RBI Policy: ब्याज दरें बढ़ाईं, अपनाया 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' रुख; महंगाई से GDP तक 5 प्वाइंट में जानिए बड़ी बातें
भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% कर दिया है, साथ ही 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' का रुख अपनाया है।

HighLights
रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़कर अब 5.50% हुई।
आरबीआई ने 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' रुख अपनाया, महंगाई पर ध्यान।
चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान 7.1% किया।
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI Policy ने रेपो रेट (Repo Rate) में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर दी है और अब नई दरें 5.50% हो गई है, साथ ही आरबीआई ने 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (सोच-समझकर सख्ती बरतने) का रुख अपनाया। गवर्नर संजय मल्होत्रा के इस फैसले से पता चलता है कि केंद्रीय बैंक महंगाई पर ज़्यादा फोकस कर रहा है। हालांकि, अच्छी बात है कि आरबीआई, जीडीपी ग्रोथ को लेकर भी मज़बूत नज़रिया बनाए हुए है।
आइये 5 प्वाइंट्स के जरिए समझते हैं कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी के साथ ही महंगाई और जीडीपी की रफ्तार को लेकर आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने क्या कहा…
RBI पॉलिसी की बड़ी बातें
अब रेपो रेट 5.50%
- RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि यह फ़ैसला महंगाई के बदलते नज़रिए को देखते हुए लिया गया, जबकि भारतीय अर्थव्यवस्था मज़बूत बनी रही। MPC ने सर्वसम्मति से पॉलिसी रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 5.50% कर दिया। फरवरी 2023 के बाद रेपो रेट में यह पहली बढ़ोतरी है और यह उस स्थिति में बदलाव को दर्शाता है जब RBI ने कई महीनों तक दरों को बिना किसी बदलाव के बनाए रखा था। स्टैंडिंग डिपॉज़िट फ़ैसिलिटी रेट अब 5.25% है, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फ़ैसिलिटी रेट और बैंक रेट को बढ़ाकर 5.75% कर दिया गया है।
क्यों कड़ा किया रूख
- MPC ने अपना रुख 'न्यूट्रल' से बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' कर लिया है; इस बदलाव के पक्ष में चार सदस्यों ने वोट किया। इस बदलाव से संकेत मिलता है कि RBI अब महंगाई को काबू में रखने पर ज़्यादा ध्यान दे रहा है और ज़रूरत पड़ने पर पॉलिसी को और सख्त करने के लिए तैयार है। मल्होत्रा ने कहा कि यह बदलाव ज़रूरी था क्योंकि महंगाई से जुड़े जोखिम बढ़ गए थे।
महंगाई से जुडे़ जोखिम
RBI ने चालू वित्त वर्ष के लिए CPI महंगाई दर 5.2% रहने का अनुमान लगाया है। उसे उम्मीद है कि महंगाई दर तीसरी तिमाही में बढ़कर 6% हो जाएगी और फिर चौथी तिमाही में घटकर 5.7% पर आ जाएगी।
कम बारिश और कच्चा तेल ने बढ़ाई चिंता
- केंद्रीय बैंक ने मॉनसून में कम बारिश, अल-नीनो की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को मुख्य जोखिम बताया है।
GDP ग्रोथ को लेकर पॉजिटिव
महंगाई के जोखिमों के बावजूद, RBI भारत की ग्रोथ की संभावनाओं को लेकर आश्वस्त है। इसने चालू वित्त वर्ष के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 40 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ाकर 7.1% कर दिया है। निजी खपत और मज़बूत निवेश गतिविधियों के दम पर पहली तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8% रही। मल्होत्रा ने कहा, "ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मज़बूती दिखी।"
