NSE IPO GMP धड़ाम: लिस्टिंग से पहले 70% से ज्यादा गिरा ग्रे मार्केट प्रीमियम, निवेशकों की बढ़ी धड़कनें
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के IPO का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) लिस्टिंग से पहले 70% से अधिक गिर गया है। ...और पढ़ें

एनएसई आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम 70% से अधिक गिरा।
HighLights
एनएसई आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम 70% से अधिक गिरा।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का आईपीओ दूसरे दिन ही पूरी तरह सब्सक्राइब हुआ।
कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में राजस्व और ट्रांजैक्शन शुल्क में कमी आई।
आईएएनएस, मुंबई। NSE IPO GMP: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) का ग्रे मार्केट प्रीमियम (जीएमपी) लिस्टिंग से पहले तेज गिरावट का शिकार हुआ है।
ग्रे मार्केट को कवर करने वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक, इसका जीएमपी आईपीओ खुलने से कुछ दिन पहले 300 रुपये के पार जा पहुंचा था। लेकिन शनिवार दोपहर तक घटकर 87 रुपये रह गया, जो अपने उच्चतम स्तर से करीब 71 प्रतिशत कम है। हालांकि ग्रे मार्केट में उत्साह कमजोर पड़ा है, इसके बावजूद 22,569 करोड़ रुपये के एनएसई आईपीओ को निवेशकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला।
दूसरे दिन पूरा सब्सक्राइब हुआ NSE IPO
शुक्रवार को बोली के दूसरे दिन NSE IPO इश्यू पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया। बीएसई के आंकड़ों के मुताबिक, 8.86 करोड़ शेयरों के मुकाबले 10.28 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां प्राप्त हुईं।
यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) आधारित है, जिसके तहत मौजूदा शेयरधारक 12.64 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री कर रहे हैं। इसका मतलब है कि शेयर बिक्री से प्राप्त राशि सीधे एनएसई के पास नहीं जाएगी।
कंपनी ने आईपीओ के लिए 1,700 रुपये से 1,785 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। ऊपरी प्राइस बैंड पर एनएसई का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) लगभग 4.42 लाख करोड़ रुपये बैठता है। यह सार्वजनिक निर्गम 21 सितंबर को बंद होगा, जबकि कंपनी के शेयरों के 24 सितंबर को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की उम्मीद है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रे मार्केट प्रीमियम केवल एक अनौपचारिक संकेतक होता है, जो यह दर्शाता है कि निवेशक सूचीबद्ध होने से पहले इश्यू मूल्य के ऊपर कितनी अतिरिक्त कीमत चुकाने को तैयार हैं। जीएमपी किसी भी तरह से यह सुनिश्चित नहीं करता कि शेयर प्रीमियम पर ही सूचीबद्ध होगा।
कैसा रहा NSE का वित्तीय प्रदर्शन?
वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो एनएसई का वित्त वर्ष 2025-26 में संचालन से राजस्व 16,601.31 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के 17,140.67 करोड़ रुपये की तुलना में तीन प्रतिशत से अधिक कम है।
इसी अवधि में एक्सचेंज की आय का प्रमुख स्रोत माने जाने वाले ट्रांजैक्शन शुल्क से राजस्व में भी गिरावट दर्ज की गई। यह वित्त वर्ष 2024-25 के 13,635.76 करोड़ रुपये से घटकर वित्त वर्ष 2025-26 में 13,057.01 करोड़ रुपये रह गया, जो लगभग 4 प्रतिशत की सालाना कमी को दर्शाता है। बाजार की नजर अब आईपीओ के अंतिम सब्सक्रिप्शन आंकड़ों और 24 सितंबर को होने वाली संभावित लिस्टिंग पर रहेगी, जहां निवेशकों की वास्तविक प्रतिक्रिया एनएसई के शेयर के प्रदर्शन को तय करेगी।
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(डिस्क्लेमर: यहां IPO को लेकर दी गई जानकारी निवेश की राय नहीं है। चूंकि, स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)
