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Stock Market Outlook: 15 से 18 सितंबर तक कैसा परफॉर्म करेगा शेयर बाजार? तेल के दाम और महंगाई डेटा होंगे अहम

Published: Sun, 13 Sep 2026 02:52 PM (IST)

आगामी सप्ताह में शेयर बाजार की दिशा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर निर्णय, घरेलू मुद्रास्फीति और कच्चे तेल की ...और पढ़ें

शेयर बाजार की चाल कैसी रहेगी? (AI फोटो)

शेयर बाजार की चाल कैसी रहेगी? (AI फोटो)

HighLights

  1. अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर निर्णय पर रहेगी सबकी नजर

  2. घरेलू मुद्रास्फीति (सीपीआई, डब्ल्यूपीआई) के आंकड़े भी महत्वपूर्ण होंगे

  3. कच्चे तेल की कीमतें और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम अहम कारक

एजेंसी, नई दिल्ली। अवकाश के कारण कम कारोबारी सत्रों वाले आगामी सप्ताह में शेयर बाजार की दिशा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर पर निर्णय, घरेलू मुद्रास्फीति के आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों से तय होगी।
सोमवार को ‘गणेश चतुर्थी’ के अवसर पर शेयर बाजार बंद रहेंगे।

ये फैक्टर्स होंगे अहम

रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा ने कहा, ‘‘वैश्विक स्तर पर, अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम और ब्रेंट क्रूड की चाल बाजार के प्रमुख उत्प्रेरक बने रहेंगे। अगले सप्ताह अमेरिकी फेडरल रिजर्व का मौद्रिक नीति निर्णय और ब्याज दरों के भविष्य के रुख पर उसकी टिप्पणी पर भी नजर रहेगी।’’
उन्होंने कहा कि घरेलू मोर्चे पर अगस्त के थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़ों के साथ ही बेरोजगारी और व्यापार संतुलन के आंकड़े भी चर्चा में रहेंगे।

वैश्विक बॉण्ड प्रतिफल और डॉलर पर दबाव

शोध विश्लेषक फर्म एचएसटी वेल्थ के संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) हरिसेल्वन राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘तात्कालिक नजर अमेरिकी मुद्रास्फीति और फेडरल रिजर्व के नीतिगत निर्णय पर होगी।’’
उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति के जोखिमों के चलते वैश्विक बॉण्ड प्रतिफल और डॉलर पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए 15-16 सितंबर को होने वाली फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की बैठक इस सप्ताह का प्रमुख वैश्विक उत्प्रेरक होगी। उन्होंने कहा कि भारत के लिए कच्चा तेल सबसे बड़ा बाहरी जोखिम बना हुआ है।

तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है

यदि पश्चिम एशिया से कच्चे तेल की आपूर्ति में व्यवधान बढ़ता है और कीमतों में तेजी आती है, तो इससे मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ सकता है, आयात बिल बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव आ सकता है और कंपनियों का मार्जिन घट सकता है। बीते सप्ताह बीएसई का मानक सूचकांक सेंसेक्स 1,733.67 अंक या 2.26 प्रतिशत टूटा, जबकि एनएसई निफ्टी में 499.6 अंक या दो प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

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"शेयर से जुड़े अपने सवाल आप हमें business@jagrannewmedia.com पर भेज सकते हैं।"

(डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)