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वालचंदनगर का दिलचस्प इतिहास: कॉटन कारोबारी से देश को पहली डिफेंस कंपनी देने वाले सेठ वालचंद की कहानी; ISRO के भी बने खास

Published: Sun, 13 Sep 2026 11:27 AM (IST)

वालचंदनगर महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित एक औद्योगिक टाउनशिप है, जिसका नाम प्रसिद्ध उद्योगपति सेठ वालचंद हीराचंद दोषी के ...और पढ़ें

किसने की थी वालचंदनगर की स्थापना? (AI फोटो)

किसने की थी वालचंदनगर की स्थापना? (AI फोटो)

HighLights

  1. वालचंदनगर पुणे जिले में सेठ वालचंद दोषी के नाम पर है

  2. सेठ वालचंद ने 1934 में चीनी कारखाना स्थापित कर टाउनशिप बनाई

  3. वालचंदनगर इंडस्ट्रीज ISRO के चंद्रयान-मंगलयान अभियानों में भागीदार है

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। आपने वालचंदनगर का नाम सुना है? वालचंदनगर एक फेमस जगह है, जो कि महाराष्ट्र के पुणे जिले की इंदापुर तहसील में स्थित एक औद्योगिक टाउनशिप है। इस जगह का इतिहास काफी दिलचस्प है। जिस तरह गुजरमल मोदी के नाम पर ऐतिहासिक मोदीनगर है, उसी तरह प्रसिद्ध उद्योगपति सेठ वालचंद हीराचंद दोषी (Seth Walchand Hirachand Doshi) ने के नाम पर वालचंदनगर (Walchandnagar History) है।

कौन थे सेठ वालचंद?

सेठ वालचंद हीराचंद दोषी का जन्म 23 नवंबर 1882 को हुआ था। वे भारत के एक महान उद्योगपति, दूरदर्शी और वालचंदनगर इंडस्ट्रीज ग्रुप के फाउंडर थे। उन्होंने स्वतंत्रता के बाद भारत में आत्मनिर्भरता की नींव रखी और देश में भारी उद्योगों की शुरुआत की।

जैन परिवार से संबंध

सेठ वालचंद एक जैन परिवार में जन्मे थे। अपने पिता के बैंकिंग और कॉटन के पारिवारिक बिजनेस में कुछ साल बिताने के बाद, उन्हें एहसास हुआ कि उन्हें पारिवारिक बिजनेस में कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने रेलवे के पूर्व क्लर्क लक्ष्मणराव बलवंत फाटक के साथ मिलकर कंस्ट्रक्शन के लिए रेलवे कॉन्ट्रैक्टर का काम शुरू किया।
बाद में यह पार्टनरशिप 'फाटक-वालचंद प्राइवेट लिमिटेड' बन गई। वालचंद एक सफल रेलवे कॉन्ट्रैक्टर साबित हुए, लेकिन वे बिजनेस के दूसरे आइडियाज के लिए भी तैयार थे।

वालचंदनगर टाउनशिप की स्थापना

सेठ वालचंद हीराचंद ने साल 1934 में यहाँ (वालचंदनगर) एक चीनी कारखाने की स्थापना की थी। उन्होंने इस बंजर जमीन को गन्ने की खेती के लिए विकसित किया और इसी कारखाने के इर्द-गिर्द इस आधुनिक टाउनशिप का निर्माण हुआ, जिसे वालचंदनगर नाम दिया गया।
वालचंदनगर को पुणे जिले (जो पहले शोलापुर का हिस्सा था) में स्थित 'कलंब' नाम के एक पुराने ग्रामीण इलाके के आस-पास बसाया गया था।

ये उद्योग भी फले-फूले

चीनी के साथ-साथ वालचंदनगर खडीसाखर, एल्कोहल, कागद (कार्डबोर्ड) और कन्फेक्शनरी जैसे कई अन्य सहायक उद्योग भी फले-फूले। यहाँ स्थित उनकी कंपनी वालचंदनगर इंडस्ट्रीज आज एक बड़ी हैवी इंजीनियरिंग कंपनी है, जो भारत के रक्षा, परमाणु और इसरो (ISRO) के अंतरिक्ष अभियानों (जैसे चंद्रयान और मंगलयान) के लिए महत्वपूर्ण पुर्जे बनाती है। इसकी मार्केट कैपिटल 1,429.05 करोड़ रुपये है।

ISRO के साथ मिलकर काम

वालचंदनगर इंडस्ट्रीज साल 1973 से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ जुड़ी हुई है और अंतरिक्ष अभियानों के लिए महत्वपूर्ण उपकरणों व बूस्टर का निर्माण करती है। चंद्रयान और मंगलयान जैसे कई अहम मिशनों में यहाँ बने उपकरणों का इस्तेमाल हुआ है।

देश की पहली डिफेंस कंपनी

सेठ वालचंद हीराचंद को देश में आधुनिक उद्योगों का जनक माना जाता है। उन्होंने देश की पहली विमान निर्माता कंपनी (जो बाद में HAL बनी, जो भारत की पहली डिफेंस कंपनी भी है), पहला स्वदेशी शिपयार्ड (हिंदुस्तान शिपयार्ड) और पहली कार फैक्ट्री (प्रीमियर ऑटोमोबाइल्स) स्थापित की थी।

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