(गौतम गंभीर का कॉलम)। India vs South Africa 2nd t20 match: मेरी ओर से आप सभी को विजयदशमी की शुभकामनाएं। मैं उम्मीद करता हूं कि मेरी तरह आपने भी अच्छा समय बिताया। मैं दिल्ली में था और नियमित रूप से दशहरे मेले की रामलीला में था। वहां मैंने जमकर लुत्फ उठाया। वहां मेरे बचपन की यादें ताजा हो गई, जब मैं दिल्ली में रामलीलाओं में जाया करता था। क्रिकेट प्रशंसकों के लिए यह भी थोड़ा हर्षोल्लास की बता है कि भारत दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में 1-0 से आगे है। खेल के तरीके ने मुझे पिछली सदी के नौवें दशक और उसके बाद की याद दिला दी, जब घर में एक निश्चित तरीके से टेस्ट क्रिकेट खेला जाता था।

इस पटकथा की शुरुआत भारत के टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने से हुई और फिर उसने शानदार बल्लेबाजी करते हुए मेहमानों को मुकाबले से बाहर कर दिया। इसके बाद सब कुछ विशाखापत्तनम की पिच के स्वभाव पर निर्भर हो गया। दक्षिण अफ्रीका के 20 विकेटों में से 14 भारतीय स्पिनरों ने लिए और बाकी मुहम्मद शमी की चालाकी भरी रिवर्स स्विंग की वजह से मिले।

यह सब कुछ जाना-पहचाना सा लग रहा था। नौवें दशक में भी तब के भारतीय कप्तान टॉस, पिच और स्पिनरों पर बहुत भरोसा करते थे। और, किस्मत से ये तीनों-टॉस, अधूरी तैयार पिचें और स्पिनर ने भारत को घर में लगभग अजेय बना दिया था। भारतीय टीम से थोड़ा सा भी श्रेय छीनना और इन तत्वों को सारा श्रेय देना गलत होगा। मैं सिर्फ एक तरीके के बारे में सुझाव दे रहा था जिसका भारतीय कप्तानों ने वर्षो तक पालन किया है।

इसे देखते हुए पुणे में भी कुछ अलग नहीं होगा। भारत के पश्चिम भाग की लाल मिट्टी में थोड़ा सा उछाल हो सकता है, लेकिन दक्षिण अफ्रीकी टीम यदि भारत को चुनौती देती है तो मुझे बेहद आश्चर्य होगा। उनके बल्लेबाजों ने कुछ प्रतिबद्धता दिखाई थी, लेकिन यह सिर्फ टुकड़ों में थी। जिस तरह से एशियाई बल्लेबाजों को दक्षिण अफ्रीका या ऑस्ट्रेलिया की तेज उछाल वाली पिचों पर खुद को ढालने में संघर्ष करना पड़ता है, वैसे ही दक्षिण अफ्रीकी खिलाडि़यों को नीचे रहने वाली और कभी-कभी असमान उछाल वाल गेंदों को समझने में संघर्ष करना पड़ रहा है।

मैं रिद्धिमान साहा और आर अश्विन दोनों के लिए खुश था। दोनों एक तरह से वापसी कर रहे थे। हां, स्कोरबोर्ड साहा के खिलाफ 14 बाई दिखाता है, लेकिन मुझे लगता है कि उन्होंने स्पिनरों के खिलाफ बहुत अच्छी विकेटकीपिंग की। वह शांत रहने वाले व्यक्ति हैं, लेकिन उनमें क्रिकेट की बहुत अच्छी समझ है। वह ऐसे व्यक्ति हैं जो अच्छी सलाह के लिए कप्तान विराट कोहली के काम आएंगे। जिसने भी रोहित शर्मा को टेस्ट मैचों में उनका स्वाभाविक खेल खेलने की सलाह दी, वह मेरा मैन ऑफ द मैच था। मेरा मतलब है कि रोहित को रक्षात्मक मोड पर लाना आसान है, क्योंकि यह टेस्ट क्रिकेट है, लेकिन मुझे खुशी है कि रोहित ने रूढि़वादी परंपराओं का पालन नहीं किया और उस तरह का खेल खेला, जिसके लिए वह जाने जाते हैं। रोहित जिस तरह से अपने टेस्ट करियर की इमारत तैयार कर रहे हैं उस पर मुझे बेहद गर्व है। मुझे आज उन्हें दुनिया का सबसे खतरनाक और सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज घोषित करने में कोई शंका नहीं है। वीरेंद्र सहवाग की तरह रोहित भी भारत की टेस्ट जीत की नींव तैयार कर सकते हैं। बस उन्हें सिर्फ संभाल कर रखो और प्यार करो।

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Posted By: Sanjay Savern

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