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IPO News: सेबी ने दी बड़ी राहत, अब मार्च 2027 तक बिना पेपर जमा किए कंपनियां बदल सकेंगी इश्यू साइज!

By Jagran BusinessEdited By: Gyanendra Tiwari
Published: Tue, 13 Oct 2026 10:00 PM (IST)

सेबी ने कंपनियों को आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के तहत नए शेयर जारी करने के आकार में बदलाव करने की अस्थायी छूट 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दी है।

सेबी ने आईपीओ इश्यू साइज बदलने की छूट बढ़ाई।

सेबी ने आईपीओ इश्यू साइज बदलने की छूट बढ़ाई।

HighLights

  1. सेबी ने आईपीओ इश्यू साइज बदलने की छूट बढ़ाई।

  2. कंपनियां 31 मार्च 2027 तक कर सकेंगी बदलाव।

  3. बिना नए दस्तावेज 50% तक आकार में परिवर्तन संभव।

एजेंसी, मुंबई। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने मंगलवार को कंपनियों को नए मसौदा दस्तावेज दाखिल किए बिना अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO News) के तहत नए शेयर जारी करने के आकार में बदलाव करने की अस्थायी छूट बढ़ा दी। इस फैसले से बाजार में उतार- चढ़ाव के बीच आईपीओ लाने की तैयारी कर रही कंपनियों को अधिक लचीलापन मिलेगा।

एसोसिएशन ऑफ इन्वेस्टमेंट बैंकर ऑफ इंडिया (एआईबीआई) को भेजे गए एक पत्र के अनुसार, पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते शुरू की गई यह छूट पहले 30 सितंबर को समाप्त हो गई थी। अब यह उन आईपीओ के लिए लागू रहेगी, जो 31 मार्च 2027 या उससे पहले खुलेंगे।

कंपनीयां आकार में कर सकती हैं कटौती

इस व्यवस्था के तहत, आईपीओ लाने की तैयारी कर रही कंपनियां बाजार नियामक के पास नए मसौदा निर्गम दस्तावेज जमा किए बिना अपने नए शेयर निर्गम के आकार में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि या कटौती कर सकती हैं।

इस कदम का उद्देश्य कंपनियों को बाजार की बदलती परिस्थितियों और निवेशकों की मांग के अनुरूप अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने में मदद करना है।

सेबी ने 12 अक्टूबर को भेजे गए एक ईमेल में कहा कि प्रमुख प्रबंधक संशोधित निर्गम आकार को दर्शाने वाले अपडेटेड निर्गम दस्तावेज दाखिल कर सकते हैं, बशर्ते निर्गम के मूल उद्देश्य में कोई बदलाव न हो।

मर्चेंट बैंकरों को निर्गम के आकार में किसी भी संशोधन के लिए उचित कारण भी बताना होगा।

नियामक ने निवेश बैंकरों को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि सभी जरूरी बदलावों की जानकारी परिशिष्ट के माध्यम से निवेशकों को दी जाए और निर्गम दस्तावेज लागू नियमों के अनुरूप बने रहें ।

हितधारकों के अनुरोध के बाद बदला फैसला

बाजार से जुड़े लोगों ने कहा कि यह अवधि बढ़ाने का फैसला उद्योग जगत के हितधारकों के अनुरोध के बाद लिया गया है। उन्होंने लगातार बने भू-राजनीतिक तनाव और बाजार की बदलती परिस्थितियों के बीच इस छूट को जारी रखने की मांग की थी।

यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब प्राथमिक बाजार में गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। सितंबर आईपीओ के लिहाज से सबसे व्यस्त महीनों में से एक रहा। इस दौरान 34 से अधिक कंपनियों ने सामूहिक रूप से 39,380 करोड़ रुपए जुटाए। यह वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक जुटाई गई कुल राशि का लगभग 42 प्रतिशत है।

वित्त वर्ष 2026-27 में सितंबर तक कुल 78 कंपनियां आईपीओ के जरिए लगभग 94,276 करोड़ रुपए जुटा चुकी थीं। रिकॉर्ड धन जुटाने में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की लिस्टिंग का भी योगदान रहा। यह मौजूदा वित्त वर्ष का सबसे बड़ा आईपीओ और भारत के पूंजी बाजार के इतिहास में दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम बना ।

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