BCCI ने शुरू की बोन टेस्ट रिपोर्ट में गड़बड़ी की जांच, यूपी-राजस्थान में अंडर-16 खिलाड़ियों की उम्र में फर्जीवाड़ा का मामला आया था सामने
बीसीसीआई ने अंडर-16 क्रिकेट खिलाड़ियों के बोन टेस्ट रिपोर्ट में सामने आई विसंगतियों की जांच शुरू कर दी है। यह ...और पढ़ें

अंडर-16 क्रिकेट (फोटो: AI)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अभिषेक त्रिपाठी, जागरण, नई दिल्ली। अंडर-16 क्रिकेट खिलाड़ियों के बोन टेस्ट की रिपोर्ट में विसंगतियां सामने आने के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने मामले की जांच कराने का निर्णय लिया है। 21 अक्टूबर को दैनिक जागरण में इस संबंध में खबर प्रकाशित होने के बाद बीसीसीआई के पास कई शिकायतें पहुंची थीं। इसके बाद बोर्ड ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
बीसीसीआई और उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ (UPCA) की ओर से अंडर-16 खिलाड़ियों के बोन टेस्ट की रिपोर्ट में ऐसी विसंगतियां सामने आई थीं, जिनसे उम्र निर्धारण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए। रिपोर्ट में कुछ खिलाड़ियों की फाइनल रेटिंग पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ने के बजाय कम दिखाई गई। एक खिलाड़ी 12 महीने बीतने के बाद एक साल बड़ा होने की जगह दो महीने छोटा हो गया। इस तरह की गड़बड़ियां केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, राजस्थान के अंडर-16 खिलाड़ियों की रिपोर्ट में भी सामने आई हैं।
उम्र में धोखाधड़ी का मामला सामने आया
हर साल अंडर-16 के बच्चों का बोन टेस्ट लिया जाता है और इसके आधार पर बच्चों को राज्य क्रिकेट संघ की अंडर-16 टीम में खेलने को मिलता है क्योंकि आधार कार्ड में जन्मतिथि में धोखाधड़ी के कई मामले पहले सामने आ चुके हैं। जो लोग निर्धारित उम्र से ज्यादा होते हैं उन्हें इसके लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाता है। यूपीसीए के अंडर-16 खिलाड़ियों की रिपोर्ट में सामने आई विसंगति ने इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
एक खिलाड़ी की पिछले वर्ष फाइनल रेटिंग 15.9 थी। इस आधार पर एक साल बाद उसकी रेटिंग लगभग 16.9 होनी चाहिए थी, लेकिन 2026 में आई रिपोर्ट में उसकी फाइनल रेटिंग 15.7 आई। यानी 12 महीने बीतने के बाद वह एक साल बड़ा होने की जगह पिछले साल की उम्र से दो महीने छोटा हो गया। कमाल की बात है कि पिछले साल भी बीसीसीआई और यूपीसीए के अधीन ही इन खिलाड़ियों का बोन टेस्ट हुआ था।
BCCI ने शुरू की मामले की जांच
सूत्र का कहना है कि इस बार उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बोन टेस्ट करने वाले कंसल्टेंट एक ही हैं। हालांकि बीसीसीआई या यूपीसीए ने इसकी पुष्टि नहीं की है। एक शिकायतकर्ता ने दैनिक जागरण से कहा कि मेरे पास बीसीसीआई से फोन आया था और उन्होंने कहा कि हम इसकी जांच कर रहे हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि जिन खिलाड़ियों की रिपोर्ट में संदेह है उनकी आधार कार्ड हिस्ट्री चेक की जानी चाहिए। दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा।
