा। विशेषकर टेस्ट मैचों में शुरुआती ओवरों में विकेट बचाना और गेंद को देर से खेलना अहम होगा।
चिंता की बात यह है कि भारतीय टीम इस दौरे पर कोई अभ्यास मैच नहीं खेलेगी। इससे पहले इंग्लैंड और आयरलैंड दौरों पर भी अभ्यास मैच नहीं खेलने का मुद्दा उठा था। विदेशी परिस्थितियों में सीधे अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में उतरने से खिलाड़ियों को पिच, मौसम और गेंद के व्यवहार को समझने के लिए कम समय मिलता है। हालांकि अभ्यास मैच न खेलने को ही पिछली टी-20 सीरीज में हार का एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता, लेकिन न्यूजीलैंड जैसी परिस्थितियों में इसकी कमी महसूस हो सकती है।
तेज गेंदबाजों पर न्यूजीलैंड ने खेला दांव
न्यूजीलैंड ने टी-20 सीरीज के लिए सात तेज गेंदबाजों को टीम में शामिल किया है। इससे साफ है कि मेजबान टीम अपनी तेज गेंदबाजी की ताकत का भरपूर इस्तेमाल करना चाहेगी। भारतीय बल्लेबाजों को शुरुआत से ही स्विंग और उछाल का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा। वहीं, जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति में भारत की तेज गेंदबाजी का जिम्मा 36 वर्षीय भुवनेश्वर कुमार पर होगा, जो चार साल बाद टी-20 टीम में वापसी कर रहे हैं। भारतीय तेज गेंदबाजों को भी परिस्थितियों का फायदा उठाकर मेजबान बल्लेबाजों पर दबाव बनाना होगा।
वर्कलोड संभालने की चुनौती
लगातार क्रिकेट के दबाव को देखते हुए भारत ने वनडे सीरीज के लिए दो टीमों के साथ उतरने का निर्णय किया है। न्यूजीलैंड ने भी वनडे में दो टीमें चुनी हैं। पहले तीन मुकाबलों में शुभमन गिल टीम की अगुआई करेंगे, जबकि आखिरी दो वनडे में श्रेयस अय्यर कप्तान होंगे। यह बदलाव खिलाड़ियों को मौका देने और लंबे कार्यक्रम के बीच टीम का संतुलन बनाए रखने की कोशिश का हिस्सा है। हालांकि, अलग-अलग कप्तानों के नेतृत्व में खेलने के दौरान टीम संयोजन और रणनीति में तालमेल बनाए रखना भी जरूरी होगा।
टी-20 और वनडे सीरीज में खिलाड़ियों के प्रदर्शन से टेस्ट टीम की तैयारियों के संकेत भी मिलेंगे। तेज गेंदबाजों को सीमित ओवरों के मुकाबलों के बाद टेस्ट क्रिकेट के लिए अपनी फिटनेस और वर्कलोड का ध्यान रखना होगा। बल्लेबाजों के लिए भी सफेद गेंद से लाल गेंद के प्रारूप में बदलाव आसान नहीं होगा।
टेस्ट सीरीज भी होगी अहम
न्यूजीलैंड दौरे का सबसे महत्वपूर्ण चरण दो टेस्ट मैच होंगे। डब्ल्यूटीसी फाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए भारत को बेहतर नतीजे हासिल करने होंगे। श्रीलंका के विरुद्ध दूसरा टेस्ट ड्रॉ रहने के बाद टीम के लिए न्यूजीलैंड में दोनों मुकाबले जीतना बेहद अहम हो गया है। हालांकि सिर्फ जीत ही नहीं, अन्य टीमों के नतीजे भी भारत की संभावनाओं को प्रभावित करेंगे।
