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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 25, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Solar eclipse 2022: ऐसी मान्यता है कि सूतक काल में भोजन, शयन और मूर्ति स्पर्श करने से बचे

By Jagran NewsEdited By: PRITI JHA
Published: Tue, 25 Oct 2022 02:28 PM (IST)Updated: Tue, 25 Oct 2022 02:55 PM (IST)

Surya Grahan 2022 दीपावली पूजन के पश्चात सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही सूतक लग गया। सूतक काल में मूर्ति स्पर्श भोजन ...और पढ़ें

Sutak Kaal: ऐसी मान्यता है कि सूतक काल में भोजन, शयन और मूर्ति स्पर्श करने से बचे
Sutak Kaal: ऐसी मान्यता है कि सूतक काल में भोजन, शयन और मूर्ति स्पर्श करने से बचे

रायपुर, जागरण ऑनलाइन डेस्क । अमावस्था तिथि दो दिन रहने के कारण सोमवार को दीपावली का पर्व मनाया गया। घरों में माता लक्ष्मी का पूजन किया गया। आधी रात तक दीपावली पूजन के पश्चात सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही सूतक लग गया। पंडितों के अनुसार मंगलवार को स्वाति नक्षत्र पर तुला राशि पर ग्रस्तास्त खंडग्रास सूर्यग्रहण लग रहा है। 

सूतक और ग्रहण के समय

ग्रहण लगने से पूर्व सुबह 4.23 बजे से हीं सूतक लग गया जिस कारण इस दौरान मंदिर के पट बंद रहेंगे। ग्रहण शाम 4.23 बजे स्पर्श करेगा और ग्रहण का मध्य काल 5.28 बजे तथा ग्रहण का मोक्ष शाम में 6.25 बजे होगा। ग्रहण की अवधि 2 घंटा 2 मिनट तक होगी।

ये है मान्यता

ऐसा माना जाता है कि सूतक काल में मूर्ति स्पर्श, भोजन, शयन नहीं करना चाहिए। मान्यता के अनुसार ग्रहण काल में भोजन नहीं करना चाहिए। अनिष्ट शांति के लिए हवन, जप, दान, तुला दान, अन्न, वस्त्र का दान सोने चांदी का सर्प बनाकर तांबे के पात्र में रखकर दान करना चाहिए।

मध्य प्रदेश के हर क्षेत्र में दिखेगा आंश‍िक सूर्य ग्रहण

इस वर्ष का अंतिम सूर्यग्रहण मंगलवार शाम को घटित होगा। इसे मध्य प्रदेश के किसी भी जिले, गांव, कस्बे में देखा जा सकता है। मध्य प्रदेश में इसकी शुरुआत सायंकाल 04:26 बजे से होगी और यह सूर्यास्त के बाद समाप्त होगा।यद्यपि राज्य के आकाश में सूर्यग्रहण आंशिक रूप से ही दिखाई देगा। भारत के नागरिकों के लिए इस ग्रहण को समाप्त होते हुए देखना संभव नहीं हो पाएगा क्योंकि ग्रहण समाप्ति से पहले ही भारत में सूर्यास्त हो चुका होगा। 

रखनी होंगी ये सावधानियां

सूर्य ग्रहण को टेलीस्कोप और धूप से आंखों को बचाने वाले काले चश्मों से भी नहीं देखना चाहिए। इसे देखने के लिए विशेष रूप से बनाए गए सोलर फिल्टर युक्त चश्मों का ही इस्तेमाल करना चाहिए।आसमान में होने वाली इस खगोलीय घटना को देखने में अत्यंत सावधानी बरतनी होगी। इसे नंगी आंखों से कतई न देखें क्योंकि सूर्य की तेज किरणें आखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। जब चंद्रमा सूर्य के अध‍िकतम हिस्से को ढंक दे, तब भी इसे खाली आंखों से देखना खतरनाक है। इससे आंखों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।

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