अजीत अगरकर की विदाई की इनसाइड स्टोरी: रोहित शर्मा का भविष्य, लक्ष्मण से विवाद और वो एक मीटिंग
रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर चल रहा विवाद और वीवीएस लक्ष्मण के साथ बढ़ते मतभेद सीनियर चयन समिति के ...और पढ़ें

अजीत अगरकर

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पीटीआई, नई दिल्ली। पूर्व कप्तान रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर चल रहा विवाद और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण के साथ बढ़ते मतभेद सीनियर चयन समिति के प्रमुख अजीत अगरकर और बीसीसीआई के बीच रिश्तों में दरार का मुख्य कारण बने।
अगरकर के जाने की पटकथा तब लिखी जा चुकी थी, जब इंग्लैंड के विरुद्ध वनडे सीरीज में भारत के निराशाजनक प्रदर्शन की समीक्षा के लिए मुंबई में बुलाई गई बैठक से उन्होंने दूरी बना ली। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने उनका बचाव किया, लेकिन बोर्ड के भीतर एक वर्ग का मानना था कि इतनी महत्वपूर्ण बैठक में चयन समिति के अध्यक्ष की मौजूदगी आवश्यक थी।
अगरकर विश्व कप तक पद पर बने रहना चाहते थे, लेकिन पिछले एक महीने में बीसीसीआई से लगातार ऐसे संकेत मिल रहे थे कि बोर्ड अब चयन समिति में नए चेहरे की तलाश कर रहा है। आमतौर पर बोर्ड ऐसे चयनकर्ता को आसानी से नहीं हटाता, जिसकी अगुआई वाली समिति ने पिछले तीन वर्षों में सीमित ओवरों की चार आईसीसी टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचने वाली टीमें चुनी हों और उनमें से तीन में खिताब भी जीते हों।
अगरकर और बीसीसीआई के बीच असली दरार रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर पैदा हुई। इंग्लैंड के विरुद्ध वनडे सीरीज से पहले चयन समिति ने टीम प्रबंधन और बीसीसीआई के शीर्ष पदाधिकारियों के साथ मिलकर रोहित को वनडे टीम से आगे बढ़ने का संकेत देने का फैसला किया। यह सामूहिक निर्णय था और रोहित तक बात पहुंचाने की जिम्मेदारी दक्षिण क्षेत्र के चयनकर्ता प्रज्ञान ओझा को दी गई।
रोहित 2027 वनडे विश्व कप खेलना चाहते हैं और उन्हें यह संदेश पसंद नहीं आया। अगरकर के करीबी लोगों के अनुसार, वह इस घटनाक्रम से आहत और नाराज थे। बीसीसीआई के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अगरकर को इस बयान की पहले से जानकारी नहीं थी।
बोर्ड चाहता था कि रोहित के भविष्य पर फैसला लेने में जल्दबाजी न की जाए। दूसरी ओर, अगरकर का मानना था कि अगर 2027 विश्व कप में यशस्वी जायसवाल को आजमाना है तो उन्हें पर्याप्त वनडे खेलने का मौका देना होगा। एक बड़ा सवाल यह था कि भारतीय क्रिकेट के सुपरस्टार खिलाड़ियों के संन्यास या भविष्य पर अंतिम फैसला किसका होना चाहिए।
अगरकर के लिए यह चयन समिति के अधिकार क्षेत्र का हिस्सा था, जबकि भारतीय क्रिकेट की परंपरा में बड़े सितारों से जुड़े ऐसे फैसलों में बोर्ड प्रशासन की भूमिका हमेशा प्रभावी रही है। अगरकर और लक्ष्मण के बीच मतभेद चोटिल खिलाड़ियों के प्रबंधन और भारत ए टीम के कार्यक्रम को लेकर भी थे।
सीओई से जुड़े एक पूर्व कोच के अनुसार, लक्ष्मण हमेशा सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध टीम को मैदान पर उतारने के पक्षधर रहे हैं। इस तरह अगरकर का बीसीसीआई से अलग होना महज औपचारिकता बन गया, जब उन्होंने महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया।
