गिरावट से डरें नहीं, एंट्री का अच्छा मौका, 50% रिटर्न की संभावना; दिग्गज फंड मैनेजर ने आंकड़ों के साथ किया ये दावा
शेयर बाजार में अगस्त से अक्टूबर तक गिरावट के बावजूद, फंड मैनेजर प्रशांत जैन ने अगले तीन सालों में भारतीय इक्विटी में 40-50% रिटर्न का अनुमान लगाया है।

HighLights
फंड मैनेजर प्रशांत जैन ने अगले 3 साल में 40-50% रिटर्न का अनुमान लगाया।
मौजूदा गिरावट निवेशकों के लिए बाजार में निवेश का अच्छा अवसर है।
FII बिकवाली दिसंबर मध्य तक थमने की उम्मीद, रिकवरी होगी।
नई दिल्ली। शेयर बाजार में अगस्त से शुरू हुई गिरावट का सिलसिला अक्टूबर तक जारी है, और इस साल निफ्टी (Nifty) अपने ऑल टाइम हाई से करीब 15 फीसदी तक टूट चुका है। पिछले कई सालों में यह पहली बार है जब मार्केट में इतनी बड़ी गिरावट हावी आई है। मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, देश के जाने-माने फंड मैनेजर प्रशांत जैन के अनुसार, इंडियन इक्विटी में लंबे समय से चल रही सुस्ती खत्म हो सकती है, और इसके करीब है। ऐसे में उन निवेशकों के लिए इन्वेस्टमेंट का एक अच्छा मौका बन रहा है जो थोड़े समय की उतार-चढ़ाव से आगे की सोच सकते हैं।
3P इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स, सितंबर 2026 की तिमाही रिपोर्ट में प्रशांत जैन का कहना है कि भारतीय बाज़ार अगले तीन सालों में 40-50% का रिटर्न दे सकते हैं, और इसमें गिरावट की संभावना कम समय के लिए ही होगी। उन्हें उम्मीद है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली का मौजूदा दौर दिसंबर के मध्य तक थम जाएगा, जिससे बाज़ार इस दबाव को झेलकर लगातार रिकवरी की ओर बढ़ सकेंगे।
'मार्केट में एंट्री के अच्छे मौके'
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले कुछ हफ़्ते या महीने मार्केट में एंट्री करने का एक अच्छा मौका हो सकता है। भारतीय इक्विटी मार्केट मुश्किल के दो साल से गुजर रहा है। सितंबर 2024 और सितंबर 2026 के बीच निफ्टी में 12.4% की गिरावट आई, जबकि इस दौरान विदेशी निवेशकों ने कुल 58 अरब डॉलर की भारतीय इक्विटी बेचीं। फिर भी FY25 और FY26 में इकॉनमी सालाना लगभग 7.5% की दर से बढ़ती रही। ऐसे में देश के आर्थिक प्रदर्शनऔर शेयर बाज़ार से मिलने वाले रिटर्न के बीच यह अंतर ही एक मौका है।
बाजार में गिरावट की वजह बाहरी
भारतीय शेयर बाज़ार को जियोपॉलिटिकल टकराव, टैरिफ, सोने के ज़्यादा इंपोर्ट, विदेशी डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट की वापसी और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। वहीं, ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर इन्वेस्टमेंट साइकल ने विदेशी पूंजी को कोरिया जैसे बाज़ारों की ओर मोड़ दिया, जिनका इन क्षेत्रों से सीधा संबंध है।
इसके बाद बिकवाली शुरू होने की एक ताज़ा वजह US 10-साल के ट्रेजरी यील्ड का मनोवैज्ञानिक रूप से अहम 5% का स्तर पार करना है। US में यील्ड बढ़ने से डॉलर एसेट्स ज़्यादा आकर्षक हो जाते हैं और दुनिया भर में कैपिटल की लागत बढ़ जाती है, जिससे इक्विटी वैल्यूएशन पर दबाव पड़ता है।
ये भी पढ़ें - 8 महीने में 750% का रिटर्न, अब हर स्टॉक पर 10 बोनस शेयर बांटेगी कंपनी; दाम ₹130 से भी कम, किसे मिलेगा फायदा?
इस लेटर में ऐतिहासिक तौर पर सबसे मज़बूत तर्क पिछले 25 सालों के 'निफ़्टी 50 टोटल रिटर्न इंडेक्स' के विश्लेषण से आता है। 3P इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स ने महीने के आखिर में मापी गई 15% या उससे ज़्यादा की दो-साल की रोलिंग गिरावट (ड्रॉडाउन) के बाद, अगले तीन सालों में मिलने वाले रिटर्न का विश्लेषण किया। नतीजों से पता चलता है कि बाज़ार में लंबे समय तक कमज़ोरी रहने के बाद अक्सर काफ़ी फ़ायदा हुआ है।
