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RBI Policy के बाद कैसी रह सकती है शेयर बाजार की चाल, किन सेक्टर्स पर फोकस? अंबरीश बलिगा और गौरव शर्मा से समझें

Published: Wed, 07 Oct 2026 12:49 PM (GMT+05:30)

आरबीआई की हालिया पॉलिसी में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के बाद शेयर बाजार ने सामान्य प्रतिक्रिया ...और पढ़ें

AI जनरेटेड सांकेतिक तस्वीर

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HighLights

  1. रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी उम्मीद के मुताबिक रही।

  2. बाजार ने आरबीआई पॉलिसी पर सामान्य प्रतिक्रिया दी।

  3. एक्सपर्ट्स ने भविष्य में ब्याज दरों और महंगाई को लेकर चिंता जताई।

नई दिल्ली। पिछले कुछ दिनों से लगातार गिरे जा रहे शेयर बाजार (Share Market) के लिए आरबीआई की पॉलिसी (RBI Policy) एक अहम ट्रिगर थी, जो आ चुकी है। हालांकि, पॉलिसी को लेकर मार्केट ने कोई बहुत बड़ा रिएक्शन नहीं दिया। ना बाजार ज्यादा गिरा और ना ही ज्यादा चढ़ा। ऐसे में सवाल है कि आरबीआई पॉलिसी के बाद मार्केट के लिए आगे की राह कैसी होगी। इस सवाल के जवाब के लिए जागरण बिजनेस ने 2 खास मार्केट एक्सपर्ट से बात की।

इंडिपेंडेंट मार्केट एक्सपर्ट अंबरीश बलिगा और ग्लोब कैपिटल के हेड ऑफ रिसर्च, गौरव शर्मा ने आरबीआई पॉलिसी व गर्वनर संजय मल्होत्रा की स्पीच और उसके मार्केट पर संभावित असर को लेकर अपनी राय रखी।

अंबरीश बलिगा की राय

मार्केट एक्सपर्ट अंबरीश बलिगा ने कहा कि रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी उम्मीद के मुताबिक रही, इसलिए मार्केट ने इसे सामान्य रूप से लिया है। हालांकि, मुख्य सवाल यह है कि क्या यह ब्याज दरें बढ़ाने के नए दौर की शुरुआत है या यह सिर्फ़ एक बार की घटना है।

उन्होंने कहा, "अगर वेस्ट एशिया का संकट सुलझ जाता है, तो हम भरोसे के साथ कह सकते हैं कि ब्याज दरों में यह बढ़ोतरी सिर्फ़ एक बार की घटना है और RBI अगली पॉलिसी में यथास्थिति बनाए रख सकता है। अगर ऐसा नहीं होता है, तो अगली एक या दो पॉलिसी में 50-75 बेसिस पॉइंट्स की और बढ़ोतरी की उम्मीद की जा सकती है। इसके अलावा, मॉनसून एक और अहम कारक है, जिसका असर तब दिखेगा जब ज़्यादा राज्य सूखे की स्थिति की घोषणा करेंगे।"

गौरव शर्मा ने क्या कहा?

ग्लोब कैपिटल के हेड ऑफ रिसर्च गौरव शर्मा ने कहा कि ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी अनुमान के मुताबिक रही। लेकिन, अहम बात है कि गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि आगे भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता है।

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गौरव शर्मा ने कहा, ब्याज दरों से जुड़े रेट सेंसिटिव सेक्टर पर इस पॉलिसी का नेगेटिव असर देखने को मिल सकता है। ट्रांसमिशन में 2-3 महीने की देरी होगी, इसलिए असली असर उसके बाद ही दिखेगा। इसके अलावा, बढ़ती महंगाई एक बड़ी चिंता का विषय है। इसका कंपनियों के मार्जिन और उनकी प्रॉफेटिबिलिटी पर बड़ा असर पड़ेगा।