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महादेव बेटिंग ऐप के प्रमोटर चंद्राकर को ओमान से किया गया प्रत्यर्पित, आज रायपुर की CBI अदालत में पेशी

Published: Mon, 02 Nov 2026 06:12 AM (IST)

महादेव बेटिंग ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत प्रत्यर्पित कर रायपुर लाया गया है। उसे आज सीबीआई विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।

सौरभ चंद्राकर की आज कोर्ट में पेशी।

सौरभ चंद्राकर की आज कोर्ट में पेशी।

HighLights

  1. महादेव ऐप प्रमोटर सौरभ चंद्राकर ओमान से प्रत्यर्पित।

  2. अवैध ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क चलाने का आरोप।

  3. आज रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में पेशी।

डिजिटल डेस्क, रायपुर। सीबीआई ने रविवार को बताया कि महादेव बेटिंग ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत वापस लाया गया है। उस पर विदेश से एक अवैध ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क चलाने और सरकारी अधिकारियों को प्रोटेक्शन मनी देने का आरोप है।

सीबीआई की एक विशेष टीम उसे भारत लेकर आई है। सोमवार को उसे रायपुर की एक विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। चंद्राकर सीबीआई के दो मामलों में वांछित है, जिनमें चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इसके अलावा, वह प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक मामले में भी आरोपी है, जिसमें उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दायर की गई है।

सौरभ का होगा मेडिकल परीक्षण

एजेंसी के अनुसार, ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद उसे रायपुर ले जाने से पहले उसका मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा। सीबीआई के मुताबिक, इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने चंद्राकर का पता लगाया और उसे हिरासत में लिया।

इसके बाद, सीबीआई और ईडी ने उसके खिलाफ जुटाए गए सबूतों के साथ उसे भारत लाने (प्रत्यर्पण) का औपचारिक अनुरोध भेजा। ओमान द्वारा प्रत्यर्पण को मंजूरी दिए जाने के बाद सीबीआई की एक टीम उसे वापस लाने के लिए मस्कट गई।

क्या है मामला?

छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़े मामलों की जांच अपने हाथ में ली थी। एजेंसी ने इसे देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन बेटिंग सिंडिकेट में से एक बताया है।

जांचकर्ताओं का आरोप है कि यह नेटवर्क भारत के बाहर से पैनल और फ्रेंचाइजी के जरिए चलाया जा रहा था। ये पैनल उपयोगकर्ताओं को जोड़ते थे और क्रिकेट, फुटबॉल, ताश के खेलों व अन्य आयोजनों पर सट्टा लगवाते थे।

एजेंसी का आरोप है कि सट्टे से कमाई गई रकम को कई म्यूल (फर्जी/दूसरे के नाम वाले) बैंक खातों के जरिए घुमाया जाता था, कई बार ट्रांजैक्शन किए जाते थे और फिर हवाला के जरिए विदेश भेज दिया जाता था। आरोप है कि इस नेटवर्क को बिना किसी रुकावट के चलाने के लिए सरकारी अधिकारियों को भी पैसे दिए जाते थे।

चंद्राकर उन मुख्य आरोपियों में शामिल है, जिनके नाम प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), आईपीसी की आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी धाराओं तथा छत्तीसगढ़ जुआ (निषेध) अधिनियम के तहत दायर चार्जशीट में दर्ज हैं।

ईडी ने अपनी जांच के दौरान भारत और विदेश में उसकी संपत्तियों को भी जब्त (अटैच) किया है। सीबीआई ने बताया कि यह प्रत्यर्पण अन्य केंद्रीय एजेंसियों और इंटरपोल के नेशनल सेंट्रल ब्यूरो के साथ मिलकर किया गया, जिसमें ओमान के अधिकारियों ने भी मदद की।

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